सर्दियों में शीतलहर से पशुओं की इम्युनिटी कमजोर हो जाती है और दूध में गिरावट देखने को मिलती है.

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कई जिलों में यह नुस्खा सालों से इस्तेमाल हो रहा है, जो आज भी बिना किसी साइड इफेक्ट के असर दिखाता है.

सरसों के तेल की तासीर गर्म होती है, जो पशुओं के शरीर में अंदरूनी गर्मी बनाए रखती है और ठंड से बचाव करती है.

गुड़ पशुओं को तुरंत ऊर्जा देता है, पाचन सुधारता है और सर्दियों में कमजोरी से बचाता है.

तेल और गुड़ का संतुलित सेवन करने से पशु ज्यादा सक्रिय रहते हैं, जिसका सीधा असर दूध की मात्रा पर पड़ता है.

इस मिश्रण को सप्ताह में एक बार, शाम के समय चारा खाने के बाद देना चाहिए और तुरंत पानी नहीं पिलाना चाहिए.

सरसों का तेल शरीर की जकड़न, सूजन और थकान को कम करता है, जिससे पशु ज्यादा आरामदायक महसूस करते हैं.

यह देसी नुस्खा महंगी दवाओं का सस्ता विकल्प है, जो छोटे पशुपालकों के लिए बेहद फायदेमंद साबित हो सकता है.

Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी केवल सामान्य ज्ञान पर आधारित है.

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