अचानक खाद की डिमांड में इजाफा, यूरिया की बिक्री 80 फीसदी तक बढ़ी.. क्या टेंशन में हैं किसान
मार्च- अप्रैल 2026 में उर्वरक बिक्री में तेज उछाल आया, जिससे सब्सिडी और भूमि रिकॉर्ड आधारित व्यवस्था पर सवाल उठे. अमेरिका-इजराइल-ईरान तनाव से आपूर्ति प्रभावित हुई और कई राज्यों में किसानों ने जमकर खरीदारी की. हरियाणा में यूरिया की बिक्री 80 फीसदी तक बढ़ गई है.
Fertilizer Sales: अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच टेंशन के चलते उर्वरक की सप्लाई भले ही प्रभावित हुई है, लेकिन खाद की खपत कम होने के बजाए बढ़ गई है. खास कर मार्च- अप्रैल महीने के बीच उर्वरक की बिक्री में अचानक तेज बढ़ोतरी देखने को मिली है. इससे सरकारी सब्सिडी और जमीन रिकॉर्ड से जुड़ी व्यवस्था की कमजोरियों पर सवाल उठने लगे हैं. खास बात यह है कि हरियाणा- पंजाब में किसान कुछ ज्यादा ही जल्दबाजी में खाद खरीद रहे हैं.
बिजनेसलाइन की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच तनाव के बाद वैश्विक स्तर पर उर्वरक आपूर्ति प्रभावित हुई. इसके चलते महाराष्ट्र, हरियाणा, पंजाब, उत्तर प्रदेश और कर्नाटक जैसे बड़े कृषि राज्यों में किसानों ने घबराकर ज्यादा मात्रा में उर्वरक खरीदना शुरू कर दिया. हरियाणा में स्थिति खास तौर पर तेज रही. यहां यूरिया की बिक्री करीब 80 फीसदी बढ़कर 1.71 लाख टन पहुंच गई. वहीं, डीएपी (Di-Ammonium Phosphate) की बिक्री दोगुनी से भी ज्यादा होकर 0.37 लाख टन हो गई, जो पिछले साल की इसी अवधि की तुलना में काफी अधिक है.
डीएपी में 23,489 टन की कमी
मार्च- अप्रैल 2026 में उर्वरक की मांग में अचानक बढ़ोतरी ने सरकार की उस पायलट योजना पर असर डाला है, जिसे 2025-26 रबी सीजन में सफल बताया गया था. इस योजना के तहत हरियाणा में किसानों को उनकी जमीन के रिकॉर्ड और बोई गई फसल के आधार पर ही सब्सिडी वाला उर्वरक दिया गया था. सरकार का दावा था कि इससे यूरिया की खपत में 1.26 लाख टन और डीएपी में 23,489 टन की कमी आई, जिससे करीब 700 करोड़ रुपये से ज्यादा की बचत हुई. पूरे 2025- 26 के दौरान इस पायलट योजना से कुल लगभग 3.4 लाख टन उर्वरक की बचत बताई गई थी, जिसमें रबी सीजन में 1.5 लाख टन और खरीफ में 1.9 लाख टन की कमी शामिल थी.
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इस वजह के किसान ज्यादा खरीद रहे खाद
लेकिन हाल ही में वैश्विक स्तर पर आपूर्ति में बाधा और बाजार में अनिश्चितता के कारण किसानों ने घबराकर बड़ी मात्रा में उर्वरक खरीदना शुरू कर दिया. इससे इस तरह की सख्त डिजिटल राशनिंग प्रणाली की सीमाएं सामने आईं, क्योंकि संकट के समय यह व्यवस्था बढ़ती मांग और घबराहट को पूरी तरह नियंत्रित नहीं कर पाई. यह रुझान सिर्फ हरियाणा तक सीमित नहीं रहा, बल्कि कई राज्यों में यूरिया और डीएपी की बिक्री में तेज बढ़ोतरी देखने को मिली. आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, गुजरात और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों में यूरिया की बिक्री थोड़ी कम हुई, लेकिन वैश्विक आपूर्ति को लेकर बनी चिंता के कारण किसानों ने फॉस्फेट आधारित उर्वरकों की जमकर खरीद की. इन राज्यों में डीएपी की बिक्री क्रमशः 71 फीसदी और 77 फीसदी तक बढ़ गई.
किसान कितना करते हैं खाद का इस्तेमाल
उर्वरक विभाग ने पहले ही संसद की स्थायी समिति को बताया था कि यह पायलट प्रोजेक्ट अभी शुरुआती चरण में है और इसे देशभर में लागू करने से पहले स्वतंत्र मूल्यांकन किया जाएगा. उर्वरक सचिव रजत कुमार मिश्रा ने जनवरी में कहा था कि 2024- 25 में भारत के लगभग 65 फीसदी किसान साल भर में सिर्फ 5- 7 बोरी यूरिया ही खरीदते हैं. वहीं 163 ऐसे जिले हैं जहां उर्वरक की खपत बहुत ज्यादा है, और वहां कुल खपत का बड़ा हिस्सा लगभग 22 लाख बैग (करीब 1 से 1.8 लाख टन) इस्तेमाल होता है.