यूरिया घोटाला.. 266 वाली बोरी 1647 रुपये में बेचा जा रहा, ग्रेडिंग बदलकर खपाई जा रही नकली खाद

यूरिया घोटाला.. 266 वाली बोरी 1647 रुपये में बेचा जा रहा, ग्रेडिंग बदलकर खपाई जा रही नकली खाद

Urea Scam Haryana : यूरिया की ग्रेडिंग बदलकर बड़ा घोटाला किया जा रहा है. दिल्ली की फर्म ने हरियाणा की सहकारी संस्था हैफेड के कर्मचारियों से मिलीभगत करके कृषि में इस्तेमाल की जाने वाली यूरिया को औद्योगिक इस्तेमाल के लिए बेचते पकड़े गए हैं.

ग्रामीण कारोबार को मिली नई ताकत, नाबार्ड की मदद से 28 कृषि उत्पादों को GI टैग मिला

नाबार्ड की मदद से 28 नए पारंपरिक भारतीय उत्पादों को GI टैग मिला है. इससे कारीगरों को अपनी कला की बेहतर पहचान, बड़े बाजार और उचित कीमत मिलने की उम्मीद है. यह पहल ग्रामीण कारोबार को मजबूत करेगी, रोजगार बढ़ाएगी और देश की पारंपरिक कला को नई पहचान दिलाने में अहम भूमिका निभाएगी.

आम-केला हो जाते हैं मीठे, फिर नींबू क्यों रह जाता है खट्टा? वैज्ञानिक ने खोला बड़ा राज

आम-केला हो जाते हैं मीठे, फिर नींबू क्यों रह जाता है खट्टा? वैज्ञानिक ने खोला बड़ा राज

नींबू पकने के बाद भी खट्टा क्यों रहता है, इसके पीछे वैज्ञानिक कारण छिपे हैं. कृषि विशेषज्ञ के अनुसार नींबू एक नॉन-क्लाइमैक्टेरिक फल है, जिसमें एथिलीन का प्रभाव कम होता है. इसमें साइट्रिक एसिड की मात्रा अधिक और स्टार्च कम होता है, इसलिए पकने के बाद भी इसका स्वाद खट्टा बना रहता है.

अब किसानों को नहीं करनी पड़ेगी मशक्कत, ड्रोन तकनीक से मिनटों में होगा पूरे खेत का कीटनाशक छिड़काव
सब्जियां बेचकर 8 लाख कमा रहे किसान नरेश भट्ट, लहसुन-मिर्च की मॉडर्न फार्मिंग से बढ़ी कमाई
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समस्या का समाधान अब एक ही प्लेटफॉर्म पर, घर बैठे मिलेगा मौसम और मंडी का पूरा अपडेट
आलू फसल पर पिछेता झुलसा बीमारी का खतरा, CPRI ने किसानों को दवा छिड़काव का तरीका बताया

आलू फसल पर पिछेता झुलसा बीमारी का खतरा, CPRI ने किसानों को दवा छिड़काव का तरीका बताया

Agriculture Advisory for Potato Farmers : केंद्रीय आलू अनुसंधान संस्थान ने इंडो ब्लाइटकास्ट (पैन इंडिया) पूर्वानुमान मॉडल के अनुसार मौसम की वर्तमान परिस्थितियों में झुलसा बीमारी के फैलने के लिए अनुकूल हैं बताया है और निकट भविष्य में आलू फसल में इसका प्रकोप बढ़ने की चेतावनी दी है.

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अल नीनो अलर्ट! धान की खेती घटाएगी सरकार, 50 लाख एकड़ में वैकल्पिक फसलों पर जोर
कम लागत में बढ़ाएं दूध उत्पादन! सूडान चरी की एक बुवाई से कई बार मिलेगा पौष्टिक हरा चारा

कम लागत में बढ़ाएं दूध उत्पादन! सूडान चरी की एक बुवाई से कई बार मिलेगा पौष्टिक हरा चारा

पशुपालकों के लिए सूडान चरी कम लागत में अधिक फायदा देने वाला हरा चारा माना जाता है. इसकी एक बार बुवाई करने पर लगभग 25 दिन के अंतराल में कई बार कटाई की जा सकती है. विशेषज्ञों के अनुसार, भूसे के साथ संतुलित मात्रा में खिलाने से पशुओं की सेहत बेहतर रहती है और दूध उत्पादन बढ़ाने में मदद मिलती है.