बिहार में पशुपालन से बढ़ेगी किसानों की कमाई, सरकार की नई योजनाओं से दूध उत्पादन में होगा इजाफा

बिहार में पशुपालन और डेयरी सेक्टर को बढ़ावा देने के लिए सरकार कई योजनाएं चला रही है. बेहतर नस्ल, चारा, सस्ती लोन और बाजार की सुविधा से किसानों को फायदा मिल रहा है. इससे दूध उत्पादन बढ़ रहा है और पशुपालन किसानों के लिए कमाई का मजबूत साधन बनता जा रहा है.

Saurabh Sharma
नोएडा | Published: 19 Mar, 2026 | 07:03 PM

Dairy Development: बिहार के गांवों में अब खेती के साथ-साथ पशुपालन भी किसानों की कमाई का मजबूत सहारा बनता जा रहा है. सरकार की नई योजनाओं और मदद से किसान अब सिर्फ दूध बेचकर ही नहीं, बल्कि पशुपालन से जुड़े कई कामों से अच्छा मुनाफा कमा रहे हैं. मत्स्यपालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय के अनुसार, इन योजनाओं का सीधा फायदा लाखों किसानों को मिल रहा है.

राष्ट्रीय गोकुल मिशन से बढ़ रहा दूध उत्पादन

मत्स्यपालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय के अनुसार, सरकार ने स्वदेशी नस्ल की गायों को बढ़ावा देने के लिए राष्ट्रीय गोकुल मिशन शुरू किया है. इसका मकसद है अच्छी नस्ल के पशु तैयार करना और दूध उत्पादन बढ़ाना. इस योजना के तहत कृत्रिम गर्भाधान जैसी तकनीकों से पशुओं की नस्ल सुधारी जा रही है. पिछले तीन साल में बिहार के 33.39 लाख दूध उत्पादक किसानों को इसका फायदा मिला है. इससे दूध उत्पादन बढ़ा है और किसानों की कमाई में भी सुधार हुआ है.

राष्ट्रीय पशुधन मिशन से मिल रहा रोजगार

राष्ट्रीय पशुधन मिशन के जरिए पशुपालन को रोजगार का जरिया बनाया जा रहा है. इसमें बकरी पालन, मुर्गी पालन, अंडा और ऊन उत्पादन जैसे कामों को बढ़ावा दिया जा रहा है. इस योजना के तहत बिहार में 2 परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है, जिनकी लागत 70 लाख रुपये है. इसमें किसानों को 14 लाख रुपये की सब्सिडी भी दी गई है. इससे छोटे किसान भी अपना व्यवसाय शुरू कर पा रहे हैं.

चारा और पशु आहार पर खास ध्यान

पशुओं के अच्छे स्वास्थ्य के लिए सही चारा बहुत जरूरी होता है. इसलिए सरकार चारा बीज उत्पादन, चारा भंडारण और पशु आहार से जुड़े कामों को बढ़ावा दे रही है. इसके तहत बंजर जमीन और गैर-खेती वाली जमीन पर भी चारा उगाने के प्रयास किए जा रहे हैं. इससे सालभर पशुओं को हरा चारा  मिल सकेगा और दूध उत्पादन में कमी नहीं आएगी.

डेयरी और बाजार से जोड़ने की तैयारी

सरकार किसानों को बाजार से जोड़ने के लिए डेयरी इंफ्रास्ट्रक्चर मजबूत कर रही है. राष्ट्रीय डेयरी विकास कार्यक्रम  (NPDD) के तहत बिहार में 19 परियोजनाएं मंजूर की गई हैं. इनकी कुल लागत 346 करोड़ रुपये से ज्यादा है. इससे दूध की जांच, स्टोरेज और बिक्री की बेहतर व्यवस्था हो रही है. किसान अब अपना दूध आसानी से बाजार तक पहुंचा पा रहे हैं और उन्हें बेहतर दाम मिल रहे हैं.

सस्ती लोन और बीमा से किसानों को राहत

सरकार पशुपालकों को सस्ता लोन और बीमा की सुविधा  भी दे रही है. किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) के जरिए किसानों को कम ब्याज पर लोन मिलता है. इसके अलावा पशुओं के बीमा पर भी सरकार सब्सिडी दे रही है. बिहार में अब तक 2.54 लाख से ज्यादा KCC खाते सक्रिय हैं, जिनसे किसानों को आर्थिक मदद मिल रही है.

बिहार में पशुपालन से जुड़े अहम आंकड़े

विषय आंकड़े
लाभान्वित दूध उत्पादक किसान 33.39 लाख
पशुधन मिशन परियोजनाएं 2
कुल परियोजना लागत 70 लाख रुपये
दी गई सब्सिडी 14 लाख रुपये
NPDD परियोजनाएं 19
कुल लागत (NPDD) 346 करोड़ रुपये
KCC खाते 2.54 लाख
कुल लोन राशि 1289.73 करोड़ रुपये

पशुओं के स्वास्थ्य पर भी ध्यान

सरकार पशुओं के स्वास्थ्य को बेहतर बनाने के लिए टीकाकरण और इलाज की सुविधाएं बढ़ा रही है. अब तक बिहार में लाखों पशुओं का टीकाकरण  किया जा चुका है. इससे बीमारियां कम हो रही हैं और पशु स्वस्थ रह रहे हैं. स्वस्थ पशु ज्यादा दूध देते हैं, जिससे किसानों को ज्यादा फायदा होता है.

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Published: 19 Mar, 2026 | 07:03 PM
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