Livestock Vaccination: गर्मी का मौसम आते ही इंसानों के साथ-साथ पशुओं के लिए भी कई तरह की परेशानियां शुरू हो जाती हैं. तेज धूप, उमस और बदलते मौसम के कारण पशुओं में कई बीमारियां तेजी से फैलती हैं. अगर समय पर सावधानी न बरती जाए तो पशुपालकों को भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है. ऐसे समय में पशु चिकित्सकों की सबसे बड़ी सलाह होती है-समय पर टीकाकरण. पशु चिकित्सक कुंवर घनश्याम (KVK Noida) के अनुसार, गर्मियों से पहले टीकाकरण कराना पशुओं को बीमारियों से बचाने का सबसे आसान और सस्ता तरीका है.
गर्मियों में क्यों बढ़ जाता है बीमारियों का खतरा
पशु चिकित्सक कुंवर घनश्याम के अनुसार, गर्मी के मौसम में तापमान काफी ज्यादा हो जाता है. कई जगहों पर उमस भी बढ़ जाती है. ऐसे माहौल में बैक्टीरिया और वायरस जल्दी फैलते हैं, जिससे पशुओं में संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है. गाय, भैंस, बकरी और अन्य पशुओं में इस मौसम में कई तरह की मौसमी बीमारियां देखने को मिलती हैं. अगर एक पशु बीमार हो जाए तो धीरे-धीरे पूरा झुंड भी प्रभावित हो सकता है. इसी कारण विशेषज्ञ पशुपालकों को सलाह देते हैं कि गर्मियों की शुरुआत से पहले ही पशुओं का टीकाकरण करा लिया जाए. इससे बीमारी फैलने का खतरा काफी हद तक कम हो जाता है और पशुधन सुरक्षित रहता है.
समय पर टीका लगवाने के बड़े फायदे
समय पर टीकाकरण कराने से पशुओं की रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत होती है. इसका मतलब है कि उनका शरीर बीमारियों से लड़ने के लिए ज्यादा सक्षम हो जाता है. अगर पशु स्वस्थ रहेंगे तो दवाइयों और इलाज पर होने वाला खर्च भी कम होगा. कई बार बीमारी फैलने पर पशुपालकों को हजारों रुपये खर्च करने पड़ते हैं, लेकिन टीकाकरण से यह खर्च काफी हद तक बच सकता है. स्वस्थ पशु ज्यादा दूध देते हैं और उनका उत्पादन भी बेहतर होता है. दूध, अंडा या मांस की गुणवत्ता अच्छी होने से बाजार में भी अच्छी कीमत मिलती है. यही कारण है कि विशेषज्ञ पशुपालकों को नियमित टीकाकरण की सलाह देते हैं.
टीकाकरण से पहले रखें इन बातों का ध्यान
पशुओं को टीका लगवाने से पहले कुछ जरूरी बातों का ध्यान रखना बेहद जरूरी है. सबसे पहले यह देखना चाहिए कि पशु पूरी तरह स्वस्थ हो. अगर पशु बीमार है, बहुत कमजोर है या उसे बुखार है, तो ऐसे पशु को तुरंत टीका नहीं लगवाना चाहिए. पहले उसका इलाज करवाना जरूरी होता है.
विशेषज्ञों के अनुसार टीकाकरण से करीब दो सप्ताह पहले पशुओं को कृमिनाशक दवा देना भी जरूरी होता है. इससे शरीर में मौजूद कीड़े खत्म हो जाते हैं और टीका बेहतर तरीके से काम करता है. इसके साथ ही, संभावित बीमारी फैलने से करीब 20 से 30 दिन पहले टीकाकरण कराना सबसे बेहतर माना जाता है, ताकि पशु के शरीर में समय रहते प्रतिरोधक क्षमता बन सके.
टीका लगाते समय ये सावधानियां जरूरी
टीकाकरण के दौरान साफ-सफाई और सही तरीका अपनाना बहुत जरूरी होता है. विशेषज्ञ बताते हैं कि अगर टीका सही तरीके से न लगाया जाए तो उसका पूरा फायदा नहीं मिल पाता. टीकों को हमेशा तय तापमान में यानी कोल्ड बॉक्स में सुरक्षित रखा जाना चाहिए. अगर तापमान ज्यादा बढ़ जाए या कम हो जाए तो टीका खराब हो सकता है और उसका असर भी खत्म हो सकता है. इसके अलावा हर पशु के लिए अलग सुई और सिरिंज का इस्तेमाल करना चाहिए. इससे संक्रमण फैलने का खतरा कम रहता है. इस्तेमाल की गई सुई और सिरिंज का सही तरीके से निपटान करना भी जरूरी होता है.
झुंड में टीकाकरण और रिकॉर्ड रखना भी जरूरी
जहां पशुओं की संख्या ज्यादा होती है, वहां सामूहिक यानी झुंड में टीकाकरण कराना ज्यादा प्रभावी माना जाता है. इससे एक साथ सभी पशुओं को सुरक्षा मिल जाती है और बीमारी फैलने की संभावना कम हो जाती है. गर्भावस्था के दौरान पशुओं को टीका लगाने से पहले पशु चिकित्सक की सलाह जरूर लेनी चाहिए. क्योंकि कुछ मामलों में गर्भवती पशुओं के लिए विशेष सावधानी जरूरी होती है. इसके अलावा हर टीकाकरण का रिकॉर्ड रखना भी बेहद जरूरी है. पशु स्वास्थ्य कार्ड बनवाने से यह पता रहता है कि किस पशु को कब कौन-सा टीका लगाया गया है. इससे भविष्य में सही समय पर अगला टीकाकरण कराना आसान हो जाता है. अगर पशुपालक इन आसान बातों का ध्यान रखें और समय पर टीकाकरण कराएं, तो गर्मियों में भी पशु स्वस्थ रहेंगे और पशुपालन का व्यवसाय ज्यादा सुरक्षित और लाभदायक बन सकता है.