Dairy Plus Scheme: अगर गांव में रहकर कम खर्च में अच्छा काम शुरू करना चाहते हैं, तो डेयरी व्यवसाय एक बढ़िया विकल्प बन सकता है. अब मध्य प्रदेश सरकार भी किसानों को इसमें मदद दे रही है. मुख्यमंत्री डेयरी प्लस योजना के तहत किसानों को बेहतर नस्ल की मुर्रा भैंस दिलाई जा रही है. खास बात यह है कि किसान को सिर्फ 1.47 लाख रुपये लगाने होते हैं, बाकी रकम सरकार देती है. इससे किसानों को रोजाना 14 से 16 लीटर तक दूध मिल रहा है और उनकी आय तेजी से बढ़ रही है.
ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने की पहल
खेती के साथ-साथ पशुपालन आज गांवों में कमाई का मजबूत साधन बनता जा रहा है. इसी को ध्यान में रखते हुए सरकार ने डेयरी प्लस योजना शुरू की है. इस योजना का मकसद ग्रामीण इलाकों में डेयरी व्यवसाय को बढ़ावा देना और किसानों को अतिरिक्त आय का साधन देना है. इस योजना के तहत किसानों को अच्छी नस्ल के पशु उपलब्ध कराए जाते हैं, जिससे दूध उत्पादन बढ़े और किसानों की आमदनी भी बढ़े. कई जगहों पर किसान पारंपरिक खेती के साथ डेयरी को जोड़कर अच्छा मुनाफा कमा रहे हैं. इससे गांवों में रोजगार के मौके भी बढ़ रहे हैं और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिल रही है.
योजना में कैसे मिलती है आर्थिक मदद
डेयरी प्लस योजना के तहत डेयरी शुरू करने के लिए सरकार आर्थिक सहायता देती है. इस योजना में किसान को लगभग 1,47,500 रुपये का ड्राफ्ट बनाकर विभाग में जमा करना होता है. इसके बराबर की रकम सरकार भी मिलाती है. इस तरह पूरी योजना की लागत लगभग 2,95,000 रुपये तक पहुंचती है. इस रकम से किसानों को दो मुर्रा नस्ल की भैंसें उपलब्ध कराई जाती हैं. यह नस्ल दूध देने के लिए काफी प्रसिद्ध मानी जाती है और डेयरी व्यवसाय के लिए बेहद फायदेमंद होती है. योजना का फायदा लेने वाले किसानों को भैंस खरीदने में भी पूरी मदद मिलती है, जिससे उन्हें ज्यादा परेशानी नहीं होती.
हरियाणा-पंजाब से लाई जाती हैं मुर्रा भैंसें
इस योजना की खास बात यह है कि किसानों को सामान्य भैंस नहीं बल्कि मुर्रा नस्ल की भैंसें दिलाई जाती हैं. यह भैंसें हरियाणा और पंजाब जैसे राज्यों से लाई जाती हैं, जहां इनकी अच्छी नस्ल मिलती है. किसानों को भैंस पसंद करने के लिए वहां जाने की सुविधा भी दी जाती है. यात्रा, रहने और खाने का खर्च भी सरकार की ओर से दिया जाता है. किसान वहां जाकर अपनी पसंद की भैंस चुनते हैं और उस पर टैग लगाया जाता है. इसके बाद सप्लायर द्वारा भैंस को सीधे किसान के घर तक पहुंचा दिया जाता है. इस प्रक्रिया से किसानों को अच्छी गुणवत्ता वाले पशु मिल जाते हैं और डेयरी व्यवसाय शुरू करना आसान हो जाता है.
रोज 14 से 16 लीटर दूध से बढ़ रही आय
मुर्रा नस्ल की भैंसें दूध उत्पादन के लिए जानी जाती हैं. इस योजना के तहत लाई गई भैंसें रोजाना 14 से 16 लीटर तक दूध दे रही हैं. कुछ जगहों पर इससे भी ज्यादा दूध मिल रहा है. दूध की बिक्री से किसानों को हर महीने अच्छी कमाई हो रही है. अगर किसान सही तरीके से चारा, साफ-सफाई और पशु देखभाल पर ध्यान दें तो दूध उत्पादन और भी बढ़ सकता है. विशेषज्ञों का मानना है कि अगर किसान आधुनिक डेयरी प्रबंधन अपनाएं तो यह व्यवसाय लंबे समय तक स्थिर आय देने वाला साबित हो सकता है.
पात्रता, आवेदन और जरूरी दस्तावेज
डेयरी प्लस योजना का लाभ लेने के लिए कुछ आसान शर्तें रखी गई हैं. जो किसान पहले से पशुपालन कर रहे हैं या जिनके पास एक-दो गाय या भैंस हैं, वे भी इस योजना के लिए आवेदन कर सकते हैं. हालांकि एक परिवार से केवल एक व्यक्ति ही इसका लाभ ले सकता है. आवेदन करने के लिए इच्छुक व्यक्ति को अपने नजदीकी पशु अस्पताल, पशु चिकित्सा अधिकारी या जिला पशु चिकित्सा कार्यालय में जाकर आवेदन फॉर्म लेना होता है. फॉर्म भरकर जरूरी दस्तावेजों के साथ जमा करना पड़ता है.
जरूरी दस्तावेजों में आधार कार्ड, पैन कार्ड, निवास प्रमाण पत्र, बैंक पासबुक और जमीन से जुड़े दस्तावेज शामिल होते हैं. योजना में सामान्य और पिछड़ा वर्ग के लोगों को 50 प्रतिशत तक सब्सिडी मिलती है, जबकि अनुसूचित जाति और जनजाति वर्ग को 75 प्रतिशत तक अनुदान दिया जाता है. इस योजना से कई ग्रामीण परिवारों की आय बढ़ रही है और डेयरी व्यवसाय गांवों में तेजी से लोकप्रिय होता जा रहा है.