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कश्मीर में केसर उत्पादन गिरा, साही के हमलों और मौसम ने मिलकर किसानों की बढ़ाई मुश्किलें
विशेषज्ञों का मानना है कि साही के हमलों के पीछे एक बड़ी वजह वनों की कटाई है. जंगल कम होने से ये जानवर अपने प्राकृतिक आवास से बाहर निकलकर खेतों की ओर आ रहे हैं. पंपोर और आसपास के इलाके, जो भारत में केसर उत्पादन का मुख्य केंद्र हैं, अब इन जानवरों के लिए आसान निशाना बन गए हैं.
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खेत में ये छोटी गलती पड़ेगी भारी! किसान कर लें ये काम, नहीं तो एक चिंगारी से जल सकती है फसल
Crop Fire Safety Tips: कटाई के समय खेतों में आग लगने का खतरा सबसे ज्यादा रहता है, और छोटी सी गलती भी बड़ा नुकसान कर सकती है. ऐसे में किसानों के लिए जरूरी है कि वे खेत में काम करते समय बिजली के उपकरणों और आसपास की परिस्थितियों को नजरअंदाज न करें. सही सावधानी और सतर्कता अपनाकर फसल को सुरक्षित रखा जा सकता है और नुकसान से बचा जा सकता है.
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किसानों के बीच तोरई की नई किस्म की धूम.. 60 दिन में भर देगी जेब! सस्ते में यहां से खरीदें बीज
Ridge Gourd Farming: जायद सीजन में ‘काशी रक्षिता’ तोरई की खेती किसानों के लिए कम लागत में ज्यादा मुनाफा देने वाला बेहतरीन विकल्प है. यह किस्म 50-60 दिनों में तैयार हो जाती है, गर्मी में अच्छी पैदावार देती है और बीमारियों के प्रति सहनशील है, जिससे किसान जल्दी कमाई कर सकते हैं.
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बारामती में केले के दाम गिरकर 2-3 रुपये किलो, मजबूर किसान ने खेत में ही जोत दी पूरी फसल
बारामती क्षेत्र पहले गन्ने की खेती के लिए जाना जाता था, लेकिन गन्ने के दामों में कमी आने के बाद कई किसानों ने केले की खेती शुरू की थी. उन्हें लगा था कि यह फसल ज्यादा लाभ देगी. लेकिन अब केले के दामों में भी भारी गिरावट ने किसानों को संकट में डाल दिया है.
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परवल में फूल तो बहुत, लेकिन फल नहीं? अपनाएं एक्सपर्ट का ये 30 दिन का स्प्रे शेड्यूल, फलों से लद जाएगा पौधा
Tips For Farmers: परवल की खेती में फूल से फल बनने के लिए एक वैज्ञानिक 30 दिन का स्प्रे शेड्यूल अपनाना जरूरी है. इसमें बोरॉन, पोटाश, एनएए, सूक्ष्म पोषक तत्व, कीट नियंत्रण दवाएं और कैल्शियम नाइट्रेट का सही समय पर उपयोग शामिल है. इस तकनीक से परागण बेहतर होता है, फूल झड़ने की समस्या कम होती है और फल बनने की दर बढ़ जाती है, जिससे किसानों की पैदावार और आमदनी दोनों में सुधार होता है.
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खाद आयात कम करने की तैयारी, ICAR ने दिया रोडमैप- AI और संतुलित उपयोग पर रहेगा फोकस
भारत में उर्वरकों पर सरकार का खर्च लगातार बढ़ रहा है. 2024-25 में यह सब्सिडी करीब 1.71 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गई. इसकी बड़ी वजह आयात पर निर्भरता है, खासकर फॉस्फोरस और पोटाश जैसे पोषक तत्वों के लिए. इसके अलावा यूरिया उत्पादन में इस्तेमाल होने वाली लगभग 80 फीसदी प्राकृतिक गैस भी आयात करनी पड़ती है.








