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राजस्थान से यूपी तक सरसों की फसल लहलहाई, पैदावार में 10 प्रतिशत बढ़ोतरी का अनुमान
इस सीजन में सरसों की खेती का रकबा पिछले साल की तुलना में साफ तौर पर बढ़ा है. राजस्थान, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश जैसे प्रमुख उत्पादक राज्यों में किसानों ने सरसों की ओर ज्यादा रुझान दिखाया है. देशभर में सरसों की खेती का कुल रकबा बढ़कर करीब 89.36 लाख हेक्टेयर हो गया है, जबकि पिछले साल यह 86.57 लाख हेक्टेयर था.
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City Of Bamboo: बांस का शहर, जहां जंगल से लेकर घर तक बांस बनता है हर किसी की कमाई का रास्ता!
Bans Ka Shehar: राजस्थान का बांसवाड़ा शहर अपने घने बांस के जंगलों और आदिवासी संस्कृति के लिए मशहूर है. यहां लोग बांस का इस्तेमाल घर बनाने, खेतों के औजार, बाड़, टोकरियां और घरेलू सामान बनाने में करते हैं. बांस सिर्फ जंगल का पेड़ नहीं, बल्कि लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी और कमाई का भी अहम हिस्सा रहा है.
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तालाब नहीं तो क्या हुआ! अब गमले और टब में भी खिलेगा कमल, जानिए घर पर उगाने का पूरा तरीका
कमल के पौधे को सूरज की रोशनी बेहद पसंद है. यह ऐसा पौधा है जो बिना धूप के ठीक से बढ़ ही नहीं पाता. इसलिए अगर आप घर में कमल उगाने की सोच रहे हैं, तो सबसे पहले ऐसी जगह चुनें जहां रोज कम से कम पांच से छह घंटे सीधी धूप आती हो. छत, खुली बालकनी या आंगन इसके लिए सबसे अच्छी जगह मानी जाती है.
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सुपारी पर WHO की कैंसर रिपोर्ट से मचा हड़कंप, CAMPCO ने सरकार से कहा- भारतीय रिसर्च पूरी होने तक न लगे रोक
भारत दुनिया का सबसे बड़ा सुपारी उत्पादक देश है. करीब 2 करोड़ लोग प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से सुपारी की खेती, व्यापार और प्रोसेसिंग से जुड़े हुए हैं. अकेले कर्नाटक में देश की लगभग 73 प्रतिशत सुपारी पैदा होती है. ऐसे में अगर जल्दबाजी में कोई प्रतिबंध लगाया गया, तो इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को गहरा झटका लग सकता है.
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एक बार करें इस मसाले की खेती, 40 साल तक आएगा पैसा! सरकार भी दे रही मोटी सब्सिडी, जानें पूरा बिजनेस प्लान
Tips For Farmers: लौंग की खेती आज किसानों के लिए एक फायदे का सौदा बनती जा रही है. बाजार में लगातार ऊंचे दाम और कम उत्पादन के कारण इसकी मांग हमेशा बनी रहती है. सही मौसम, धैर्य और देखभाल के साथ किसान एक एकड़ से सालाना करीब 3 लाख रुपये तक कमा सकते हैं. साथ ही सरकारी सब्सिडी इस खेती को और आसान बना रही है.
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फसल पर कीड़े-मकौड़ों का हमला? तो कीटनाशक नहीं, ये प्राकृतिक तरीके अपनाइए
धीरे-धीरे किसान यह समझने लगे हैं कि अगर फसल को प्राकृतिक तरीके से सुरक्षित रखा जाए, तो न केवल मिट्टी उपजाऊ बनी रहती है, बल्कि लागत भी कम होती है और पैदावार ज्यादा टिकाऊ होती है. अच्छी बात यह है कि प्रकृति ने खुद हमें ऐसे कई उपाय दिए हैं, जिनसे कीटों को बिना जहर के नियंत्रित किया जा सकता है.








