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बिहार में बदलेगा गौपालन का तरीका, अब बिना मिट्टी उगेगा चारा और मशीनें रखेंगी गायों पर नजर
बिहार सरकार का डेयरी, मत्स्य एवं पशु संसाधन विभाग गौपालन को आधुनिक बनाने पर जोर दे रहा है. बिना मिट्टी के पौष्टिक चारा उगाने और गायों के खानपान की निगरानी करने वाली तकनीकों को बढ़ावा दिया जा रहा है. इससे पशुओं का स्वास्थ्य बेहतर होगा और किसानों की आय बढ़ाने में मदद मिलने की उम्मीद है.
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45°C गर्मी और तेज लू से पशु बेहाल, नौतपा में ऐसे रखें बेजुबान जानवरों का खास ध्यान
नौतपा की भीषण गर्मी और लगातार बढ़ते तापमान ने पशुओं की परेशानी बढ़ा दी है. तेज लू और पानी की कमी के कारण कई जानवर बीमार पड़ रहे हैं. ऐसे मौसम में पशुओं को ठंडा पानी, छांव और सही खानपान देना बेहद जरूरी माना जा रहा है ताकि उन्हें गर्मी के खतरे से बचाया जा सके.
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किसान को भटकना नहीं पड़े.. शिकायत निपटान टॉप प्रायोरिटी, AI से कृषि को धार देने का ऐलान
केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने एआई, डेटा और डिजिटल गवर्नेंस से कृषि-ग्रामीण विकास को नई धार देने का ऐलान किया है. उन्होंने कृषि और ग्रामीण क्षेत्र के कार्यों और योजनाओं की मासिक समीक्षा और नतीजे जारी करने के निर्देश दिए हैं.
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बिहार में पशुपालन को टेक्नोलॉजी बूस्ट, नई तकनीक से विकसित होंगी ज्यादा दूध देने वाली गायें
बिहार में पशुपालन और डेयरी सेक्टर को मजबूत बनाने के लिए आधुनिक तकनीकों पर जोर बढ़ रहा है. एंब्रियो ट्रांसफर और IVF जैसी तकनीकों की मदद से बेहतर नस्ल की गायों की संख्या तेजी से बढ़ाई जाएगी. सरकार का मानना है कि इससे दूध उत्पादन बढ़ेगा और पशुपालकों की आमदनी में भी बड़ा इजाफा होगा.
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कृषि का भरोसेमंद साधन बना कन्वेयर, अब एक जगह से दूसरे जगह सामान ले जाना और भी आसान
पहले जहां भारी-भरकम सामान को एक जगह से दूसरी जगह ले जाने के लिए श्रमिकों पर निर्भर रहना पड़ता था, वहीं आज यह काम मशीनों से आसानी से किया जा सकता है. इस क्षेत्र में कन्वेयर एक ऐसी तकनीक है जिसने न केवल समय और श्रम की बचत की है बल्कि उत्पादन क्षमता को भी कई गुना बढ़ा दिया है. चाहे बात हो फैक्टरियों की, गोदामों की या फिर कृषि क्षेत्र की, कन्वेयर सिस्टम आज हर जगह उपयोगी साबित हो रहे हैं.
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PMKSY से किसानों को बड़ी सौगात, स्प्रिंकलर सिस्टम पर 50% तक सब्सिडी, अब पैदावार होगी दोगुनी
प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना (PMKSY) योजना के तहत किसानों को स्प्रिंकलर पर 45 से 50% तक की सब्सिडी दी जा रही है. इसके इस्तेमाल से 40% पानी की बचत होगी साथ ही पैदावार भी बढ़ेगी. किसान ऑनलाइन आवेदन के माध्यम इस योजना का लाभ उठा सकते है.








