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डीजल को कहें अलविदा! CNG-CBG ट्रैक्टर से खेती होगी सस्ती, साफ और ज्यादा मुनाफेदार
भारत सरकार प्राकृतिक गैस और बायोगैस को बढ़ावा देने के लिए बड़े पैमाने पर निवेश कर रही है. गांवों में CBG प्लांट लग रहे हैं, जिससे किसानों को स्थानीय स्तर पर ही ईंधन उपलब्ध हो सके. इससे न सिर्फ ईंधन की उपलब्धता बढ़ेगी, बल्कि किसान ऊर्जा के मामले में आत्मनिर्भर भी बनेंगे.
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छोटे किसानों की कमाई बढ़ाने वाले ट्रैक्टर इम्प्लीमेंट्स, जानिए कौन-सा है आपके लिए सही
आज जब खेती की लागत लगातार बढ़ रही है, तब छोटे किसानों के लिए सही ट्रैक्टर इम्प्लीमेंट्स चुनना बेहद जरूरी हो गया है. ये उपकरण न सिर्फ मेहनत कम करते हैं, बल्कि किसान को आत्मनिर्भर बनने की दिशा में भी आगे बढ़ाते हैं. सही चुनाव के साथ छोटा खेत भी बड़ी कमाई का जरिया बन सकता है
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बिहार सरकार बना रही कृषि यंत्र बैंक, किसानों को खेती की मशीनों तक पहुंच आसान होगी
Farm Machinery Bank: कृषि मंत्री ने कहा कि फार्म मशीनरी बैंक की स्थापना के लिए 10 लाख रुपये के खर्च पर 8 लाख रुपये सरकार देगी. स्थानीय फसल चक्र को ध्यान में रखते हुए जुताई, बुआई, रोपाई, हार्वेस्टिंग एवं थ्रेसिंग से संबंधित कृषि कार्यों के लिए आधुनिक यंत्र उपलब्ध रहेंगे.
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32 लाख किसानों को सोलर पंप मिलेंगे, सरकार सिर्फ 47 हजार रुपये में दे रही 4.68 लाख वाला सिंचाई पंप
मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा है कि वह राज्य के 32 लाख किसानों को सोलर सिंचाई पंप देंगे. उन्होंने कहा कि किसानों को भारी लागत से बचाने के लिए 90 फीसदी सब्सिडी दी जा रही है. यानी अब 4.68 लाख कीमत वाले सोलर पंप के लिए किसानों को केवल 47 हजार रुपये ही देने होंगे.
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स्प्रेइंग, कीमत और सरकारी नियमों की पूरी जानकारी, जानें कृषि ड्रोन किसानों के लिए क्यों बन रहा गेमचेंजर!
Agri Drone Rules: कृषि ड्रोन मॉडर्न फार्मिंग की एक नई तकनीक है, जिससे कम समय में फसलों पर सटीक स्प्रेइंग संभव हो पाती है. इस आर्टिकल में हम आपको कृषि ड्रोन की स्प्रेइंग प्रोसेस, कृषि ड्रोन की कीमत, फीचर्स और भारत में लागू ड्रोन नियम की पूरी डिटेल्स बताएंगे.
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ट्रैक्टर सर्विसिंग में लापरवाही पड़ सकती है भारी, किसान जरूर जानें ये जरूरी बातें
कई किसान ट्रैक्टर तब तक चलाते रहते हैं, जब तक कोई बड़ी खराबी सामने न आ जाए. लेकिन ऐसा करना आगे चलकर ज्यादा खर्च और परेशानी का कारण बन सकता है. नियमित सर्विसिंग से छोटी-छोटी दिक्कतें पहले ही पकड़ में आ जाती हैं. इससे ट्रैक्टर की कार्यक्षमता बनी रहती है और अचानक खराब होने का खतरा कम हो जाता है.








