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ट्रैक्टर PTO क्या है? जानिए इसके प्रकार, काम करने का तरीका और खेती में महत्व
PTO सिस्टम ट्रैक्टर को बहुउपयोगी बनाता है. इससे अलग-अलग मशीनों के लिए अलग इंजन की जरूरत नहीं पड़ती. ट्रैक्टर का इंजन ही सभी उपकरणों को शक्ति देता है, जिससे खर्च कम होता है. यह सिस्टम काम को तेज और प्रभावी बनाता है. किसान कम समय में ज्यादा क्षेत्र में खेती कर सकता है.
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AI बनेगा किसानों की ताकत, हर साल मिल सकता है 70,000 करोड़ रुपये का फायदा: जितेंद्र सिंह
सरकार ने बजट 2026–27 में ‘भारत-विस्तार’ (Bharat-VISTAAR) नाम का एक बहुभाषी एआई प्लेटफॉर्म प्रस्तावित किया है. यह प्लेटफॉर्म एग्रीस्टैक पोर्टल और आईसीएआर की कृषि जानकारी को एआई से जोड़कर किसानों को उनकी जरूरत के अनुसार सलाह देगा.
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बैटरी खराब तो ट्रैक्टर बंद! खेत का काम न रुके, इसके लिए जानें जरूरी बातें
अच्छी स्थिति में बैटरी होने से ट्रैक्टर हर बार बिना रुकावट के स्टार्ट होता है. इससे समय की बचत होती है और काम में देरी नहीं होती. नियमित देखभाल से बैटरी की उम्र बढ़ती है. आमतौर पर ट्रैक्टर की बैटरी 3 से 5 साल तक चल सकती है, लेकिन सही रखरखाव न होने पर यह जल्दी खराब हो सकती है.
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डीजल से आजादी की ओर कदम, इलेक्ट्रिक ट्रैक्टर बन रहे किसानों की नई ताकत
डीजल ट्रैक्टर लंबे समय से खेती की रीढ़ माने जाते रहे हैं. लेकिन डीजल की कीमतों में लगातार उतार-चढ़ाव और इंजन की नियमित देखभाल का खर्च किसानों पर बोझ डालता है. इसके अलावा डीजल इंजन से निकलने वाला धुआं पर्यावरण को नुकसान पहुंचाता है.
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ट्रैक्टर का कूलिंग सिस्टम: कैसे रखता है इंजन को ठंडा और लंबे समय तक ताकतवर?
कूलिंग सिस्टम इंजन की अतिरिक्त गर्मी को बाहर निकालकर तापमान को संतुलित रखता है. इससे ट्रैक्टर की ताकत बनी रहती है और वह लंबे समय तक बिना दिक्कत काम करता है. सही तापमान पर चलने वाला इंजन ईंधन भी कम खर्च करता है और उसकी उम्र भी बढ़ती है.
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खेती में तकनीक का इस्तेमाल बढ़ाने पर जोर, फूड सिक्योरिटी के लिए 330 करोड़ खर्च करेगी CIMMYT
फूड सिक्योरिटी सेक्टर की रिसर्च संस्था CIMMYT सूखा और गर्मी झेलने वाली मक्का और गेहूं की किस्मों को विकसित करने में मोटी रकम इस्तेमाल करेगी. डिजिटल और डेटा पर आधारित खेती के टूल्स के साथ ही ग्लोबल सर्विलांस सिस्टम को विकसित किया जाएगा. ताकि फसलों को कीड़ों और बीमारियों से बचाया जा सके.








