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भारत में चीनी उत्पादन में बढ़त जारी, लेकिन उत्तर प्रदेश में मार्च में 13 प्रतिशत गिरावट ने बढ़ाई चिंता
जहां यूपी में गिरावट देखने को मिली, वहीं महाराष्ट्र और कर्नाटक ने बेहतर प्रदर्शन किया है. महाराष्ट्र में इस सीजन के दौरान 98.95 लाख टन चीनी उत्पादन हुआ, जो पिछले साल के मुकाबले 24 प्रतिशत ज्यादा है. वहीं कर्नाटक में 46.75 लाख टन उत्पादन हुआ, जो 17 प्रतिशत की बढ़त दर्शाता है.
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IFFCO ने बनाया रिकॉर्ड, कमाया 4106 करोड़ रुपये का मुनाफा.. 90.62 लाख टन उर्वरक उत्पादन
इफको के अध्यक्ष दिलीप संघाणी ने कहा कि वित्त वर्ष 2026-27 में इफको सहकारिता, नवाचार और किसानों की उन्नति के साझा संकल्प के साथ आगे बढ़ेगा. उन्होंने कहा कि इफको की हर उपलब्धि सिर्फ व्यावसायिक सफलता नहीं, बल्कि किसानों की बेहतर सेवा का कदम है.
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IFFCO के MD केजे पटेल बोले- नैनो उर्वरक को मिली बड़ी सफलता, 301 लाख बोतलें बिकीं
IFFCO के प्रबंध निदेशक केजे पटेल ने बताया कि इफको ने 'धाराअमृत' नाम का नया जैव-उत्तेजक उत्पाद भी लॉन्च किया है, जो अमीनो एसिड, एल्जिनिक और ह्यूमिक तत्वों, जरूरी खनिजों और केले के रस से बना है. किसानों से इसे अच्छी प्रतिक्रिया मिल रही है, जो टिकाऊ खेती में इसकी उपयोगिता दिखाती है.
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सरकार की सख्ती और बाजार की सुस्ती के बीच फंसा चीनी उद्योग, किसानों की जेब पर पड़ सकता है भारी असर
सरकार ने चीनी मिलों के लिए कई सख्त नियम लागू कर दिए हैं. अब हर मिल को अपने मासिक आवंटन का कम से कम 90 प्रतिशत डिस्पैच करना अनिवार्य है. अगर ऐसा नहीं होता है, तो अगले महीने के कोटे में कटौती की जाएगी. मार्च 2026 में एक बार राहत दी गई थी, लेकिन अब साफ कर दिया गया है कि अप्रैल से फिर सख्ती लागू होगी.
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गांवों में पशुपालन से बढ़ी ताकत, डेयरी नेटवर्क मजबूत, देशी नस्लों के संरक्षण पर सरकार का फोकस
पशुपालन और डेयरी सेक्टर गांवों की अर्थव्यवस्था को नई ताकत दे रहे हैं. राष्ट्रीय गोकुल मिशन जैसी योजनाओं से किसानों की आय बढ़ रही है और युवाओं को रोजगार मिल रहा है. देशी नस्लों के संरक्षण के साथ डेयरी नेटवर्क मजबूत हो रहा है, जिससे गांव आत्मनिर्भर बनने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं.
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यूपी की 23 चीनी मिलों को 24 करोड़ जारी, एक मिल में 10 लाख टन से ज्यादा पेराई से किसानों को मिला फायदा
Cooperative Sector: उत्तर प्रदेश की 23 सहकारी चीनी मिलें लगातार सुचारु रूप से चल रही हैं, जिससे गन्ना किसानों को बड़ी राहत मिली है. सरकार मरम्मत, मशीनों के अपग्रेड और क्षमता बढ़ाने पर जोर दे रही है. इससे पेराई तेज होगी, भुगतान बेहतर रहेगा और ग्रामीण रोजगार के साथ किसानों की आय को भी मजबूत सहारा मिलेगा.








