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ग्रीष्मकालीन धान के रकबे में 2.47 लाख हेक्टेयर की कमी, जानें कितने में हुई मूंग और उड़द की बुवाई
इस साल अन्य दालों की बुवाई 0.28 लाख हेक्टेयर में हुई है, जबकि पिछले साल इसका रकबा 0.17 लाख हेक्टेयर था. यानी अन्य दालों की बुवाई में 0.11 लाख हेक्टेयर की वृद्धि हुई है. इसी तरह बात अगर मोटे अनाज की करें तो इस साल इसकी बुवाई 11.64 लाख हेक्टेयर में हुई है, जो पिछले साल 10.77 लाख हेक्टेयर थी.
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सूरजमुखी की खेती ने बदली किसान की किस्मत, बंजर जमीन से लाखों की कमाई कर बना आसपास के लिए मिसाल
एक किसान ने बंजर जमीन पर सूरजमुखी की खेती कर शानदार सफलता हासिल की. कम लागत, बेहतर बाजार भाव और तेल की बढ़ती मांग से लाखों की कमाई हुई, जिससे अब यह मॉडल दूसरे किसानों के लिए प्रेरणा बन रहा है.
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मिडिल ईस्ट जंग का असर! ड्रैगन फ्रूट और एक्सोटिक खेती पर मंडराया संकट, किसानों को भारी नुकसान का डर
Middle East War Impact: मिडिल ईस्ट में चल रही जंग के कारण एक्सोटिक फलों की खेती करने वाले भारतीय किसानों को बड़ा नुकसान हो रहा है. किसानों का कहना है कि, पौधों के इंपोर्ट में देरी और फर्टिलाइजर की कमी से प्लांटेशन टल रहा है, जिससे लाखों का निवेश फंस गया है और पूरे एक साल की कमाई पर खतरा बन गया है.
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पीएम किसान को लेकर बड़ा अपडेट, 23वीं किस्त से पहले पूरा कर लें ये जरूरी काम.. वरना नहीं मिलेगा लाभ
यूनिक फार्मर आईडी बनवाने की प्रक्रिया को आसान रखा गया है, ताकि गांव के किसान भी इसे आसानी से बना सकें. किसान अपने राज्य के एग्रीस्टैक पोर्टल या नजदीकी कृषि विभाग के दफ्तर जाकर ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं. इसके लिए आधार कार्ड, आधार से जुड़ा मोबाइल नंबर और जमीन के जरूरी कागज होना जरूरी है.
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अजय भालोटिया का बड़ा दावा- 4 लाख टन बासमती फंसा, किसानों की कमाई पर मंडराया खतरा
अखिल भारतीय चावल निर्यातक संघ के महासचिव अजय भालोटिया ने बताया कि मिडिल ईस्ट तनाव से भारत का चावल एक्सपोर्ट धीमा पड़ा है और लाखों टन बासमती फंसा हुआ है. अभी आम लोगों को सस्ता चावल मिल सकता है, लेकिन अगर संकट लंबा चला तो किसानों को दाम, खाद, पेस्टिसाइड और निर्यात बाजार में बड़ा नुकसान झेलना पड़ सकता है.
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केंद्र सरकार ने आलू की 4 नई किस्मों को दी मंजूरी, अब 90 दिनों में तैयार होगी फसल.. इन राज्यों को फायदा
आईसीएआर-सीपीआरआई के निदेशक डॉ. बृजेश सिंह ने इन किस्मों को किसानों और आलू उद्योग के लिए एक बड़ी उपलब्धि बताया. उन्होंने कहा कि इन नई किस्मों में अलग-अलग क्षेत्रों के लिए खास फायदे दिए गए हैं. ‘कुफरी रतन’ 90 दिन में तैयार होने वाली किस्म हैं. इसके छिलके लाल होते हैं.








