OECD-FAO रिपोर्ट: 2034 तक भारत होगा आम और केले का बादशाह, घरेलू खपत भी होगी दोगुनी

आम, अमरूद और मैंगोस्टीन जैसे फलों का दुनिया भर में एक्सपोर्ट भी बढ़ेगा. वर्ष 2024 में इन फलों का निर्यात करीब 25 लाख टन पहुंच गया था, जिसमें आम का हिस्सा 85 फीसदी से ज्यादा रहा.

Kisan India
नई दिल्ली | Published: 29 Jul, 2025 | 02:11 PM

आम की मिठास और केले की सादगी, ये दोनों फल भारत की थाली और तहजीब का हिस्सा रहे हैं. अब एक रिपोर्ट ने साबित कर दिया है कि भारत का ये फल-प्रेम सिर्फ स्वाद तक सीमित नहीं, बल्कि उत्पादन में भी दुनिया को पछाड़ने वाला है. ओईसीडी-एफएओ की ताजा कृषि रिपोर्ट 2025-2034 बताती है कि आने वाले दस वर्षों में भारत आम और केले के उत्पादन में न सिर्फ नंबर वन बनेगा, बल्कि वैश्विक बाजार में भी अपनी मजबूत पकड़ बनाएगा.

आम का स्वाद और उत्पादन दोनों होंगे दोगुने

रिपोर्ट के अनुसार भारत में 2034 तक आम का उत्पादन 36 मिलियन टन तक पहुंच सकता है, जो कि दुनिया के कुल आम उत्पादन का करीब 42 फीसदी होगा. इस बढ़ते उत्पादन का ज्यादातर हिस्सा देश के ही स्थानीय और अनौपचारिक बाजारों में खपाया जाएगा.

लोगों की आम खाने की आदतों में भी इजाफा होगा. आज की तुलना में हर भारतीय सालाना औसतन 23.1 किलो आम खाएगा. इसका सीधा मतलब है कि आम न सिर्फ गर्मियों की पहचान बना रहेगा, बल्कि थाली का एक जरूरी हिस्सा भी होगा.

केला भी दिखाएगा दम

केला भी पीछे नहीं रहने वाला. रिपोर्ट बताती है कि भारत का केला उत्पादन 2034 तक 45 मिलियन टन तक पहुंच सकता है. हर व्यक्ति सालाना औसतन 28.1 किलो केला खा सकता है. अभी यह आंकड़ा 24.9 किलो के आस-पास है.

भारत की भूमिका वैश्विक मंच पर भी होगी मजबूत

एशिया आने वाले समय में भी आम उत्पादन में लीडर रहेगा, और भारत इसका सबसे बड़ा भागीदार होगा. आम, अमरूद और मैंगोस्टीन जैसे फलों का दुनिया भर में एक्सपोर्ट भी बढ़ेगा. वर्ष 2024 में इन फलों का निर्यात करीब 25 लाख टन पहुंच गया था, जिसमें आम का हिस्सा 85 फीसदी से ज्यादा रहा.

फल-फूल रहा है फल व्यापार

हालांकि इस तस्वीर में कुछ बादल भी हैं. मौसम में बदलाव, कीट और बीमारियों की वजह से 2024 में केले के व्यापार पर असर पड़ा है. यूरोपीय संघ और अमेरिका जैसे बाजारों में केले के दाम गिरे हैं, जिससे निर्यातकों को नुकसान हुआ है.

आर्थिक अस्थिरता, ब्याज दरों में उतार-चढ़ाव, और मुद्रा विनिमय दर की अनिश्चितता भी आने वाले समय में फल व्यापार पर असर डाल सकती हैं. खासतौर पर कम आय वर्ग के लोगों के लिए यह एक चुनौती हो सकती है.

इस बढ़ते उत्पादन और मांग को देखते हुए, भारत को कृषि तकनीक, भंडारण, और परिवहन प्रणाली को और मजबूत करना होगा. इससे किसानों को भी सीधा फायदा मिलेगा और फल सड़ने की समस्या भी कम होगी.

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