IMD Monsoon Forecast 2026: मॉनसून से पहले मौसम ने एक बार फिर सबकी चिंता बढ़ा दी है. भारतीय मौसम विभाग (IMD) और अर्थ सिस्टम साइंस ऑर्गनाइजेशन (ESSO) की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक भूमध्यरेखीय प्रशांत महासागर (Equatorial Pacific Ocean) में अल नीनो की स्थिति बनी हुई है और इसके और मजबूत होने की संभावना जताई गई है. समुद्र और हवा दोनों में इसके स्पष्ट संकेत दिखाई दे रहे हैं, जो आने वाले दक्षिण-पश्चिम मॉनसून की रफ्तार और बारिश के पैटर्न को प्रभावित कर सकते हैं.
समुद्र का बढ़ता तापमान
रिपोर्ट में बताया गया है कि, प्रशांत महासागर के मध्य और पूर्वी हिस्सों में समुद्र की सतह का तापमान सामान्य से काफी अधिक है. इसके साथ ही समुद्र के नीचे भी गर्म पानी की परतें बनी हुई हैं. सिर्फ प्रशांत ही नहीं, बल्कि भारतीय महासागर जैसे अरब सागर और बंगाल की खाड़ी में भी तापमान सामान्य से ऊपर बना हुआ है. यही लगातार गर्मी मौसम पैटर्न को बदल रही है और वैश्विक स्तर पर असर डाल रही है.
अल नीनो क्या होता है?
अल नीनो एक प्राकृतिक जलवायु प्रणाली है, जिसमें प्रशांत महासागर के बीच और पूर्वी हिस्से का पानी असामान्य रूप से गर्म हो जाता है. जब ऐसा होता है तो ट्रेड विंड यानी सामान्य हवाएं कमजोर पड़ जाती हैं और गर्म पानी पूर्व दिशा की ओर फैलने लगता है. इसका असर सिर्फ समुद्र तक सीमित नहीं रहता, बल्कि पूरी दुनिया के मौसम पर पड़ता है कहीं भारी बारिश, कहीं सूखा और कई जगह तापमान में बढ़ोतरी देखने को मिलती है.
ENSO सिस्टम में बड़ा बदलाव
ENSO (El Nino-Southern Oscillation) सिस्टम में पिछले एक साल में कई उतार-चढ़ाव देखने को मिले हैं. 2025 के मध्य में हालात सामान्य थे, इसके बाद अगस्त से फरवरी तक ला नीना (La Nina) सक्रिय रही और मार्च में फिर से स्थिति न्यूट्रल हो गई. लेकिन अब हालात तेजी से बदल रहे हैं और समुद्र का तापमान अल नीनो स्तर तक पहुंच चुका है.
हिंद महासागर की स्थिति सामान्य
हिंद महासागर द्विध्रुव (Indian Ocean Dipole) फिलहाल सामान्य स्थिति में है. यह 2025 के आखिर में थोड़े समय के लिए नकारात्मक स्थिति में चला गया था, लेकिन जनवरी 2026 में फिर से सामान्य हो गया. मौसम विभाग के अनुसार, पूरे मॉनसून सीजन के दौरान इसके इसी सामान्य स्थिति में बने रहने की संभावना है. हालांकि हिंद महासागर के बीच वाले हिस्से में समुद्र का पानी थोड़ा गर्म है, लेकिन यह इतना ज्यादा नहीं है कि इसका पूरा सिस्टम बदल सके. इसलिए फिलहाल इसका मॉनसून पर ज्यादा असर नहीं पड़ेगा, लेकिन अल नीनो जैसे दूसरे मौसम सिस्टम का असर ज्यादा देखने को मिल सकता है.
मॉनसून पर असर की संभावना
मौसम विभाग के मॉडल के अनुसार, जून से सितंबर के बीच अल नीनो और मजबूत हो सकता है. इसका असर मानसून की रफ्तार और बारिश पर पड़ सकता है. कुछ क्षेत्रों में अच्छी बारिश हो सकती है, जबकि कुछ जगहों पर कम बारिश या अनिश्चितता बनी रह सकती है.