Indian Monsoon Forecast: देश में मानसून के बीच किसानों के लिए एक महत्वपूर्ण खबर सामने आई है. जापान की मौसम एजेंसी JAMSTEC ने अल नीनो (El Nino) के शुरू होने की जानकारी दी है. आमतौर पर अल नीनो को कम बारिश और सूखे जैसी परिस्थितियों से जोड़कर देखा जाता है, इसलिए इसकी खबर ने किसानों और कृषि क्षेत्र की चिंताएं बढ़ा दी हैं.
हालांकि किसानों के लिए राहत की बात यह है कि जुलाई में हिंद महासागर के पानी के तापमान में एक खास बदलाव पॉजिटिव आईओडी (हिंद महासागार द्विध्रुव) बनने की संभावना है. इसमें हिंद महासागर के एक हिस्से का पानी ज्यादा गर्म और दूसरे हिस्से का ठंडा हो जाता है.
क्या है अल नीनो और क्यों बढ़ जाती है चिंता?
अल नीनो एक मौसम संबंधी घटना है, जो तब होती है जब प्रशांत महासागर का पानी सामान्य से ज्यादा गर्म हो जाता है. इसका असर दुनिया के कई देशों के मौसम पर पड़ता है. भारत में आमतौर पर अल नीनो के दौरान मानसून कमजोर पड़ने और बारिश कम होने की आशंका रहती है. यही वजह है कि जब भी अल नीनो सक्रिय होता है, किसानों की चिंता बढ़ जाती है. दरअसल, बारिश कम होने का असर सीधे खेती पर पड़ता है. इससे फसलों की बुवाई, बढ़वार और उत्पादन प्रभावित हो सकता है, खासकर उन इलाकों में जहां खेती काफी हद तक मानसून पर निर्भर करती है.
जापानी एजेंसी ने किया अल नीनो का ऐलान
बिजनेस लाइन की रिपोर्ट के अनुसार, जापान की मौसम एजेंसी JAMSTEC ने इस साल सबसे पहले अल नीनो के सक्रिय होने की जानकारी दी है. एजेंसी के जलवायु पूर्वानुमान मॉडल SINTEX-F के मुताबिक, जून से अगस्त के बीच अल नीनो और मजबूत हो सकता है. कुछ अनुमान यह भी बता रहे हैं कि यह 2026 के अंत तक और ज्यादा असरदार हो सकता है. अगर अल नीनो लंबे समय तक मजबूत बना रहता है, तो इसका असर कई देशों के मौसम और खेती पर पड़ सकता है, जिससे बारिश और कृषि उत्पादन दोनों प्रभावित हो सकते हैं.
जुलाई में सकारात्मक IOD से मिल सकती है राहत
हालांकि मौसम वैज्ञानिकों ने एक राहत भरी संभावना भी जताई है. JAMSTEC के अनुसार अभी हिंद महासागर की स्थिति सामान्य बनी हुई है, लेकिन जुलाई के दौरान पॉजिटिव IOD बनने की संभावना है. पॉजिटिव IOD को भारत के लिए आमतौर पर अच्छा माना जाता है. यह समुद्र से ज्यादा नमी लेकर भारत की तरफ लाने में मदद करता है, जिससे बारिश बढ़ने की संभावना रहती है. अगर यह स्थिति मजबूत रहती है, तो यह अल नीनो के असर को कुछ हद तक कम कर सकती है. यानी मानसून को सहारा मिल सकता है और बारिश की स्थिति बेहतर रहने की उम्मीद बनी रहती है.
मानसून को लेकर पहले ही घट चुका है अनुमान
इस बीच भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने दक्षिण-पश्चिम मानसून को लेकर अपने अनुमान में बदलाव किया है. विभाग ने हाल ही में मानसून की बारिश का अनुमान घटाकर दीर्घकालिक औसत (LPA) का 90 प्रतिशत कर दिया है.
इसके साथ ही इस साल मानसून केरल तट पर भी सामान्य समय से करीब तीन दिन की देरी से पहुंचा. मानसून ने 4 जून को केरल में दस्तक दी, जिसके बाद शुरुआती दौर में ही इसकी रफ्तार को लेकर चर्चा शुरू हो गई है.
किसानों के लिए क्या मायने रखता है यह संकेत?
फिलहाल यह कहना जल्दबाजी होगी कि अल नीनो की वजह से पूरे देश में कम बारिश होगी. मौसम विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले महीनों में अल नीनो और सकारात्मक IOD दोनों की स्थिति पर नजर रखना जरूरी होगा. अगर सकारात्मक IOD मजबूत रहता है, तो यह मानसून को सहारा दे सकता है. लेकिन अगर अल नीनो का असर ज्यादा बढ़ता है, तो कुछ इलाकों में बारिश कम हो सकती है. ऐसे में किसानों को मौसम विभाग की सलाह और मानसून की स्थिति पर लगातार ध्यान देने की जरूरत है.
अल नीनो के सक्रिय होने से मानसून को लेकर नई चर्चा जरूर शुरू हो गई है. एक तरफ कम बारिश की आशंका है, तो दूसरी तरफ सकारात्मक IOD से राहत की उम्मीद भी बनी हुई है. आने वाले कुछ हफ्ते यह तय करेंगे कि इस साल मानसून किसानों के लिए कितना बेहतर साबित होगा.