अल नीनो का संकट, मॉनसून कम, फसल को नुकसान… पिछले कुछ महीने से तमाम आशंकाओं के बीच एक ऐसी खबर आई है, जो थोड़ा राहत भरी है. यह खबर ऑस्ट्रेलिया का मौसम ब्यूरो लेकर आया है. इस खबर के सच होने का मतलब है कि अगस्त–सितंबर के दौरान मॉनसून की कमी को नियंत्रित किया जा सकता है.
ऑस्ट्रेलियाई मौसम ब्यूरो ने कहा है कि अगस्त–सितंबर के दौरान इंडियन ओशन डायपोल यानी आईओडी, जिसे हिंदी में हिंद महासागार द्विध्रुव कहा जा सकता है, सकारात्मक तरीके से विकसित हो सकती है. मौसम वैज्ञानिकों का मानना है कि अगर ऐसा होता है तो यह भारत के लिए अच्छा होगा. भारत के दक्षिण–पश्चिम मॉनसून को अतिरिक्त नमी उपलब्ध करा सकता है. इसका मतलब होगा कि अल नीनो के नकारात्मक असर को संतुलित करने में सहायता दे सकता है.
बढ़ रहा है अल नीनो का खतरा
BoM की ताजा दक्षिणी गोलार्ध निगरानी रिपोर्ट के अनुसार, 7 जून 2026 को समाप्त सप्ताह में नीनो 3.4 सूचकांक +0.81 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया. यह स्तर अल नीनो की निर्धारित सीमा +0.80 डिग्री सेल्सियस से थोड़ा ऊपर है. अल नीनो 3.4 सूचकांक मध्य और पूर्वी भूमध्यरेखीय प्रशांत महासागर में समुद्री सतह के तापमान (SST) में असामान्यता को मापता है. रिपोर्ट के अनुसार, पिछले कई महीनों से समुद्र के तापमान में लगातार वृद्धि देखी जा रही है और सभी प्रमुख वैश्विक मॉडल आने वाले महीनों में प्रशांत महासागर के और गर्म होने का अनुमान लगा रहे हैं.
हालांकि भारत के लिए अधिक महत्वपूर्ण संकेत हिंद महासागर से मिल रहे हैं. फिलहाल IOD तटस्थ स्थिति में है और 7 जून तक इसका सूचकांक -0.34 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया. लेकिन अधिकांश जलवायु मॉडल यह संकेत दे रहे हैं कि अगस्त–सितंबर के दौरान सकारात्मक IOD विकसित हो सकता है. मौसम विशेषज्ञों के अनुसार, सकारात्मक IOD भारत के मानसून के लिए आमतौर पर अनुकूल माना जाता है.
क्या है आईओडी
IOD हिंद महासागर में समुद्री सतह के तापमान में होने वाले अंतर से जुड़ी एक महत्वपूर्ण जलवायु प्रणाली है. आसान भाषा में समझें तो हिंद महासागर के पश्चिमी हिस्से (अफ्रीका के पास) और पूर्वी हिस्से (इंडोनेशिया और ऑस्ट्रेलिया के पास) के समुद्री पानी का तापमान हमेशा एक जैसा नहीं रहता. जब इन दोनों क्षेत्रों के तापमान में अंतर बढ़ जाता है, तब आईओडी की स्थिति बनती है. इसकी तीन अवस्थाएं होती हैं – सकारात्मक, नकारात्मक और तटस्थ. सकारात्मक IOD के दौरान पश्चिमी हिंद महासागर अपेक्षाकृत अधिक गर्म और पूर्वी हिंद महासागर अपेक्षाकृत ठंडा हो जाता है. इससे भारत और आसपास के क्षेत्रों की ओर अधिक नमी का प्रवाह बढ़ता है, जो मानसूनी वर्षा को मजबूती प्रदान कर सकता है.
किसानों के लिए क्यों महत्वपूर्ण है?
अब समझिए कि किसानों के लिए यह क्यों महत्व रखता है. मान लीजिए अल नीनो की वजह से मॉनसून कमजोर पड़ने का खतरा है. अगर उसी समय सकारात्मक आईओडी विकसित हो जाए, तो हिंद महासागर से भारत की ओर अतिरिक्त नमी आ सकती है और बारिश में कमी की भरपाई कुछ हद तक हो सकती है.
इसी वजह से मौसम वैज्ञानिक केवल अल नीनो ही नहीं, बल्कि आईओडी पर भी नजर रखते हैं. इस साल यही उम्मीद जताई जा रही है कि अगर अगस्त–सितंबर में सकारात्मक आईओडी बनता है, तो वह भारत के मॉनसून को सहारा दे सकता है. विशेषज्ञों का कहना है कि इतिहास में कई ऐसे उदाहरण मिले हैं जब सकारात्मक IOD ने अल नीनो के प्रभाव को कमजोर किया है.
चिंता के दौर में राहत का संकेत
यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने हाल ही में दक्षिण–पश्चिम मॉनसून के अपने पूर्वानुमान को घटाकर दीर्घकालिक औसत (LPA) के 90 प्रतिशत पर कर दिया है. मॉनसून इस साल 4 जून को पहुंचा, जो सामान्य से तीन दिन है. इसके अलावा अभी तक देश में सामान्य से लगभग 18 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई है, जिससे कृषि और जल संसाधनों को लेकर चिंताएं बढ़ी हैं.
BoM की रिपोर्ट के अनुसार, प्रशांत महासागर में व्यापारिक हवाएं (Trade Winds) सामान्य से कमजोर बनी हुई हैं और वायुमंडलीय संकेत भी धीरे–धीरे समुद्री तापमान में हो रहे बदलावों का समर्थन करने लगे हैं. दक्षिणी दोलन सूचकांक (SOI) भी नकारात्मक क्षेत्र में बना हुआ है, जो अल नीनो के विकास की दिशा में एक संकेत माना जाता है.
हालांकि मौसम एजेंसी ने यह भी स्पष्ट किया है कि अल नीनो की फाइनल मजबूती या तेजी या तीव्रता को लेकर अभी कुछ अनिश्चितता बनी हुई है. कई मॉडल मध्यम से लेकर मजबूत अल नीनो की आशंका जता रहे हैं. इसके बावजूद विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अगस्त–सितंबर में सकारात्मक IOD विकसित होता है तो भारत के मॉनसून को महत्वपूर्ण समर्थन मिल सकता है. ऐसे में आने वाले दो से तीन महीने यह तय करने में अहम भूमिका निभाएंगे कि 2026 का मानसून कितना सफल रहता है और कृषि क्षेत्र को इससे कितना लाभ मिल पाता है.