अल नीनो खतरे के बीच UP कृषि विभाग ने जारी की एडवाइजरी, धान किसान तुरंत जान लें ये 6 जरूरी बातें

Paddy Farming Tips: अगर इस साल अल नीनो का असर बढ़ता है, तो बारिश सामान्य से कम या अनियमित हो सकती है. इसका सीधा असर धान की खेती पर पड़ सकता है. ऐसे में किसानों को पहले से तैयारी करना बेहद जरूरी है. इसी कड़ी में यूपी कृषि विभाग ने किसानों के लिए कुछ आसान लेकिन जरूरी सलाह जारी की हैं. सही किस्म का चुनाव, कम पानी वाली तकनीक अपनाना और मौसम के अनुसार खेती की योजना बनाकर किसान नुकसान से बच सकते हैं और अच्छी पैदावार भी हासिल कर सकते हैं.

Isha Gupta
नोएडा | Published: 7 Jul, 2026 | 06:00 AM
1 / 6अल नीनो के कारण बारिश कम या अनियमित हो सकती है. ऐसे में किसानों को धान की सीधी बुआई (DSR) को प्राथमिकता देनी चाहिए. यह तकनीक कम पानी में भी अच्छी पैदावार देने में मदद करती है और रोपाई की तुलना में समय व लागत भी कम आती है.

अल नीनो के कारण बारिश कम या अनियमित हो सकती है. ऐसे में किसानों को धान की सीधी बुआई (DSR) को प्राथमिकता देनी चाहिए. यह तकनीक कम पानी में भी अच्छी पैदावार देने में मदद करती है और रोपाई की तुलना में समय व लागत भी कम आती है.

2 / 6बेहतर उत्पादन के लिए स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार उपयुक्त किस्म का चयन करें. सामान्य सिंचित क्षेत्रों में सी.आर. धान-100, 201, 202, 203, 204, 205, 206, 211, 212, 214, एनडीआर-2064, 2065 और सरजू-52 जैसी किस्मों की बुआई करने की सलाह दी गई है.

बेहतर उत्पादन के लिए स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार उपयुक्त किस्म का चयन करें. सामान्य सिंचित क्षेत्रों में सी.आर. धान-100, 201, 202, 203, 204, 205, 206, 211, 212, 214, एनडीआर-2064, 2065 और सरजू-52 जैसी किस्मों की बुआई करने की सलाह दी गई है.

3 / 6अच्छी फसल के लिए जरूरत से ज्यादा या कम बीज का उपयोग न करें. सीड ड्रिल से बुआई करने पर 40-50 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर और छिटकवा विधि से बुआई करने पर 60-70 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर बीज का इस्तेमाल करना बेहतर माना गया है.

अच्छी फसल के लिए जरूरत से ज्यादा या कम बीज का उपयोग न करें. सीड ड्रिल से बुआई करने पर 40-50 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर और छिटकवा विधि से बुआई करने पर 60-70 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर बीज का इस्तेमाल करना बेहतर माना गया है.

4 / 6अगर किसान नर्सरी तैयार कर धान की रोपाई करते हैं, तो महीन दाने वाली किस्मों के लिए 30 किलोग्राम, मोटे दाने वाली किस्मों के लिए 40 किलोग्राम और संकर धान के लिए 12-15 किलोग्राम बीज प्रति हेक्टेयर पर्याप्त है. सही मात्रा में बीज इस्तेमाल करने से पौधे स्वस्थ तैयार होते हैं.

अगर किसान नर्सरी तैयार कर धान की रोपाई करते हैं, तो महीन दाने वाली किस्मों के लिए 30 किलोग्राम, मोटे दाने वाली किस्मों के लिए 40 किलोग्राम और संकर धान के लिए 12-15 किलोग्राम बीज प्रति हेक्टेयर पर्याप्त है. सही मात्रा में बीज इस्तेमाल करने से पौधे स्वस्थ तैयार होते हैं.

5 / 6जिन क्षेत्रों में अचानक बाढ़ आने की संभावना रहती है, वहां IR-64 Sub-1, स्वर्णा Sub-1, जलनिधि, जलमग्न, जलप्रिया और मधुकर जैसी किस्मों की खेती करें. ये किस्में अधिक पानी की स्थिति में भी फसल को नुकसान से बचाने में मदद करती हैं.

जिन क्षेत्रों में अचानक बाढ़ आने की संभावना रहती है, वहां IR-64 Sub-1, स्वर्णा Sub-1, जलनिधि, जलमग्न, जलप्रिया और मधुकर जैसी किस्मों की खेती करें. ये किस्में अधिक पानी की स्थिति में भी फसल को नुकसान से बचाने में मदद करती हैं.

6 / 6जिन किसानों की जमीन ऊसर या खारी है, उन्हें सामान्य किस्मों की बजाय सीएसआर-30, सीएसआर-36, सीएसआर-76, सीएसआर-43, सीएसआर-104, नरेन्द्र ऊसर धान-2008 और नरेन्द्र ऊसर धान-2009 जैसी किस्मों का चयन करना चाहिए. ये किस्में ऐसी मिट्टी में भी बेहतर उत्पादन देने के लिए विकसित की गई हैं.

जिन किसानों की जमीन ऊसर या खारी है, उन्हें सामान्य किस्मों की बजाय सीएसआर-30, सीएसआर-36, सीएसआर-76, सीएसआर-43, सीएसआर-104, नरेन्द्र ऊसर धान-2008 और नरेन्द्र ऊसर धान-2009 जैसी किस्मों का चयन करना चाहिए. ये किस्में ऐसी मिट्टी में भी बेहतर उत्पादन देने के लिए विकसित की गई हैं.

Get Latest   Farming Tips ,  Crop Updates ,  Government Schemes ,  Agri News ,  Market Rates ,  Weather Alerts ,  Equipment Reviews and  Organic Farming News  only on KisanIndia.in

Published: 7 Jul, 2026 | 06:00 AM

लेटेस्ट न्यूज़