चाय बागान श्रमिकों पर सरकार खर्च करेगी 313 करोड़, मिलेगा शिक्षा-स्वास्थ्य का बड़ा सहारा

पश्चिम बंगाल के चाय बागान श्रमिकों के लिए बड़ी घोषणा की गई है, जिसमें उनके जीवन स्तर को सुधारने पर जोर दिया गया है. इस योजना का उद्देश्य शिक्षा, स्वास्थ्य और बुनियादी सुविधाओं को मजबूत करना बताया गया है. सरकार का दावा है कि इससे श्रमिक परिवारों को बेहतर अवसर और सुविधाएं मिलेंगी.

Saurabh Sharma
नोएडा | Published: 6 Jul, 2026 | 09:38 PM

West Bengal Scheme: पश्चिम बंगाल के उत्तर बंगाल स्थित चाय बागान क्षेत्रों में काम करने वाले श्रमिकों के लिए एक बड़ी राहत की घोषणा की गई है. विपक्ष के नेता सुवेंदु अधिकारी ने प्रधानमंत्री चाय श्रमिक प्रोत्साहन योजना (PMCSPY) के तहत 313.30 करोड़ रुपये के व्यापक पैकेज का ऐलान किया. इस योजना का उद्देश्य चाय बागान श्रमिकों और उनके परिवारों के जीवन स्तर को बेहतर बनाना, शिक्षा को मजबूत करना और स्वास्थ्य सुविधाओं को सुलभ करना बताया गया है. सरकार और प्रशासन के सहयोग से इस योजना को चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा, जिससे उत्तर बंगाल के हजारों श्रमिकों को सीधे लाभ मिलने की उम्मीद है.

चाय श्रमिकों के लिए 313 करोड़ का बड़ा पैकेज

इस योजना के तहत कुल 313.30 करोड़ रुपये का बजट तय किया गया है. इसमें सबसे बड़ा हिस्सा शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं पर खर्च किया जाएगा. सुवेंदु अधिकारी  के अनुसार, यह कदम लंबे समय से उपेक्षित चाय बागान श्रमिकों की स्थिति को सुधारने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास है. योजना का फोकस सिर्फ आर्थिक सहायता नहीं बल्कि सामाजिक विकास पर भी है, ताकि श्रमिक परिवारों को बेहतर अवसर मिल सकें.

शिक्षा और स्वास्थ्य पर खास जोर

चाय श्रमिक शिक्षा योजना (CSSY) के तहत 177 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं. इसका उपयोग श्रमिकों के बच्चों की शिक्षा को मजबूत करने, स्कूलों की स्थिति सुधारने और सीखने के बेहतर अवसर उपलब्ध कराने में किया जाएगा. इसके साथ ही स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए भी विशेष प्रावधान किए गए हैं, ताकि बागान क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को प्राथमिक चिकित्सा और जरूरी इलाज आसानी से मिल सके. यह कदम लंबे समय से चली आ रही स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी को दूर करने में मदद करेगा.

321 विश्राम गृहों का निर्माण और सुविधाएं

चाय श्रमिक आश्रय योजना (CSAY) के तहत 321 विश्राम गृहों के निर्माण के लिए 63 करोड़ रुपये मंजूर किए गए हैं. इनमें से 88 विश्राम गृह पहाड़ी क्षेत्रों में और 233 मैदानी इलाकों में बनाए जाएंगे. इन विश्राम गृहों में सौर ऊर्जा की सुविधा, स्वच्छ पेयजल, बैठने की व्यवस्था और सिरेमिक फर्श वाले शौचालय जैसी आधुनिक सुविधाएं होंगी. इसका उद्देश्य श्रमिकों को बेहतर कार्य वातावरण और आरामदायक सुविधाएं उपलब्ध कराना है.

प्रशासनिक व्यवस्था और विकास की दिशा

इस योजना के क्रियान्वयन की जिम्मेदारी उत्तर बंगाल विकास विभाग  (NBDD) को सौंपी गई है. यह विभाग स्वास्थ्य विभाग, पश्चिम बंगाल समग्र शिक्षा मिशन और जिला प्रशासन के साथ मिलकर योजना को लागू करेगा. सुवेंदु अधिकारी ने कहा कि सरकार का लक्ष्य चाय बागान श्रमिकों का समग्र विकास सुनिश्चित करना है. इससे पहले राज्य सरकार द्वारा कई कल्याणकारी योजनाएं शुरू की गई थीं, जिनका उद्देश्य महिलाओं और गरीब परिवारों को आर्थिक सहायता देना रहा है. यह नई योजना भी उसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है.

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Published: 6 Jul, 2026 | 09:38 PM

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