ओलावृष्टि से सेब उत्पादन को झटका, 37 फीसदी उपज घटने से 5 हजार करोड़ का कारोबार प्रभावित

Hailstorms Damaged Apple Yields : बेमौसमी बारिश और ओलावृष्टि से सेब उत्पादन को बड़ा झटका लगा है. अनुमान है कि सेब उत्पादन घटकर 4.36 लाख मीट्रिक टन पर आ सकता है. परेशान किसानों से सरकार से नुकसान की भरपाई के लिए मुआवजे की मांग की है.

रिजवान नूर खान
नई दिल्ली | Published: 6 Jul, 2026 | 07:01 PM

Himachal Apple Crisis: बीते दो सप्ताह से हिमाचल प्रदेश में भीषण बारिश, भूस्खलन और ओलावृष्टि दर्ज की गई है. इससे राज्य के सेब उत्पादन पर बुरा असर पड़ा है. फल पूरी तरह मेच्योर होने से पहले ही टूटकर गिर गए हैं. ऐसे फलों की बाजार में कीमत नहीं है. अनुमान है कि मॉनसूनी सीजन की वजह से सेब उत्पादन 37 फीसदी से ज्यादा घटने का अनुमान है. ऐसे में सेब और स्ट्रोन फ्रूट की खेती करने वाले 4.5 लाख से ज्यादा किसानों को भारी नुकसान होगा, जिन किसानों ने लोन लेकर बागान में कृषि कार्य कराए हैं उनके कर्ज में डूबने की आशंका जताई जा रही है.

सेब के साथ स्टोन फ्रूट की फसल को नुकसान

हिमाचल प्रदेश के बागवान इस साल बेमौसमी बारिश, ओलावृष्टि और बदलते मौसम के कारण भारी संकट का सामना कर रहे हैं. सेब के साथ-साथ स्टोन फ्रूट की पैदावार में भी उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई है. सेब उगाने वाले बागवानों का कहना है कि इस बार मौसम की मार ने उनकी मेहनत पर पानी फेर दिया. बेमौसमी बारिश और ओलावृष्टि के कारण सेब और स्टोन फ्रूट की फसल को भारी नुकसान पहुंचा है. दूसरी ओर दवाइयों, उर्वरकों और कृषि उपकरणों की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी से लागत कई गुना बढ़ गई है, जबकि उत्पादन काफी कम रहा है. ऐसे में आय घटने से बागवानों के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है.

किसानों ने राज्य सरकार से मुआवजा राशि मांगी

उत्पादन घटने और खेती की लागत बढ़ने से बागवान आर्थिक दबाव में हैं और उनका कहना है कि परिवार का खर्च चलाना भी मुश्किल हो गया है. वहीं, पीड़ित सेब किसानों ने मुआवजा मांगा है और राज्य सरकार से सर्वे कराने की मांग की है. पीड़ित बागवानों ने सरकार से मांग की है कि हर बागवान तक सिंचाई की बेहतर सुविधाएं पहुंचाई जाएं और फसल बीमा योजना की जानकारी एवं लाभ प्रभावी ढंग से उपलब्ध कराया जाए, ताकि प्राकृतिक आपदाओं के समय उन्हें आर्थिक सुरक्षा मिल सके.

सेब उत्पादन 37 फीसदी घटने का अनुमान

हिमाचल प्रदेश बागवानी विभाग के निदेशक सतीश कुमार ने मीडिया को बताया कि प्रदेश को देश का प्रमुख फल उत्पादक राज्य माना जाता है. प्रदेश में करीब 2.37 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में बागवानी की जाती है, जिसमें लगभग 1.16 लाख हेक्टेयर क्षेत्र सेब के अधीन है. उन्होंने बताया कि वर्ष 2024-25 में सेब का उत्पादन 6.99 लाख मीट्रिक टन रहा था, जबकि इस वर्ष उत्पादन घटकर करीब 4.36 लाख मीट्रिक टन रहने का अनुमान है. जो बीते साल की तुलना में 37 फीसदी से अधिक गिरावट है.

Hailstorms Damaged Apple Yields

शिमला के सेब किसान (ऊपर). बागवानी विभाग के निदेशक सतीश कुमार (नीचे).

5 हजार करोड़ की सेब उत्पादन कारोबार को झटका

उन्होंने कहा कि सेब उद्योग से प्रदेश के करीब साढ़े चार लाख बागवान जुड़े हैं और इसकी अर्थव्यवस्था लगभग 5,000 करोड़ रुपये की है. इस बार स्टोन फ्रूट का उत्पादन भी पिछले वर्ष की तुलना में कम रहने की संभावना है. हालांकि, बाजार में अच्छे दाम मिल रहे हैं, लेकिन उत्पादन कम होने से बागवानों को अपेक्षित लाभ नहीं मिल पा रहा. ऐसे में आशंका जताई जा रही है कि 5 हजार करोड़ के कारोबार को गहरा झटका लग सकता है.

जलवायु परिवर्तन से खेती पर बुरा असर

बागवानी विभाग के निदेशक सतीश कुमार ने कहा कि ग्लोबल वार्मिंग और जलवायु परिवर्तन के कारण तापमान में लगातार वृद्धि हो रही है, जिसका असर फलों की पैदावार पर पड़ रहा है. उन्होंने बागवानों से विभाग द्वारा अनुशंसित हाई-डेंसिटी और उच्च गुणवत्ता वाली किस्मों के पौधे लगाने तथा फसल बीमा योजना से जुड़ने की अपील की. बदलते मौसम और प्राकृतिक आपदाओं ने हिमाचल के बागवानी क्षेत्र के सामने नई चुनौतियां खड़ी कर दी हैं. उत्पादन में गिरावट और बढ़ती लागत से बागवानों की आर्थिक स्थिति प्रभावित हुई है.ऐसे में विशेषज्ञों का मानना है कि आधुनिक तकनीक, बेहतर सिंचाई व्यवस्था और फसल बीमा जैसी योजनाओं का व्यापक विस्तार ही भविष्य में बागवानों को राहत दे सकता है.

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