Seafood Export India: भारत दुनिया के बड़े समुद्री उत्पाद निर्यातक देशों में शामिल है और अब सरकार इस क्षेत्र को और आगे बढ़ाने की तैयारी कर रही है. केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कहा है कि, अगले पांच साल में देश के सीफूड निर्यात को 8.5 अरब डॉलर से बढ़ाकर 30 अरब डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है. उनका कहना है कि अगर उत्पादन बढ़ाया जाए, क्वालिटी में सुधार किया जाए और प्रोसेस्ड प्रोडक्ट पर ज्यादा ध्यान दिया जाए, तो यह लक्ष्य हासिल किया जा सकता है.
विशाखापट्टनम में आयोजित नेशनल वर्कशॉप ऑन सीफूड एक्सपोर्ट्स के दौरान पीयूष गोयल ने कहा कि भारत के समुद्री उत्पादों की दुनिया भर में अच्छी मांग है. ऐसे में अब केवल कच्चा माल बेचने के बजाय प्रोसेस्ड और ब्रांडेड उत्पादों पर फोकस करना होगा, ताकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में बेहतर कीमत मिल सके.
क्वालिटी और वैल्यू एडिशन पर रहेगा जोर
पीयूष गोयल ने कहा कि, भारतीय समुद्री उत्पाद सिर्फ ज्यादा मात्रा में बिकने के लिए नहीं, बल्कि अपनी अच्छी क्वालिटी के लिए भी पहचाने जाने चाहिए. उन्होंने उद्योग से जुड़े लोगों से कहा कि सिर्फ कच्चे झींगे और दूसरे समुद्री उत्पाद बेचने पर निर्भर रहने की बजाय, उनसे तैयार किए गए उत्पादों पर ज्यादा ध्यान देना चाहिए. उनका कहना है कि अगर भारत प्रोसेस्ड और ब्रांडेड सीफूड उत्पादों का निर्यात बढ़ाता है, तो विदेशों में इनकी बेहतर कीमत मिलेगी. इससे निर्यात बढ़ेगा और देश की कमाई में भी अच्छा इजाफा हो सकता है.
मुक्त व्यापार समझौते से मिलेगा फायदा
केंद्रीय मंत्री ने बताया कि, पिछले साढ़े तीन सालों में भारत ने विकसित देशों के साथ नौ मुक्त व्यापार समझौते (FTA) किए हैं. इन समझौतों से भारतीय उत्पादों को कई देशों के बाजारों में बेहतर पहुंच मिलेगी. इससे भारतीय सीफूड उद्योग को नए ग्राहक और नए बाजार मिलेंगे, जिससे निर्यात बढ़ाने में मदद मिलेगी.
Outpacing global seafood export growth, India’s seafood exports continue to scale new heights. 📈 pic.twitter.com/leX9CKc9wK
— Piyush Goyal (@PiyushGoyal) June 5, 2026
मछुआरों और निर्यातकों को होगा लाभ
केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन सिंह ने कहा कि सरकार मछली और समुद्री उत्पादों से ज्यादा कमाई कैसे हो, इस पर काम कर रही है. इसका फायदा सीधे छोटे मछुआरों और इस कारोबार से जुड़े लोगों को मिलेगा. उन्होंने बताया कि सरकार ऐसे इंतजाम भी कर रही है, जिससे देश के अंदरूनी राज्यों के किसान और मछुआरे भी अपने उत्पाद विदेशों तक आसानी से पहुंचा सकें. इसके लिए नई सुविधाएं और जरूरी ढांचा तैयार किया जा रहा है. उनका कहना है कि इससे ज्यादा लोगों को अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंच मिलेगी और उनकी कमाई बढ़ाने में मदद होगी.
आंध्र प्रदेश की अहम भूमिका
आंध्र प्रदेश देश का सबसे बड़ा मत्स्य उत्पादन करने वाला राज्य माना जाता है. साल 2025-26 में यहां करीब 55.39 लाख टन एक्वाकल्चर उत्पादन दर्ज किया गया. देश के कुल झींगा निर्यात में राज्य की हिस्सेदारी लगभग 66 प्रतिशत है. सरकार ने संकेत दिए हैं कि राष्ट्रीय मत्स्य बोर्ड जल्द ही आंध्र प्रदेश में अपना क्षेत्रीय कार्यालय स्थापित कर सकता है, जिससे इस क्षेत्र के विकास को और गति मिलेगी.
रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा समुद्री उत्पाद निर्यात
भारत का समुद्री उत्पाद निर्यात 2025-26 में रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया. इस दौरान देश ने लगभग 73,890 करोड़ रुपये (करीब 8.45 अरब डॉलर) के समुद्री उत्पादों का निर्यात किया. निर्यात की कुल मात्रा 19.72 लाख मीट्रिक टन रही. अमेरिका और चीन भारतीय सीफूड के सबसे बड़े खरीदार बने हुए हैं. वहीं फ्रोजन श्रिम्प (झींगा) देश का सबसे प्रमुख निर्यात उत्पाद बना हुआ है.
निर्यात बढ़ाने के लिए नई योजनाएं
केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री राममोहन नायडू ने कहा कि सरकार देश में कार्गो सुविधाओं को मजबूत करने पर भी काम कर रही है. आने वाले सालों में कार्गो एयरपोर्ट्स की संख्या बढ़ाने की योजना है, जिससे कृषि और समुद्री उत्पादों के निर्यात को तेज किया जा सके. उन्होंने ‘वन एयरपोर्ट, वन प्रोडक्ट’ जैसी पहल का भी सुझाव दिया, ताकि अलग-अलग क्षेत्रों के विशेष उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय बाजार तक आसानी से पहुंचाया जा सके.