Seafood Export India: भारत के समुद्री खाद्य निर्यात क्षेत्र के लिए 1 जून 2026 का दिन काफी खास रहा. इस दिन भारत ने पहली बार ओमान को CEPA (भारत-ओमान व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौता) के तहत ताजा यानी चिल्ड मछली की पहली खेप भेजी. इसे भारत और ओमान के बीच व्यापारिक रिश्तों में एक नई शुरुआत माना जा रहा है. इस समझौते से भारतीय समुद्री उत्पादों को ओमान के बाजार में बेहतर मौके मिलने की उम्मीद है. इससे मछली पालन और समुद्री खाद्य कारोबार से जुड़े लाखों लोगों को फायदा हो सकता है और निर्यात को भी बढ़ावा मिलेगा.
ओमान के लिए रवाना हुई पहली चिल्ड मछली की खेप
भारत से ओमान भेजी गई पहली चिल्ड फिश की खेप को एक्वा वर्ल्ड एक्सपोर्ट्स प्राइवेट लिमिटेड ने निर्यात किया है. इसे चेन्नई एयर कार्गो कॉम्प्लेक्स से अधिकारियों की मौजूदगी में रवाना किया गया. इस मौके को भारतीय समुद्री खाद्य निर्यात क्षेत्र के लिए बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है. यह सिर्फ मछली की एक खेप नहीं, बल्कि भारत और ओमान के बीच व्यापारिक रिश्तों को और मजबूत बनाने की दिशा में एक अहम कदम है.
क्या है भारत-ओमान CEPA समझौता?
भारत और ओमान के बीच CEPA (व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौता) 1 जून 2026 से लागू हो गया है. इसका मकसद दोनों देशों के बीच व्यापार को आसान और तेज बनाना है. इस समझौते के तहत झींगा, मछली और कटलफिश जैसे कई समुद्री उत्पादों पर लगने वाला 5 फीसदी आयात शुल्क हटा दिया गया है. इसका मतलब है कि अब भारतीय निर्यातकों को ओमान में अपने उत्पाद बेचने के लिए यह अतिरिक्त शुल्क नहीं देना होगा. इस फैसले से भारतीय मछली और दूसरे समुद्री सामान को ओमान में ज्यादा खरीदार मिल सकते हैं, जिससे कारोबार बढ़ने की उम्मीद है.
समुद्री उत्पादों के निर्यात को मिलेगा बड़ा फायदा
समुद्री खाद्य पदार्थ जल्दी खराब होने वाले उत्पादों में शामिल हैं. ऐसे में समय पर कस्टम क्लियरेंस और मंजूरी मिलना बेहद जरूरी होता है. CEPA के तहत एक विशेष सैनिटरी और फाइटोसैनिटरी (SPS) फ्रेमवर्क भी बनाया गया है, जिससे चिल्ड और फ्रोजन समुद्री उत्पादों को तेजी से मंजूरी मिल सकेगी. इससे उत्पादों की क्वालिटी बनी रहेगी और निर्यातकों को बेहतर कीमत मिलने की संभावना बढ़ेगी.
भारतीय निर्यातकों के लिए क्यों अहम है ओमान?
ओमान ऐसी जगह पर स्थित है, जहां से कई देशों तक आसानी से कारोबार किया जा सकता है. इसलिए इसे समुद्री व्यापार का अहम केंद्र माना जाता है. ओमान के जरिए खाड़ी देशों और पूर्वी अफ्रीका के बाजारों तक पहुंचना भी आसान हो जाता है.
इसका फायदा यह होगा कि भारतीय समुद्री उत्पाद सिर्फ ओमान ही नहीं, बल्कि दूसरे देशों तक भी आसानी से पहुंच सकेंगे. इससे भारतीय कारोबारियों को नए बाजार मिलेंगे और उनका कारोबार बढ़ने के मौके भी बढ़ेंगे.
तमिलनाडु को मिल सकता है सबसे ज्यादा लाभ
इस समझौते का सबसे ज्यादा फायदा तमिलनाडु को मिल सकता है. राज्य के पास लंबी समुद्री तटरेखा, आधुनिक फिशिंग हार्बर, प्रोसेसिंग यूनिट्स और मजबूत लॉजिस्टिक नेटवर्क मौजूद है.
बिजनेस लाइन की रिपोर्ट के अनुसार, साल 2024-25 में तमिलनाडु ने ओमान को लगभग 2,279 टन समुद्री उत्पाद निर्यात किए थे, जिनकी कीमत करीब 25 करोड़ रुपये रही. वहीं 2025-26 के शुरुआती आंकड़े बताते हैं कि कम मात्रा में निर्यात होने के बावजूद अधिक मूल्य प्राप्त हुआ है, जो प्रीमियम समुद्री उत्पादों की बढ़ती मांग का संकेत है.
बढ़ेंगे निवेश और रोजगार के अवसर
शुल्क में छूट और बेहतर व्यापारिक सुविधाओं के कारण समुद्री खाद्य क्षेत्र में नए निवेश बढ़ सकते हैं. इससे कोल्ड स्टोरेज, प्रोसेसिंग यूनिट्स, पैकेजिंग और लॉजिस्टिक्स जैसे क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे. साथ ही, तटीय क्षेत्रों में रहने वाले मछुआरों और छोटे कारोबारियों की आय बढ़ने की संभावना भी मजबूत होगी.
भारतीय समुद्री उद्योग के लिए नई शुरुआत
भारत से ओमान भेजी गई पहली चिल्ड मछली की खेप को समुद्री खाद्य उद्योग के लिए एक बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है. इससे भारतीय कारोबारियों के लिए नए मौके खुलने की उम्मीद है. CEPA समझौते के बाद भारतीय समुद्री उत्पादों को बड़ा बाजार मिल सकता है, जिससे निर्यात बढ़ने की संभावना है. आने वाले समय में यह समझौता भारत और ओमान के बीच कारोबार को और मजबूत बना सकता है. साथ ही, भारतीय मछली और दूसरे समुद्री उत्पादों को दुनिया के अन्य बाजारों तक पहुंचाने में भी मदद मिल सकती है.