कमजोर मॉनसून का असर, पंजाब में घटा धान का रकबा.. बासमती किसानों की बढ़ी चिंता

पंजाब में कमजोर मॉनसून, बासमती निर्यात की चिंता और खाद की कमी का असर धान की खेती पर दिखने लगा है. इस साल धान का कुल रकबा घटा है, जबकि बासमती की खेती में बड़ी गिरावट आई है. किसानों को निर्यात प्रभावित होने और उचित कीमत नहीं मिलने की चिंता सता रही है..

Kisan India
नोएडा | Published: 22 Jul, 2026 | 06:00 AM

Punjab Paddy Farming: पंजाब में कमजोर मॉनसून, खाद की सीमित उपलब्धता और पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष का असर धान की खेती पर पड़ने लगा है. इन वजहों से इस साल राज्य में धान का रकबा पिछले साल की तुलना में कम हुआ है. अब तक पंजाब में बासमती और गैर-बासमती धान की कुल 30.58 लाख हेक्टेयर में खेती हुई है, जबकि पिछले साल इसी समय तक यह रकबा 32.43 लाख हेक्टेयर था. हालांकि, गैर-बासमती धान की खेती लगभग पिछले साल के बराबर 25.88 लाख हेक्टेयर में हुई है. गैर-बासमती धान की सरकारी एजेंसियां न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर खरीद करती हैं, इसलिए इसका रकबा स्थिर बना हुआ है.

पंजाब में इस साल बासमती धान की खेती में बड़ी गिरावट दर्ज की गई है. अब तक बासमती की खेती  4.70 लाख हेक्टेयर में हुई है, जबकि पिछले साल इसी समय यह रकबा 6.70 लाख हेक्टेयर था. पंजाब के कृषि मंत्री गुरमीत सिंह खुड्डियां ने बताया कि बासमती का सबसे बड़ा निर्यात पश्चिम एशिया, खासकर यूएई और ईरान, के अलावा यूरोप और अमेरिका में होता है. पश्चिम एशिया में जारी तनाव की वजह से किसानों को डर है कि अगर निर्यात प्रभावित हुआ तो उन्हें बासमती का अच्छा दाम नहीं मिलेगा. इसी वजह से कई किसान बासमती की खेती से दूरी बना रहे हैं.

पंजाब को 15.50 लाख क्विंटल खाद की जरूरत

कृषि मंत्री ने कहा कि अधिकारी किसानों को बासमती की खेती जारी रखने के लिए समझा रहे हैं. वहीं, इस साल उर्वरकों की कमी भी किसानों के लिए बड़ी चुनौती बनी हुई है. खरीफ सीजन के लिए पंजाब को 15.50 लाख क्विंटल खाद की जरूरत है, लेकिन अब तक केवल 13.90 लाख क्विंटल खाद ही आवंटित की गई है. सरकार का कहना है कि पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के कारण उर्वरकों की आपूर्ति प्रभावित हुई है.

हरियाणा में 20.50 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में खरीफ फसलों की बुवाई

वहीं, अगर हरियाणा की बात करें तो यहां पर कम बारिश होने से खरीफ फसल की बुवाई प्रभावित  हुई है. ऐसे जुलाई महीने में अब तक सामान्य से 25 फीसदी कम बारिश हुई है, जिससे खरीफ फसलों को लेकर चिंता बढ़ गई है. कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि अगर मॉनसून कमजोर रहा तो राज्य में धान की खेती का रकबा और उत्पादन दोनों प्रभावित हो सकते हैं. कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के अनुसार, 19 जुलाई तक राज्य में 20.50 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में खरीफ फसलों की बुवाई हुई है. पिछले साल इसी अवधि में यह आंकड़ा करीब 23 लाख हेक्टेयर था. इस साल सरकार ने खरीफ बुवाई का लक्ष्य लगभग 31 लाख हेक्टेयर रखा है.

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Published: 22 Jul, 2026 | 06:00 AM

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