आंध्र प्रदेश में धान का रकबा 1.26 लाख हेक्टेयर घटा, बारिश की कमी से किसानों ने बदली खेती

आंध्र प्रदेश में बारिश की कमी और पानी की समस्या के चलते धान की खेती का रकबा 1.26 लाख हेक्टेयर घट गया है. वहीं, दलहन का रकबा 52,000 हेक्टेयर बढ़ा है. सरकार ने किसानों को ज्यादा पानी वाली फसलों से बचने की सलाह दी है. राज्य में 51 फीसदी बारिश की कमी दर्ज हुई है, जिससे फसल पैटर्न बदलने लगा है.

Kisan India
नोएडा | Published: 5 Sep, 2026 | 08:31 PM

आंध्र प्रदेश में इस खरीफ सीजन धान की खेती का रकबा 1.26 लाख हेक्टेयर घट गया है. बारिश की कमी, जलाशयों में घटते पानी और सरकार की पानी ज्यादा लेने वाली फसलों से बचने की सलाह का असर खेती पर पड़ा है. केंद्रीय कृषि मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, 21 अगस्त तक राज्य में धान की खेती पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले 1.26 लाख हेक्टेयर कम हुई है. वहीं, दलहन की खेती का रकबा 52,000 हेक्टेयर बढ़ा है. इससे संकेत मिलते हैं कि किसान कम पानी में होने वाली फसलों की ओर रुख कर रहे हैं.

द टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, आंध्र प्रदेश में बारिश की भारी कमी के बीच धान की खेती को लेकर चिंता बढ़ गई है. कृषि मंत्री के. अच्चन्नायडू के मुताबिक, 1 जून से 25 अगस्त के बीच राज्य में 192.8 मिमी बारिश हुई, जबकि सामान्य तौर पर 393.7 मिमी बारिश होती है. यानी बारिश में 51 फीसदी की कमी रही. सिंचाई विभाग ने मौजूदा जल संकट को देखते हुए किसानों को खासकर कृष्णा डेल्टा में धान की खेती से बचने की सलाह दी थी. विभाग ने चेतावनी दी कि फसल के दौरान पर्याप्त पानी नहीं मिलने पर किसानों को नुकसान हो सकता है. इसके बजाय किसानों को कम पानी में होने वाली फसलों की खेती करने की सलाह दी गई है.

पानी की कमी वाले इलाकों में धान से दूरी

मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने विधानसभा में कहा कि पानी की कमी वाले इलाकों, खासकर कृष्णा क्षेत्र के किसानों को ज्यादा पानी वाली धान की खेती से बचना चाहिए. उन्होंने बागवानी, मोटे अनाज और कम पानी में होने वाली सूखी बुवाई जैसी फसलों को अपनाने की सलाह दी. सरकार ने अल नीनो के असर को देखते हुए 122 ज्यादा जोखिम वाले मंडलों की पहचान की है. इसके असर को कम करने के लिए कई कदम उठाए जा रहे हैं. कृषि मंत्री के मुताबिक, राज्य में दलहन की खेती बढ़कर 2.66 लाख हेक्टेयर हो गई है. दलहन का उत्पादन भी 23.6 फीसदी बढ़ा है.

दक्षिण भारत में धान की खेती घटी, कर्नाटक में सबसे ज्यादा गिरावट

धान की खेती का रकबा घटने का असर दक्षिण भारत के कई राज्यों में देखने को मिला है. पांच राज्यों में कर्नाटक में सबसे ज्यादा 3.09 लाख हेक्टेयर की कमी आई है. इसके बाद तेलंगाना में 2.45 लाख, ओडिशा में 1.63 लाख, आंध्र प्रदेश में 1.26 लाख और तमिलनाडु में 1.18 लाख हेक्टेयर रकबा घटा है. हालांकि, इन आंकड़ों से यह साबित नहीं होता कि धान की खेती घटने की अकेली वजह अल नीनो है. बारिश, पानी की उपलब्धता, फसल से होने वाली कमाई और किसानों के अपने फैसले भी इसके पीछे हो सकते हैं. फिर भी, आंकड़े बताते हैं कि पानी ज्यादा लेने वाली फसलों से बचने की सरकार की सलाह का असर दिखाई दे रहा है. आंध्र प्रदेश में धान का रकबा घटा है, जबकि दलहन की खेती बढ़ी है.

Get Latest   Farming Tips ,  Crop Updates ,  Government Schemes ,  Agri News ,  Market Rates ,  Weather Alerts ,  Equipment Reviews and  Organic Farming News  only on KisanIndia.in

Published: 5 Sep, 2026 | 08:31 PM