Punjab Wheat Farmers: पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री सुखबीर सिंह बादल ने कहा कि श्री मुक्तसर साहिब जिला के कबरवाला और पक्की टिब्बी गांवों में आग लगने से करीब 700 एकड़ में खड़ी गेहूं की फसल जलकर खत्म हो गई. हालांकि, किसानों ने आग बुझाने की कोशिश की, लेकिन तेज हवा के कारण आग फैल गई. इससे छोटे और किराये पर खेती करने वाले किसानों को सबसे ज्यादा नुकसान हुआ है. ऐसे में सुखबीर सिंह बादल ने प्रभावित गांवों का दौरा किया और सरकार से मुआवजे की मांग की. साथ ही उन्होंने कहा कि शिरोमणि अकाली दल ने भरोसा दिया है कि वह प्रभावित किसानों और मजदूरों की हर संभव मदद करेगा.
दरअसल, पंजाब में पिछले एक हफ्ते से गेहूं के खेतों में आग लगने की घटनाएं हो रही हैं, जिससे खड़ी फसल को काफी नुकसान हुआ है. 17 अप्रैल को श्री मुक्तसर साहिब जिला के कबरवाला गांव में आग लगी, जो तेजी से आसपास के गांवों में फैल गई और फाजिल्का जिला तक पहुंच गई. किसानों का कहना है कि करीब 700 एकड़ जमीन प्रभावित हुई, जबकि सरकारी आंकड़ों के अनुसार 177 एकड़ गेहूं की फसल और 90 एकड़ भूसे को नुकसान हुआ, यानी कुल 267 एकड़ क्षेत्र प्रभावित हुआ. वहीं, पंजाब राज्य विद्युत निगम लिमिटेड (पीएसपीसीएल) ने कहा है कि घटना के समय इलाके के बिजली फीडर बंद थे और आग लगने के कारण की जांच अभी जारी है.
Visited Kabarwala and Pakki Tibbi villages in Sri Muktsar Sahib district, where the standing wheat crop has been completely destroyed across 700 acres of land.
▪️ Interacted with the affected farmers, who informed me that they had tried their best to prevent the spread of the… pic.twitter.com/yrrbHwaa1dऔर पढ़ें
- आग लगने से 200 बीघा गेहूं जलकर राख, किसानों को 15 लाख रुपये तक का नुकसान
- UP में किसानों से होगी 20 लाख टन आलू की खरीद, सरकार से मिली मंजूरी.. इतने रुपये क्विंटल होगा रेट
- शिवराज सिंह चौहान ने चना खरीद को दी मंजूरी, तूर किसानों को भी मिली बड़ी राहत
- IMD के पूर्वानुमान पर केंद्र गंभीर: अभी से ही शुरू की तैयारी.. किसानों को नहीं होगी परेशानी, मिलेगा बीज और पानी
- यूपी में कई किसान नहीं करा पा रहे फार्मर रजिस्ट्री.. इस वजहों से हो रही परेशानी, धर्मेंद्र मलिक ने उठाए सवाल
— Sukhbir Singh Badal (@officeofssbadal) April 17, 2026
25 एकड़ गेहूं की खड़ी फसल जल गई
फिरोजपुर जिला के गुरु हरसहाय क्षेत्र के झंडूवाला गांव में 17 अप्रैल को आग लगने से करीब 25 एकड़ गेहूं की खड़ी फसल जल गई. शुरुआती जानकारी के मुताबिक, आग का कारण कंबाइन हार्वेस्टर से निकली चिंगारी बताया जा रहा है. इससे पहले 16 अप्रैल को अमृतसर जिला के रत्तोके हवेलियां गांव में भी आग लगी, जिसमें लगभग 16 एकड़ फसल को नुकसान हुआ. इस घटना में एक ट्रैक्टर पूरी तरह जल गया, जबकि कंबाइन हार्वेस्टर आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त हुआ. यहां भी मशीन से निकली चिंगारी को कारण माना गया.
13 अप्रैल को भी आग लगने की घटना घटी
13 अप्रैल को फरीदकोट जिला के कोठे गज्जनवाला गांव में आग लगने से तीन परिवारों की करीब 40 एकड़ गेहूं की फसल जल गई. इसी दिन लुधियाना जिला के जगराओं क्षेत्र के सहूरा गांव में भी आग की घटना हुई, जिसमें लगभग 8 एकड़ फसल का नुकसान हुआ. पिछले कुछ दिनों में सामने आई ये आग की घटनाएं दिखाती हैं कि गेहूं और धान की कटाई के समय हर साल इस तरह की समस्या दोहराई जाती है. पीएसपीसीएल के अधिकारियों का कहना है कि इस दौरान सावधानी के तौर पर गांवों के हिसाब से बिजली फीडर बंद रखे जाते हैं, ताकि बिजली से आग लगने की घटनाएं न हों. साथ ही, किसानों के लिए एक कंट्रोल रूम भी बनाया गया है, जहां वे तुरंत आग या स्पार्किंग की सूचना दे सकते हैं.
क्या है फसल बीमा योजना
वहीं, पंजाब के अलग-अलग जिलों में नुकसान झेल रहे किसान मुआवजे की मांग कर रहे हैं. अधिकारियों का कहना है कि ऐसे मामलों में राहत आमतौर पर तय नियमों के अनुसार आपदा प्रबंधन फंड से दी जाती है. लेकिन बार-बार हो रही इन घटनाओं ने राज्य में एक व्यवस्थित फसल बीमा योजना की कमी को लेकर बहस फिर से तेज कर दी है. प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना को केंद्र सरकार ने 2016 में शुरू किया था, जिसमें किसानों को प्राकृतिक आपदा, कीट और बीमारियों से होने वाले फसल नुकसान पर बीमा मिलता है. इस योजना में किसान कम प्रीमियम देते हैं. खरीफ फसलों पर 2 फीसदी, रबी पर 1.5 फीसदी और बागवानी व नकदी फसलों पर 5 फीसदी, जबकि बाकी खर्च केंद्र और राज्य सरकार मिलकर उठाते हैं. इसके बावजूद पंजाब ने शुरुआत से अब तक इस योजना को लागू नहीं किया है.