Gehun Ki Kheti: गेहूं की खेती किसानों के लिए मुनाफे का बेहतरीन विकल्प बन सकती है. कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि यदि किसान वैज्ञानिक तरीके से खेती करें, तो गेहूं से दोगुनी कमाई भी संभव है. इसके लिए जरूरी है सही किस्म का चयन, संतुलित खाद प्रबंधन और समय-समय पर रोग नियंत्रण. एक्सपर्ट के अनुसार सही तकनीक अपनाने और फसल की सही देखभाल करने से न केवल पैदावार बढ़ती है, बल्कि गेहूं की क्वालिटी भी बेहतर होती है.
ठंड के मौसम में होती है बुवाई
कृषि विशेषज्ञ की माने तो गेहूं की बुवाई मुख्य रूप से ठंड के मौसम में की जाती है. ठंडा मौसम फसल के अंकुरण और बढ़वार के लिए अनुकूल होता है. समय पर बुवाई करने से उत्पादन में बढ़ोतरी होती है और फसल स्वस्थ रहती है.
उन्नत किस्मों का चयन
विशेषज्ञों के अनुसार सरबती, लोकवन, बीडब्ल्यू-303, एचडी-3086 और एचडी-3046 जैसी उन्नत किस्में अधिक उत्पादन देती हैं. क्षेत्र में दो प्रकार की खेती होती है: बौनी और ऊंची किस्म, लेकिन अधिकांश किसान बौनी किस्म को प्राथमिकता देते हैं क्योंकि इससे अधिक पैदावार और लाभ मिलता है.
गेहूं में प्रमुख रोग और नियंत्रण
गेहूं की फसल की शुरुआत में अगर खेत में पानी ज्यादा भर जाए, तो उसमें एलोमोजेक या गिरवी रोग लग सकता है. इस बीमारी में पौधे ठीक से बढ़ नहीं पाते और पत्तियों का रंग पीला पड़ने लगता है, जिससे फसल कमजोर हो जाती है. जब गेहूं में बालियां निकलने लगती हैं, उस समय कंडुआ रोग का खतरा ज्यादा रहता है. इस बीमारी में बालियां काली हो जाती हैं और दाने खराब हो जाते हैं, जिससे पैदावार पर असर पड़ता है.
इन बीमारियों से बचने के लिए खेत में पानी जमा न होने दें और समय पर सिंचाई करें. साथ ही, कंडुआ रोग से बचाव के लिए मेनकोजेब या कार्बेंडाजिम दवा का छिड़काव करने से फसल सुरक्षित रहती है और नुकसान से बचा जा सकता है.
जैविक खाद और रोग प्रतिरोधक क्षमता
देसी और जैविक उपायों पर जोर देते हुए संजय यादव बताते हैं कि गोबर खाद, कम्पोस्ट और वर्मी कम्पोस्ट जैसी जैविक खाद से फसल की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है. इससे कीट और रोगों का असर कम होता है और फसल स्वस्थ रहती है.
पाले और खरपतवार से बचाव
तापमान शून्य डिग्री के आसपास पहुंचने पर पाले का असर फसल पर दिखाई देता है. अच्छी सिंचाई व्यवस्था से पाले के नुकसान को काफी हद तक कम किया जा सकता है. वहीं, चौड़ी पत्ती वाले खरपतवार की समस्या के लिए ‘टू-फोडी’ हर्बीसाइड का इस्तेमाल किया जा सकता है.
अधिक मुनाफा पाने के तरीके
कृषि विशेषज्ञों की सलाह है कि अधिक मुनाफा पाने के लिए उच्च उत्पादन देने वाली उन्नत किस्मों का चयन करें. साथ ही जैविक खादों के साथ संतुलित मात्रा में एनपीके उर्वरकों का इस्तेमाल करें. इससे लागत कम होगी और लाभ अधिक मिलेगा.