Bird Flu Alert: सुबह की पहली किरण के साथ जब मुर्गे की बांग सुनाई देती है, तो गांव की रसोई और खेत-खलिहान दोनों जाग उठते हैं. लेकिन इन दिनों यह बांग एक चेतावनी भी साथ ला रही है. बर्ड फ्लू के खतरे को देखते हुए डेयरी, मत्स्य एवं पशु संसाधन विभाग, बिहार ने मुर्गीपालकों के लिए जरूरी दिशा-निर्देश जारी किए हैं. विभाग का साफ कहना है-थोड़ी सी लापरवाही बड़ा नुकसान कर सकती है, जबकि समय पर की गई सावधानी मुर्गियों और कारोबार दोनों को सुरक्षित रख सकती है. बर्ड फ्लू एक संक्रामक बीमारी है जो तेजी से फैलती है. इसलिए जरूरी है कि हर मुर्गीपालक अपने फार्म पर साफ-सफाई और निगरानी को सबसे ऊपर रखे. सरकार का मकसद डर फैलाना नहीं, बल्कि जागरूकता बढ़ाना है ताकि बीमारी को शुरुआत में ही रोका जा सके.
बाहरी पक्षियों से दूरी ही सबसे बड़ी सुरक्षा
डेयरी, मत्स्य एवं पशु संसाधन विभाग के अनुसार, सबसे अहम सलाह है कि कुक्कुट फार्म के पक्षियों को बाहरी पक्षियों के संपर्क में न आने दिया जाए. खुले में दाना डालना या फार्म के पास जंगली पक्षियों का आना खतरे की घंटी हो सकता है. अगर एक भी संक्रमित पक्षी संपर्क में आ गया तो पूरी खेप प्रभावित हो सकती है. इसलिए मुर्गीपालकों को सलाह दी गई है कि वे अपने बाड़ों को जाली या जाल से ढकें. फार्म के आसपास पानी जमा न होने दें, क्योंकि ऐसे स्थानों पर जंगली पक्षी अधिक आते हैं. फार्म में आने-जाने वाले लोगों की आवाजाही भी सीमित रखें. बाहर से आने वाले व्यक्ति के जूते-चप्पल और कपड़े संक्रमण का कारण बन सकते हैं.

सतर्कता और सफाई से मुर्गीपालन सुरक्षित रखें.
रोज की सफाई, बीमारी पर भारी
विभाग ने खास जोर दिया है कि कुक्कुट फार्म की रोजाना सफाई बेहद जरूरी है. बाड़े की जमीन, दीवारें और कोनों में जमा गंदगी को रोज साफ करें. मुर्गियों के दाने और पानी के बर्तनों को प्रतिदिन धोना न भूलें. गंदे बर्तन बीमारी को न्योता देते हैं. अगर किसी मुर्गी में सुस्ती, पंख झुक जाना, दाना न खाना या अचानक मौत जैसे लक्षण दिखें तो तुरंत नजदीकी पशु चिकित्सक या विभाग को सूचना दें. बीमारी छिपाने से नुकसान और बढ़ सकता है. समय पर जांच और सलाह से बाकी पक्षियों को बचाया जा सकता है. विभाग का कहना है कि साफ-सफाई कोई अतिरिक्त काम नहीं, बल्कि रोज की जिम्मेदारी है. जिस तरह घर की सफाई से परिवार स्वस्थ रहता है, उसी तरह फार्म की सफाई से पक्षी सुरक्षित रहते हैं.
जागरूकता ही असली बचाव
पशुपालन निदेशालय, बिहार और मत्स्य विभाग, बिहार के सहयोग से जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है. अधिकारियों की टीम गांव-गांव जाकर लोगों को समझा रही है कि घबराने की जरूरत नहीं, बस सतर्क रहने की जरूरत है. विभाग के अनुसार, अगर सभी मुर्गीपालक मिलकर नियमों का पालन करें तो बर्ड फ्लू के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है. सरकार ने हेल्पलाइन और स्थानीय अधिकारियों के माध्यम से सूचना देने की व्यवस्था भी की है, ताकि किसी भी संदिग्ध मामले की तुरंत जांच हो सके.
अंत में विभाग की अपील साफ है-सावधानी में ही सुरक्षा है. मुर्गीपालन लाखों परिवारों की आजीविका का आधार है. थोड़ी सी जागरूकता और नियमित सफाई से न केवल पक्षियों की जान बचाई जा सकती है, बल्कि मेहनत से खड़ा किया गया व्यवसाय भी सुरक्षित रखा जा सकता है. गांव की सुबह की बांग यूं ही गूंजती रहे, इसके लिए जरूरी है कि हर मुर्गीपालक जिम्मेदारी निभाए और सरकार के निर्देशों का पालन करे.