बारिश में पशुओं को नहलाने से पहले जान लें ये जरूरी बातें, छोटी लापरवाही बना सकती है बीमारी की वजह

बारिश का मौसम पशुओं के लिए कई स्वास्थ्य चुनौतियां लेकर आता है. इस दौरान की गई छोटी लापरवाही भी संक्रमण और त्वचा संबंधी समस्याओं का कारण बन सकती है. विशेषज्ञों ने मानसून में पशुओं की देखभाल, साफ-सफाई और खानपान को लेकर महत्वपूर्ण सलाह दी है, जिससे उन्हें स्वस्थ और सुरक्षित रखा जा सकता है.

Saurabh Sharma
नोएडा | Published: 1 Jun, 2026 | 07:40 PM

Monsoon Livestock Care: मानसून का मौसम जहां लोगों को गर्मी से राहत देता है, वहीं पशुपालकों के लिए यह समय अतिरिक्त सावधानी बरतने का भी होता है. बारिश के दौरान पशुओं की देखभाल में की गई छोटी-सी गलती भी उनकी सेहत पर भारी पड़ सकती है. खासतौर पर पशुओं को बार-बार नहलाने को लेकर कई पशुपालकों के मन में सवाल रहता है कि यह सही है या नुकसानदायक. इस संबंध में पशु चिकित्सक कुंवर घनश्याम (KVK Noida) ने महत्वपूर्ण जानकारी साझा की है.

बरसात में बार-बार नहलाना क्यों हो सकता है नुकसानदायक?

विशेषज्ञ के अनुसार बारिश के मौसम में वातावरण  में नमी का स्तर काफी अधिक रहता है. ऐसे में गाय, भैंस, बकरी और अन्य पशुओं के शरीर पर मौजूद बाल नहलाने के बाद जल्दी नहीं सूख पाते. लंबे समय तक शरीर में नमी बने रहने से फंगल संक्रमण, खुजली, त्वचा रोग और परजीवी संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है. खासकर छोटे बछड़ों और मेमनों में यह समस्या अधिक गंभीर हो सकती है क्योंकि उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता अपेक्षाकृत कम होती है.

कब और कैसे नहलाएं पशु?

यदि पशु कीचड़, गोबर या किसी अन्य गंदगी से पूरी तरह सना हुआ हो तो उसे हल्के गुनगुने पानी से साफ किया जा सकता है. हालांकि सामान्य स्थिति में केवल साफ-सफाई पर ध्यान देना  ही पर्याप्त होता है. यदि किसी कारणवश पशु को नहलाना जरूरी हो, तो उसके शरीर को सूखे कपड़े से अच्छी तरह पोंछना चाहिए और पूरी तरह सूखने तक उसे खुले एवं हवादार स्थान पर रखना चाहिए. इससे शरीर में नमी जमा नहीं होती और संक्रमण का खतरा कम हो जाता है.

पशुशाला को सूखा रखना भी है जरूरी

बरसात के दिनों में केवल पशु  ही नहीं, बल्कि उनके रहने की जगह की सफाई भी बेहद जरूरी होती है. विशेषज्ञ बताते हैं कि लंबे समय तक गीली और कीचड़युक्त जमीन पर रहने से पशुओं के खुर गलने लगते हैं. इससे लंगड़ापन, पैरों में घाव और त्वचा संबंधी बीमारियां पैदा हो सकती हैं. इसलिए पशुशाला में पानी जमा न होने दें और नियमित रूप से सफाई करते रहें. सूखा बिछावन और उचित जल निकासी की व्यवस्था पशुओं को स्वस्थ रखने में मदद करती है.

चारा और पानी की गुणवत्ता पर रखें विशेष ध्यान

मानसून के दौरान पशुओं के चारे और पानी की गुणवत्ता  पर भी विशेष ध्यान देना चाहिए. सड़ा-गला या अत्यधिक गीला हरा चारा पाचन संबंधी समस्याओं का कारण बन सकता है. पशुओं को हमेशा ताजा और स्वच्छ पानी उपलब्ध कराना चाहिए. यदि किसी पशु में बुखार, सुस्ती, भूख कम लगना या शरीर के तापमान में अचानक बदलाव जैसे लक्षण दिखाई दें तो तुरंत पशु चिकित्सक से संपर्क करना चाहिए. समय पर उपचार पशुओं को गंभीर बीमारियों से बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है.

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Published: 1 Jun, 2026 | 07:40 PM