बाहर कमाने गए मजदूरों के परिवारों के लिए बड़ी राहत, हादसे पर राज्य सरकार देगी 4 लाख रुपये

बिहार सरकार की प्रवासी मजदूर दुर्घटना अनुदान योजना जरूरतमंद परिवारों के लिए बड़ी राहत बन रही है. इस योजना के तहत दुर्घटना में मौत, अपंगता या गंभीर चोट की स्थिति में आर्थिक सहायता दी जाती है. सरकार पार्थिव शरीर को घर पहुंचाने का खर्च भी उठाएगी, जिससे मजदूर परिवारों को मुश्किल समय में सहारा मिलेगा.

Saurabh Sharma
नोएडा | Updated On: 12 May, 2026 | 01:53 PM

Bihar Labour Scheme: बिहार सरकार राज्य के प्रवासी मजदूरों को आर्थिक सुरक्षा देने के लिए लगातार काम कर रही है. श्रम संसाधन एवं प्रवासी श्रमिक कल्याण विभाग की ओर से चलाई जा रही बिहार राज्य प्रवासी मजदूर दुर्घटना अनुदान योजना ऐसे मजदूरों और उनके परिवारों के लिए बड़ी मदद बन रही है, जो रोजगार के लिए दूसरे राज्यों या विदेशों में काम करने जाते हैं. इस योजना के तहत दुर्घटना में मौत, स्थायी अपंगता या आंशिक अपंगता होने पर आर्थिक सहायता दी जाती है. सरकार का कहना है कि हर कामगार का सम्मान, सुरक्षा और सहारा देना उसकी प्राथमिकता है.

दुर्घटना में मौत पर मिलेगा 4 लाख रुपये का अनुदान

इस योजना के तहत अगर किसी प्रवासी मजदूर की दुर्घटना में मौत  हो जाती है, तो उसके आश्रित परिवार को 4 लाख रुपये की सहायता राशि दी जाती है. वहीं स्थायी पूर्ण अपंगता होने पर 1 लाख रुपये और स्थायी आंशिक अपंगता होने पर 50 हजार रुपये का अनुदान दिया जाता है. सरकार ने यह भी व्यवस्था की है कि यदि किसी प्रवासी मजदूर की दूसरे राज्य या विदेश में मौत हो जाती है, तो उसके पार्थिव शरीर को पैतृक गांव तक लाने का खर्च भी राज्य सरकार उठाएगी. इससे गरीब परिवारों को बड़ी राहत मिलती है. योजना के तहत मिलने वाली पूरी सहायता राशि सीधे लाभार्थी के बैंक खाते में भेजी जाती है, ताकि पारदर्शिता बनी रहे और जरूरतमंद परिवारों को समय पर मदद मिल सके.

किन मजदूरों को मिलेगा योजना का लाभ

इस योजना का लाभ बिहार के उन प्रवासी मजदूरों को दिया जाता है जिनकी उम्र 18 से 65 वर्ष के बीच है और जो रोजगार या जीविकोपार्जन के लिए दूसरे राज्यों या विदेशों में काम कर रहे हैं. योजना में कई तरह की दुर्घटनाओं को शामिल किया गया है. इनमें सड़क दुर्घटना, रेल हादसा, बिजली का करंट लगना, सर्पदंश, आग से झुलसना, पेड़ या भवन गिरना, जंगली जानवर का हमला और आतंकवादी या आपराधिक हमला जैसी घटनाएं शामिल हैं. हालांकि सरकार ने साफ किया है कि आत्महत्या, नशे की हालत में लगी चोट या मौत और आपराधिक गतिविधियों के दौरान हुई क्षति को इस योजना में शामिल नहीं किया जाएगा.

आवेदन के लिए जरूरी दस्तावेज

योजना का लाभ लेने के लिए कुछ जरूरी दस्तावेज जमा करने होते हैं. इनमें आधार कार्ड, मतदाता पहचान पत्र, बैंक पासबुक, राशन कार्ड, मनरेगा जॉब कार्ड और आवासीय प्रमाण पत्र शामिल हैं. इसके अलावा भारत सरकार या राज्य सरकार द्वारा जारी अन्य पहचान दस्तावेज भी मान्य होंगे. सरकार ने आवेदन प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए ऑनलाइन (https://serviceonline.bihar.gov.in/) और ऑफलाइन दोनों सुविधाएं दी हैं. आवेदक या उनके परिवार के सदस्य RTPS काउंटर पर जाकर आवेदन कर सकते हैं. इसके अलावा बिहार सरकार के ऑनलाइन पोर्टल के जरिए भी आवेदन की सुविधा उपलब्ध है. ग्रामीण इलाकों के लोगों को आवेदन में परेशानी न हो, इसके लिए प्रखंड स्तर पर भी सहायता की व्यवस्था की गई है.

44 दिनों में होगा आवेदन का निपटारा

श्रम संसाधन एवं प्रवासी श्रमिक कल्याण विभाग  के अनुसार आवेदन मिलने के बाद उसकी जांच की जाती है. प्रखंड विकास पदाधिकारी की अनुशंसा के बाद श्रम अधीक्षक के माध्यम से जिलाधिकारी आवेदन को मंजूरी देते हैं. सरकार का दावा है कि आवेदन का निपटारा 44 दिनों के भीतर कर दिया जाता है. सभी जिलों में श्रम अधीक्षक इस योजना के प्रभारी अधिकारी बनाए गए हैं. बिहार सरकार का कहना है कि लाखों मजदूर रोजगार के लिए राज्य से बाहर जाते हैं और कई बार दुर्घटनाओं का शिकार हो जाते हैं. ऐसे समय में यह योजना उनके परिवारों के लिए बड़ा सहारा बन सकती है. सरकार लगातार कोशिश कर रही है कि ज्यादा से ज्यादा जरूरतमंद मजदूर इस योजना का लाभ उठा सकें और उन्हें आर्थिक सुरक्षा मिल सके.

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Published: 12 May, 2026 | 01:50 PM

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