Ganne Ki Kheti: उत्तर प्रदेश का लखीमपुर खीरी जिला ‘चीनी का कटोरा’ के नाम से जाना जाता है. इसकी मुख्य वजह यहां बड़े पैमाने पर होने वाली गन्ने की खेती है. जिले के लगभग 80 प्रतिशत किसान गन्ने पर निर्भर हैं और लाखों परिवारों की रोजी-रोटी इसी फसल से चलती है. कम लागत और बेहतर मुनाफे के कारण गन्ना किसानों की पहली पसंद बना हुआ है. अब बसंत कालीन गन्ने की बुवाई का समय शुरू हो गया है, ऐसे में कृषि विशेषज्ञों ने किसानों को कुछ जरूरी सलाह दी है.
सही समय पर बुवाई से मिलेगा बेहतर उत्पादन
विशेषज्ञों के अनुसार 10 फरवरी से 31 मार्च तक का समय बसंत कालीन गन्ने की बुवाई के लिए सबसे उपयुक्त माना जाता है. इस दौरान तापमान और नमी फसल के अनुकूल रहते हैं, जिससे अंकुरण अच्छा होता है. इस मौसम में रोगों का प्रकोप भी कम रहता है, जिससे दवाओं पर खर्च घटता है और किसानों को सीधा लाभ मिलता है. समय पर बुवाई करने से गन्ने में ज्यादा कल्ले निकलते हैं, जो आगे चलकर अधिक पैदावार का आधार बनते हैं.
खेत की तैयारी पर दें विशेष ध्यान
अच्छी फसल के लिए खेत की सही तैयारी बेहद जरूरी है. सबसे पहले खेत की गहरी जुताई करनी चाहिए ताकि मिट्टी पलट जाए और पुराने अवशेष नष्ट हो जाएं. इसके बाद दो से तीन बार कल्टीवेटर चलाकर मिट्टी को भुरभुरी और समतल बना लें. समतल खेत में सिंचाई का पानी बराबर फैलता है, जिससे हर पौधे को समान पोषण मिलता है. जो किसान गन्ने की दूसरी फसल (पेड़ी) लेना चाहते हैं, उन्हें खेत में उपयुक्त मशीन से जुताई कर मिट्टी को अच्छी तरह तैयार करना चाहिए.
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स्वस्थ बीज का चयन है सफलता की कुंजी
गन्ने की खेती में बीज का चुनाव सबसे महत्वपूर्ण चरण है. हमेशा 9 से 10 महीने पुराना, स्वस्थ और मोटा गन्ना ही बीज के रूप में इस्तेमाल करें. जिस गन्ने में बीमारी, सड़न या लाल धब्बों के लक्षण हों, उसे बिल्कुल न चुनें. अच्छा और रोगमुक्त बीज बेहतर जमाव देता है और पौधे मजबूत बनते हैं. इससे फसल की गुणवत्ता और वजन दोनों बढ़ते हैं.
लाल सड़न से बचाव के आसान उपाय
गन्ने में ‘लाल सड़न’ नामक बीमारी अक्सर बड़ी समस्या बन जाती है. इसे गन्ने का कैंसर भी कहा जाता है, क्योंकि यह पूरी फसल को नुकसान पहुंचा सकती है. इससे बचाव के लिए बुवाई से पहले बीज उपचार करना जरूरी है. 100 लीटर पानी में ट्राइकोडर्मा पाउडर मिलाकर घोल तैयार करें और गन्ने के टुकड़ों को 10 से 15 मिनट तक इसमें डुबोकर रखें. इसके बाद ही बुवाई करें. यह उपाय फसल को रोगों से बचाने में प्रभावी माना जाता है.
वैज्ञानिक तरीके अपनाएं, बढ़ाएं आमदनी
यदि किसान समय पर बुवाई, सही बीज चयन और वैज्ञानिक तरीके अपनाते हैं, तो गन्ने की पैदावार में उल्लेखनीय वृद्धि हो सकती है. संतुलित खाद, उचित सिंचाई और नियमित निगरानी भी जरूरी है. सही योजना और देखभाल से गन्ना खेती किसानों की आय को कई गुना तक बढ़ा सकती है.