Punjab News: पंजाब का लुधियाना जिला वायरस-रहित आलू बीज के उत्पादन में महत्वपूर्ण केंद्र बन गया है. इससे स्थानीय किसानों को काफी फायदा हो रहा है. विशेषज्ञों का कहना है कि क्षेत्र का खास तापमान और कृषि-जलवायु परिस्थितियां उच्च गुणवत्ता और रोग-प्रतिरोधी फसल पैदा करने में मदद कर रही हैं. एक्सपर्ट को उम्मीद है कि आने वाले वर्षों में रोग-प्रतिरोधी आलू के बीज को बढ़ावा मिलेगा. इससे आलू की पैदावार में बढ़ोतरी होगी और किसानों की कमाई भी बढ़ेगी.
द टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, कृषि वैज्ञानिकों का कहना है कि लुधियाना अब शुरुआती पीढ़ी के प्रमाणित बीज आलू का एक अहम केंद्र बन गया है. यहां का खास तापमान और कृषि-जलवायु परिस्थितियां उच्च गुणवत्ता और रोग-प्रतिरोधी फसल उगाने में मदद करती हैं. साथ ही तेजी से बढ़ती कोल्ड सप्लाई चेन की वजह से यहां से आलू के बीज अब गुजरात, कर्नाटक और कई अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी भेजे जा रहे हैं. धान की कटाई और अक्टूबर में आलू की बुवाई के बीच समय कम होने के कारण किसान फसल अवशेष जलाने से बचने के लिए सतत फसल तैयारी अपनाते हैं.
किसानों और कृषि विशेषज्ञों की हाई-टेक बैठक
दरअसल, लुधियाना जिला स्थित शराबा गांव में वैज्ञानिकों, किसानों और कृषि विशेषज्ञों की हाई-टेक बैठक हुई थी. इस बैठक में दिखा गया कि लुधियाना वायरस-रहित आलू बीज के उत्पादन में महत्वपूर्ण केंद्र बनता जा रहा है. आलू प्रौद्योगिकी और प्रिसिजन फार्मिंग सत्र में बताया गया कि खास जलवायु और जर्मन मशीनरी के मेल से जिले को वैश्विक आलू सप्लायर बनाया जा रहा है. सत्र में दिखाया गया कि धान की पुआल को सीधे मिट्टी में मिलाना (इन-सीटू मिश्रण), मुल्चिंग और मिट्टी की सेहत सुधारने वाली तकनीकें उत्पादन बढ़ाती हैं और पर्यावरण पर असर कम करती हैं.
‘प्रिसिजन एग्रीकल्चर’ अपनाना जरूरी हो गया है
श्रमिकों की कमी के चलते अब मैनुअल खेती की जगह ‘प्रिसिजन एग्रीकल्चर’ अपनाना जरूरी हो गया है. कार्यक्रम में यूरोप की उन्नत तकनीकें, खासकर जर्मन मशीनरी, पेश की गईं, जो काम को ज्यादा प्रभावी और आसान बनाती हैं. मुख्य तकनीकों में एयर-ब्लास्ट क्लीनिंग शामिल है, जो फसल कटाई के बाद अवशेष हटाकर बीज की शुद्धता और स्वास्थ्य सुनिश्चित करती है. प्रिसिजन हार्वेस्टर से आलू को मशीन से उठाया जाता है, जिससे फसल को नुकसान कम और श्रम लागत घटती है. कंट्रोल्ड-डेप्थ टिलेज मिट्टी को लक्षित रूप से तैयार करता है और नमी व संरचना को बचाता है. मैकेनाइज्ड ग्रेडिंग तकनीक से आकार और गुणवत्ता के हिसाब से बीज को ऑटोमैटिक छांटा जाता है, जिससे कोल्ड स्टोरेज में मूल्य बढ़ता है.