क्या अमेरिका-भारत व्यापार समझौते से कृषि और डेयरी सेक्टर को होगा नुकसान, क्यों नाराज हैं सरवन सिंह पंढेर?

किसान नेताओं और विशेषज्ञों ने अमेरिका-भारत व्यापार समझौते पर चिंता जताई है. उनका कहना है कि मक्का, सोयाबीन, सेब और अन्य उत्पादों के आयात से भारतीय कृषि बाजार में असमान प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी. नॉन-टैरिफ बैरियर कमजोर होने और टैरिफ में कटौती से घरेलू किसानों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को गंभीर नुकसान हो सकता है.

Kisan India
नोएडा | Updated On: 8 Feb, 2026 | 08:35 AM

US-India Trade Deal: अमेरिका-भारत व्यापार समझौते को लेकर किसान नेताओं और कृषि विशेषज्ञों ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है. उनका कहना है कि यह समझौता अमेरिकी कृषि उत्पादों के लिए भारत के बाजार के दरवाजे खोल सकता है, जिससे भारतीय किसानों को नुकसान होगा. किसान नेता बलबीर सिंह राजेवाल और सरवन सिंह पंढेर ने सरकार के इस दावे पर सवाल उठाया कि संवेदनशील कृषि और डेयरी उत्पादों को सुरक्षित रखा गया है. उनका कहना है कि मक्का, गेहूं, चावल, सोयाबीन, दूध, पोल्ट्री, इथेनॉल, तंबाकू और अन्य उत्पादों को लेकर सुरक्षा के दावे जमीनी हकीकत में कमजोर नजर आते हैं.

द ट्रिब्यून की  रिपोर्ट के मुताबिक, बलबीर सिंह राजेवाल ने कहा कि भले ही सरकार सुरक्षा की बात कर रही हो, लेकिन इस समझौते से अमेरिका को भारतीय खाद्य बाजार  में धीरे-धीरे प्रवेश का मौका मिल सकता है, जो ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए खतरनाक साबित होगा. उन्होंने कहा कि अब तक अमेरिका को भारतीय खाद्य बाजार से बाहर रखा गया था, लेकिन सूखे मक्के के अवशेष (डीडीजीएस) और सोयाबीन तेल के आयात के जरिए मक्का और सोयाबीन की ‘बैकडोर एंट्री’ की जा रही है. ये उत्पाद जेनेटिकली मॉडिफाइड हैं, जिनका लंबे समय से विरोध किया जाता रहा है. उनके मुताबिक, पहली बार भारतीय कृषि को किसी अंतरराष्ट्रीय व्यापार समझौते से जोड़ा जा रहा है, जिससे किसानों की चिंता बढ़ गई है.

अमेरिका से सस्ते कृषि उत्पाद भारत में भर सकते हैं

सरवन सिंह पंढेर ने चेतावनी दी कि अमेरिका से सस्ते कृषि उत्पाद भारत में भर सकते हैं. उन्होंने कहा कि इस समझौते से सेब उत्पादकों  को पहले ही भारी नुकसान हुआ है और यह तो सिर्फ शुरुआत है. एक बार अमेरिका को बाजार में जगह मिल गई तो वह सरकार पर दूसरे क्षेत्रों को भी खोलने का दबाव बनाएगा. वहीं कृषि अर्थशास्त्री देविंदर शर्मा ने आरोप लगाया कि भारत ने अपने नॉन-टैरिफ बैरियर, यानी सुरक्षा कवच, को कमजोर कर दिया है, जबकि अमेरिका ने अपने स्वास्थ्य और सुरक्षा मानकों में कोई ढील नहीं दी. उनका कहना है कि आयात शुल्क और अन्य नियमों के जरिए भारत हानिकारक उत्पादों को रोकता था, लेकिन इन्हें हटाने से भारतीय किसान असमान प्रतिस्पर्धा के सामने आ जाएंगे.

अमेरिका के टैरिफ 0-5 फीसदी से बढ़ाकर 18 फीसदी कर दिए गए

कृषि अर्थशास्त्री प्रो. केसार सिंह भांगू ने कहा कि अभी भारत अमेरिका से आयात किए जाने वाले कई कृषि उत्पादों पर 15 से 70 फीसदी तक आयात शुल्क लगाता है. उन्होंने कहा कि नए समझौते के तहत अमेरिका के टैरिफ 0-5 फीसदी से बढ़ाकर 18 फीसदी कर दिए गए हैं, जबकि भारत ने कुछ उत्पादों पर अपने टैरिफ 15-70 फीसदी से घटाकर शून्य कर दिए हैं. इसके अलावा, भारत ने कृषि क्षेत्र  के कुछ हिस्सों को अमेरिका के आयात के लिए खोल दिया है. सेब, नट्स, DDG और सोयाबीन तेल के आयात से बाजार में प्रतिस्पर्धा बदल सकती है और घरेलू उत्पादकों को नुकसान हो सकता है.

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Published: 8 Feb, 2026 | 08:32 AM

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