किसान संगठनों ने भारत-अमेरिका व्यापार समझौते का किया विरोध, इस बात को लेकर जताई चिंता

भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को लेकर किसान संगठनों का विरोध तेज हो गया है. कृषि और डेयरी सेक्टर को समझौते में शामिल करने से किसानों की आय, दूध के दाम और ग्रामीण आजीविका पर खतरे की आशंका जताई जा रही है. किसान नेताओं और विशेषज्ञों ने इसे भारतीय कृषि के लिए नुकसानदायक बताया है.

Kisan India
नोएडा | Published: 8 Feb, 2026 | 08:03 AM

India-US trade Deal: किसान संगठनों ने भारत-अमेरिका व्यापार समझौते का कड़ा विरोध किया है. खासकर कृषि और डेयरी सेक्टर को इसमें शामिल किए जाने को लेकर किसान संगठन काफी नाराज हैं. भारतीय किसान यूनियन (BKU-A) के राष्ट्रीय प्रवक्ता धर्मेंद्र मलिक ने कहा कि भारत का डेयरी क्षेत्र छोटे और सीमांत किसानों पर आधारित है और करीब 15 करोड़ परिवार इससे जुड़े हैं. अगर अमेरिका से सब्सिडी वाले डेयरी उत्पाद आयात हुए तो घरेलू दूध के दाम गिरेंगे और ग्रामीण आजीविका पर गंभीर असर पड़ेगा.

उन्होंने यह भी कहा कि यह समझौता सांस्कृतिक और नैतिक सवाल खड़े करता है, क्योंकि अमेरिका में डेयरी पशुओं को नॉन-वेज और पशु-आधारित आहार दिया जाता है, जो भारतीय परंपराओं के खिलाफ है. भारत-अमेरिका संयुक्त बयान में कहा गया है कि कृषि बाजार  को सुरक्षित रखा गया है और संवेदनशील कृषि व डेयरी उत्पादों पर कोई ड्यूटी छूट नहीं दी गई है. हालांकि, कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि समझौते की स्पष्ट जानकारी न होने से किसान भ्रम और चिंता में हैं.

भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को लेकर विरोध तेज

द ट्रिब्यून की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को लेकर चिंता और विरोध तेज हो गया है. प्रसिद्ध राजनीतिक विश्लेषक और सामाजिक कार्यकर्ता योगेंद्र यादव ने सोशल मीडिया पर कहा कि जिस बात का डर था, वही सच हो गया है. उनके अनुसार पहली बार भारतीय कृषि को किसी अंतरराष्ट्रीय व्यापार समझौते के दायरे में लाया जा रहा है. कुछ कृषि उत्पादों पर आयात शुल्क  शून्य कर दिया गया है और मक्का व सोयाबीन जैसे उत्पाद चुपचाप देश में प्रवेश कर रहे हैं, जिन पर आगे और छूट मिल सकती है. उन्होंने कहा कि अब स्थिति साफ है और किसानों व किसान संगठनों को एकजुट होकर इसका विरोध करना होगा.

स्थानीय डेयरी उद्योग लगभग खत्म हो गया था

वहीं, खाद्य नीति विशेषज्ञ देविंदर शर्मा ने फ्रांस का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां विदेशी कंपनियों के प्रवेश से स्थानीय डेयरी उद्योग लगभग खत्म हो गया था. उन्होंने कहा कि बाजार खोलने के बाद किसान आयात से मुकाबला नहीं कर पाए और करीब तीन साल पहले डेयरी खेती घाटे में चली गई. बाद में किसानों के हित में एक बड़ा आंदोलन हुआ और उपभोक्ताओं ने थोड़ी ज्यादा कीमत चुकाने पर सहमति दी. इसका नतीजा यह हुआ कि आज फ्रांस में डेयरी खेती दूसरा सबसे मुनाफे वाला व्यवसाय बन गई है.

भारत के भविष्य से कोई समझौता नहीं करेंगे

वहीं, भारतीय कृषक समाज के एक सदस्य ने कहा है कि सरकार के सामने किसानों की तीन प्रमुख मांगें रखीं. उन्होंने कहा कि भारत-अमेरिका मुक्त व्यापार समझौते से कृषि और डेयरी क्षेत्रों  को पूरी तरह बाहर रखा जाए. किसी भी व्यापार समझौते से पहले किसानों से पारदर्शी और सार्थक बातचीत की जाए. साथ ही किसानों की आय, ग्रामीण अर्थव्यवस्था, खाद्य संप्रभुता और सांस्कृतिक मूल्यों की पूरी सुरक्षा सुनिश्चित की जाए. उन्होंने स्पष्ट किया कि किसान अपने हितों, भारतीय कृषि की गरिमा और ग्रामीण भारत के भविष्य से कोई समझौता नहीं करेंगे.

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