आयात शुल्क में कटौती से भारत को होगा सीधा फायदा, नारियल छाल से बने उत्पाद के निर्यात में आएगी तेजी

अमेरिका भारतीय कोयर के लिए बेहद अहम बाजार है, जहां से भारत के कुल कोयर निर्यात का करीब 40 प्रतिशत हिस्सा जाता है. 27 अगस्त 2025 से लागू 50 प्रतिशत टैक्स के कारण अमेरिकी बाजार में भारतीय कोयर उत्पाद काफी महंगे हो गए थे.

Kisan India
नोएडा | Updated On: 4 Feb, 2026 | 06:28 PM

Agri Export: अमेरिका द्वारा आयात शुल्क घटाकर 18 प्रतिशत किए जाने के बाद भारत के कोयर (नारियल की बाहरी छाल) और कोयर उत्पादों के निर्यात में तेज बढ़ोतरी की उम्मीद है. पहले 50 प्रतिशत टैक्स और अन्य शुल्कों के कारण भारतीय कोयर उत्पाद अमेरिका के बाजार में प्रतिस्पर्धा खो रहे थे, जिससे निर्यातकों को 2025 में भारी नुकसान उठाना पड़ा. फेडरेशन ऑफ इंडियन कोयर एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन (FICEA) के महासचिव साजन बी. नायर ने इसे लंबे समय से प्रतीक्षित फैसला बताया. उन्होंने कहा कि टैक्स में कटौती के बाद खरीदारों की ओर से सकारात्मक प्रतिक्रिया मिल रही है. जो ऑर्डर रुके हुए थे, उन्हें अब तेजी से भेजा जा रहा है और नए ऑर्डर भी मिलने लगे हैं. इससे लंबे समय से मंदी झेल रहे उद्योग में नई ऊर्जा आई है.

बिजनेसलाइन की रिपोर्ट के मुताबिक, उन्होंने कहा कि इसका लंबे समय में भी अच्छा असर पड़ेगा, खासकर क्रिसमस और न्यू ईयर सीजन के लिए निर्यात बढ़ेगा. साजन नायर के मुताबिक, पिछले वित्त वर्ष में भारत के कोयर निर्यात  से 4,343 करोड़ रुपये की कमाई हुई, जिसमें अमेरिका की हिस्सेदारी करीब 1,400 करोड़ रुपये रही. लंबे समय के असर पर बात करते हुए साजन बी. नायर ने कहा कि इस फैसले से आने वाले महीनों में निर्यात को बढ़ावा मिलेगा, खासकर क्रिसमस और न्यू ईयर सीजन के दौरान. इससे कोयर उत्पादों का निर्यात लगातार बना रहेगा. उन्होंने कहा कि पिछले वित्त वर्ष में भारत ने कोयर निर्यात से 4,343 करोड़ रुपये कमाए, जिसमें अमेरिका की हिस्सेदारी करीब 1,400 करोड़ रुपये रही.

कोयर निर्यात का करीब 40 प्रतिशत हिस्सा जाता है

उद्योग सूत्रों के मुताबिक, अमेरिका भारतीय कोयर के लिए बेहद अहम बाजार है, जहां से भारत के कुल कोयर निर्यात का करीब 40 प्रतिशत हिस्सा जाता है. 27 अगस्त 2025 से लागू 50 प्रतिशत टैक्स के कारण अमेरिकी बाजार में भारतीय कोयर उत्पाद काफी महंगे हो गए थे, जिससे सिर्फ एक तिमाही में उद्योग को लगभग 400 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ. इस टैक्स का सबसे ज्यादा असर केरल के कोयर उद्योग पर पड़ा, क्योंकि अमेरिका को होने वाले कुल निर्यात में राज्य की हिस्सेदारी करीब 57 प्रतिशत है. उच्च टैक्स के चलते निर्यातकों को यूरोप और एशिया  के अन्य बाजारों की ओर रुख करना पड़ा. हालांकि अब टैक्स घटकर 18 प्रतिशत होने से कोयर मैट जैसे उत्पाद फिर से प्रतिस्पर्धी हो जाएंगे. इससे मांग बढ़ने और पहले हुए नुकसान की भरपाई होने की उम्मीद जताई जा रही है.

7 फीसदी से बढ़ाकर लगभग 60 फीसदी कर दिया

वहीं, आंध्र प्रदेश में एक्वाकल्चर यानी जल-खेती को फिर से बढ़ावा मिलने की उम्मीद है, क्योंकि अमेरिका ने झींगा (श्रीम्प)  के निर्यात पर लगाए गए रेसिप्रोकल टैक्स को कम कर दिया है. इससे राज्य के लाखों जल-कृषि किसानों को राहत मिली है, जो पिछले साल आर्थिक अनिश्चितता में फंसे थे. राज्य में लगभग 8 लाख लोग मुख्य रूप से किसान, मजदूर और व्यापारी एक्वाकल्चर पर निर्भर हैं. ट्रम्प प्रशासन के दौरान यह टैक्स 7 फीसदी से बढ़ाकर लगभग 60 फीसदी कर दिया गया था, जिससे निर्यात प्रभावित हुआ और किसानों के सामने खेती जारी रखने या बंद करने का संकट खड़ा हो गया. अमेरिका भारत के एक्वाकल्चर उत्पादों का सबसे बड़ा बाजार है, जिसमें आंध्र प्रदेश की हिस्सेदारी 80-90 फीसदी है.

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Published: 4 Feb, 2026 | 05:26 PM

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