प्याज बुवाई के समय हर किसान इन 8 बातों का रखें ध्यान, बढ़ जाएगी पैदावार.. कमाई में होगा इजाफा

भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा प्याज उत्पादक और निर्यातक देश है. प्याज के खास स्वाद और औषधीय गुणों की वजह से देश और विदेश में सालभर इसकी अच्छी मांग रहती है. महाराष्ट्र में सबसे अधिक प्याज की खेती होती है.

Kisan India
नोएडा | Updated On: 26 Jan, 2026 | 02:53 PM

Onions Sowing: अभी महाराष्ट्र, बिहार, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, मध्य प्रदेश और गुजरात सहित लगभग पूरे देश में रबी प्याज की बुवाई चल रही है. ये बुवाई फरवरी महीने तक चलेगी. लेकिन बहुत से किसानों का कहना है कि अधिक खर्च और मेहनत करने के बावजूद भी बंपर पैदावार नहीं होती है. ऐसे में कई बार आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है. ऐसे में इन किसानों को आज हम 8 ऐसे टिप्स बताएंगे, जिसे बुवाई के समय अपनाने पर फसल की पैदावार बढ़ जाएगी. खास बात यह है कि इन टिप्स को नर्सरी तैयार करते समय और बुवाई के वक्त अपनाना होगा. इससे किसानों को बहुत फायदा मिलेगा.

दरअसल, प्याज की व्यावसायिक खेती तीन सीजन में की जा सकती है. खरीफ, पछेती खरीफ  और रबी. प्याज की खेती आमतौर पर नर्सरी पौधों के जरिए की जाती है, लेकिन कुछ क्षेत्रों में बल्बलेट या बीज के छिड़काव से भी उगाई जाती है. खरीफ, पछेती खरीफ या रबी सीजन में अच्छी फसल के लिए नर्सरी का सही प्रबंधन बहुत जरूरी है, जिसके लिए कुछ खास बातों का ध्यान रखना चाहिए.

प्याज नर्सरी प्रबंधन के लिए जरूरी टिप्स

  1. नर्सरी तैयार करने के लिए हमेशा उन्नत किस्मों  के बीज का इस्तेमाल करें. खरीफ प्याज की नर्सरी लगाने का सही समय 15 जून से 15 जुलाई और पछेती खरीफ के लिए अगस्त से सितंबर है. जबकि, रबी प्याज की फसल के लिए नर्सरी तैयार करने का सबसे उपयुक्त समय मध्य अक्टूबर से मध्य नवंबर (या नवंबर के अंत तक) माना जाता है.
  2. 500 वर्ग मीटर नर्सरी बेड में लगभग 1 हेक्टेयर के लिए पर्याप्त पौध तैयार हो जाते हैं, जिसके लिए 5-7 किलोग्राम बीज की जरूरत होती है.
  3. बीज 1.2 मीटर चौड़ाई और 3-4 मीटर लंबाई वाले उठे हुए बेड में पंक्ति पद्धति से बोए जाएं. बुआई से पहले बीज को फफूंदीनाशक से उपचारित करें. बोने के बाद मिट्टी या कम्पोस्ट की हल्की परत डालकर फुहारे से पानी दें और क्यारियों को घास या वनस्पति आवरण से ढक दें.
  4. खरीफ नर्सरी में 35-40 दिन और पछेती खरीफ में 45-50 दिन में पौध प्रत्यारोपण के लिए तैयार हो जाते हैं.
  5. नर्सरी से पौधे निकालते समय मिट्टी में पर्याप्त नमी हो और जड़ें टूटने से बचें.
  6. बीमार पौधों को तुरंत अलग करें और उनकी रोपाई न करें.
  7. पौधों को फफूंदीनाशक से उपचारित कर प्रत्यारोपण करें और जहां संभव हो, रोपाई शाम के समय करें.
  8. अत्यधिक छोटे या बड़े पौधों की रोपाई न करें, इससे प्याज की गुणवत्ता और भंडारण पर नकारात्मक असर पड़ता है.

इन राज्यों में होती है प्याज की अधिक खेती

भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा प्याज उत्पादक और निर्यातक देश है. प्याज के खास स्वाद और औषधीय गुणों  की वजह से देश और विदेश में सालभर इसकी अच्छी मांग रहती है. कोल्ड स्टोरेज और कटाई के बाद सही प्रबंधन की सुविधाओं की वजह से किसान अब प्याज की व्यावसायिक खेती और नर्सरी पौध तैयार करके अच्छा मुनाफा कमा रहे हैं. भारत में इसकी मुख्य खेती महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, कर्नाटक, गुजरात, राजस्थान, बिहार, आंध्र प्रदेश, हरियाणा, पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश, छत्तीसगढ़, ओडिशा, तमिलनाडु, झारखंड और तेलंगाना में होती है.

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Published: 26 Jan, 2026 | 02:51 PM

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