Cow Rearing: देश में गौपालन का चलन तेजी से बढ़ रहा है. अब गांव के साथ-साथ शहरों में लोग गौपालन कर रहे हैं. इससे उन्हें अच्छी कमाई हो रही है. वहीं, केंद्र सरकार के साथ-साथ राज्य सरकारें भी गौपालन को बढ़ावा दे रही है. किसानों को गाय-भैंस खरीदने के लिए सब्सिडी दी जा रही है. इसके बावजूद भी कई किसानों का कहना है कि गौपालन में उन्हें नुकसान हो रहा है, क्योंकि गाय के दूध से ज्यादा घी नहीं निकलता है. लेकिन आज हम गाय की एक ऐसी नस्ल के बारे में बात करने का जा रहे हैं, जिसका घी मार्केट में बहुत महंगा बिकता है. एक किलो घी की कीमत 5,500 रुपये तक होती है. ऐसे में किसान अगर इस नस्ल का पालन करते हैं, तो उन्हें अधिक कमाई होगी.
दरअसल, हम जिस गाय की नस्ल के बारे में बात करने जा रहे हैं, उसका नाम बद्री गाय है. यह गाय अपनी खासियत के चलते छोटे किसानों के लिए मसीहा भी मानी जाती है. दरअसल, बद्री गाय उत्तराखंड की एक देसी नस्ल है. यह अन्य गायों की तुलना में केवल 3-4 लीटर दूध देती है, लेकिन इसके दूध से बना घी 5,500 रुपये प्रति किलो बिकता है, जो साधारण गाय के घी से लगभग 5 गुना महंगा है. दूध का उत्पादन कम होने के कारण बहुत लोग इसे पालना पसंद नहीं करते. डेयरी के व्यावसायीकरण के बाद यह गाय लगभग विलुप्त होती जा रही है, लेकिन कुछ डेयरी फार्म्स ने इसके दूध की गुणवत्ता को समझा और संरक्षण-संवर्धन के काम शुरू किए हैं.
इस गाय के दूध में 8.4 फीसदी फैट
बद्री गाय को पहाड़ी और ठंडी जगहों के लिए सबसे उपयुक्त माना जाता है. रिसर्च से पता चला है कि इसका दूध बिल्कुल शुद्ध है. इसमें 8.4 फीसदी फैट, 9.02 फीसदी टोटल सॉलिड्स और 3.26 फीसदी क्रूड प्रोटीन होता है, जो अन्य गाय और भैंस के दूध से ज्यादा है. इसके दूध में ए-2 प्रोटीन और कई पोषक तत्व भी मौजूद हैं. यही कारण है कि बद्री गाय का दूध, छाछ, मक्खन और घी सभी मिल्क प्रोडक्ट्स महंगे बिकते हैं.
पूरे दिन में इतने किलो देती है दूध
आज के समय में दूध और डेयरी को व्यवसाय की तरह देखा जाता है, इसलिए किसान उन गायों को पसंद करते हैं जो ज्यादा दूध देती हों. बद्री गाय का दूध गुणवत्ता में बेहतरीन है, लेकिन दिनभर में केवल 4 किलोग्राम दूध देती है. इसी वजह से इसकी संख्या अब सैंकड़ों में ही रह गई है.
यह गाय हिमालय के बुग्याल में चरकर दूध देती है
बद्री गाय एक कम लागत वाली देसी नस्ल है, जो हिमालय के बुग्याल में चरकर दूध देती है. माना जाता है कि बुग्याल की हरी-भरी घास में पोषण भरपूर होता है, इसलिए बद्री गाय का दूध शुद्ध और पोषक होता है. इस दूध को यहां के लोकदेवताओं को अर्पित भी किया जाता है. लोग कहते हैं कि असली गौदान सिर्फ बद्री गाय से ही माना जाता है. आज कई ऑनलाइन कंपनियां इस गाय का घी बेचकर संरक्षण की दिशा में काम कर रही हैं. उत्तराखंड डेयरी विभाग और यूकेसीडीपी भी बद्री गाय के संरक्षण में लगातार प्रयासरत हैं.