तालाब नहीं तो क्या हुआ! अब गमले और टब में भी खिलेगा कमल, जानिए घर पर उगाने का पूरा तरीका

कमल के पौधे को सूरज की रोशनी बेहद पसंद है. यह ऐसा पौधा है जो बिना धूप के ठीक से बढ़ ही नहीं पाता. इसलिए अगर आप घर में कमल उगाने की सोच रहे हैं, तो सबसे पहले ऐसी जगह चुनें जहां रोज कम से कम पांच से छह घंटे सीधी धूप आती हो. छत, खुली बालकनी या आंगन इसके लिए सबसे अच्छी जगह मानी जाती है.

Kisan India
नई दिल्ली | Published: 27 Jan, 2026 | 02:14 PM

Gardening Tips: कमल… एक ऐसा फूल जो सिर्फ सुंदर ही नहीं, बल्कि भारत की संस्कृति, आस्था और पहचान से गहराई से जुड़ा हुआ है. इसे भारत का राष्ट्रीय फूल होने का गौरव भी मिला है. देवी लक्ष्मी से लेकर भगवान विष्णु और ब्रह्मा तक, कमल को शुभता, पवित्रता और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है. यही वजह है कि बहुत से लोग चाहते हैं कि उनके घर में भी कमल खिले. अक्सर लोगों को लगता है कि कमल सिर्फ तालाब या झील में ही उग सकता है, लेकिन सच्चाई यह है कि आप इसे अपने घर की छत, बालकनी या आंगन में भी आसानी से उगा सकते हैं. बस सही तरीका और थोड़ी देखभाल जरूरी है.

कमल के लिए सही जगह क्यों है जरूरी

कमल के पौधे को सूरज की रोशनी बेहद पसंद है. यह ऐसा पौधा है जो बिना धूप के ठीक से बढ़ ही नहीं पाता. इसलिए अगर आप घर में कमल उगाने की सोच रहे हैं, तो सबसे पहले ऐसी जगह चुनें जहां रोज कम से कम पांच से छह घंटे सीधी धूप आती हो. छत, खुली बालकनी या आंगन इसके लिए सबसे अच्छी जगह मानी जाती है. अगर धूप कम मिलेगी, तो पौधे में पत्तियां तो आ सकती हैं, लेकिन फूल नहीं आएंगे.

गमला या टब कैसा होना चाहिए

कमल उगाने के लिए किसी महंगे या खास बर्तन की जरूरत नहीं होती. आप चाहें तो प्लास्टिक का टब, सीमेंट का हौज या चौड़ा गमला भी इस्तेमाल कर सकते हैं. बस ध्यान रखने वाली बात यह है कि बर्तन चौड़ा और गहरा हो. आमतौर पर 12 से 18 इंच गहराई वाला टब कमल के लिए उपयुक्त रहता है. बहुत संकरा गमला लेने से जड़ों को फैलने की जगह नहीं मिलती, जिससे पौधा कमजोर रह जाता है.

मिट्टी और पानी की सही व्यवस्था

कमल के लिए मिट्टी का चुनाव बेहद अहम होता है. इसे रेतीली या बहुत हल्की मिट्टी पसंद नहीं आती. चिकनी, दोमट या तालाब जैसी गीली मिट्टी कमल के लिए सबसे अच्छी मानी जाती है. गमले में पहले करीब तीन से चार इंच तक मिट्टी डालें और फिर धीरे-धीरे ऊपर से पानी भरें. पानी इतना हो कि मिट्टी पूरी तरह डूब जाए और ऊपर छह से आठ इंच तक पानी बना रहे. कोशिश करें कि पानी बहुत ज्यादा क्लोरीन वाला न हो, क्योंकि इससे पौधे की बढ़वार प्रभावित हो सकती है.

बीज और कंद से उगाने में क्या फर्क है

कमल को बीज और कंद, दोनों से उगाया जा सकता है. बीज से उगाने में थोड़ा धैर्य रखना पड़ता है. बीज को पहले कुछ घंटों या एक दिन के लिए पानी में भिगोया जाता है, जिससे वह नरम हो जाए. इसके बाद हल्की मिट्टी में दबाकर पानी में रखा जाता है. बीज से उगा पौधा धीरे-धीरे बढ़ता है.

वहीं कंद से कमल उगाना ज्यादा आसान और तेज तरीका माना जाता है. कंद को गीली मिट्टी में हल्के से दबाकर रख दिया जाता है और ऊपर से पानी भर दिया जाता है. कंद से उगाया गया पौधा जल्दी मजबूत होता है और फूल भी जल्दी देता है.

देखभाल में क्या रखें ध्यान

कमल की देखभाल बहुत मुश्किल नहीं होती, लेकिन लापरवाही से बचना जरूरी है. गमले के पानी को समय-समय पर साफ करते रहें ताकि उसमें बदबू या मच्छर न पनपें. अगर पत्तियों पर धूल जम जाए या कीड़े दिखें, तो साफ पानी से हल्के हाथ से धो देना काफी होता है. ज्यादा केमिकल या कीटनाशक इस्तेमाल करने से बचें, क्योंकि इससे पौधे को नुकसान हो सकता है.

सर्दियों में कमल की बढ़वार थोड़ी धीमी हो जाती है, इसलिए इस मौसम में पानी बहुत ठंडा न होने दें और पौधे को ज्यादा ठंडी हवा से बचाएं.

कब खिलता है कमल का फूल

अगर आपने सही तरीके से कमल लगाया है और उसे पर्याप्त धूप, पानी और देखभाल मिल रही है, तो आमतौर पर दो से तीन महीने के भीतर पौधा विकसित होने लगता है. इसके बाद धीरे-धीरे खूबसूरत फूल खिलने लगते हैं.

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