Paddy Farming: खरीफ सीजन में धान की खेती करने वाले किसान अच्छी पैदावार के लिए खेत की तैयारी, उर्वरक प्रबंधन और सिंचाई पर विशेष ध्यान देते हैं. लेकिन कई बार खेत में उगने वाले खरपतवार पूरी मेहनत पर पानी फेर देते हैं. इन्हीं में से एक है मोथा खरपतवार, जो धान के पौधों के साथ तेजी से बढ़ता है और मिट्टी से मिलने वाले पोषक तत्वों पर कब्जा कर लेता है. यदि समय रहते इसका नियंत्रण नहीं किया जाए तो फसल की बढ़वार रुक सकती है और उत्पादन में भारी गिरावट आ सकती है. कृषि विशेषज्ञ किसानों को इसकी पहचान और समय पर नियंत्रण के उपाय अपनाने की सलाह दे रहे हैं.
धान की जड़ों से पोषण छीन लेता है मोथा खरपतवार
कृषि विशेषज्ञ प्रमोद कुमार के अनुसार, धान की फसल में कई प्रकार के खरपतवार उगते हैं, लेकिन मोथा सबसे नुकसानदायक खरपतवारों में से एक माना जाता है. यह धान के पौधों के साथ तेजी से विकसित होता है और मिट्टी में मौजूद पानी, पोषक तत्व और उर्वरकों का बड़ा हिस्सा खुद उपयोग कर लेता है. इसके कारण धान के पौधों को पर्याप्त पोषण नहीं मिल पाता, जिससे उनकी बढ़वार प्रभावित होती है. लंबे समय तक खेत में मोथा बने रहने पर फसल कमजोर पड़ने लगती है और दानों की गुणवत्ता तथा उत्पादन दोनों पर असर पड़ता है.
ऐसे करें मोथा खरपतवार की सही पहचान
कृषि विशेषज्ञ प्रमोद कुमार बताते हैं कि मोथा की पहचान करना मुश्किल नहीं है. इसकी पत्तियां गहरे हरे रंग की और तिकोने आकार की होती हैं. इसकी जड़ें जमीन के अंदर काफी गहराई तक फैल जाती हैं, जिससे इसे सामान्य तरीके से हटाना आसान नहीं होता. जैसे-जैसे यह पुराना होता है, इसकी पत्तियां सख्त होकर भूरे रंग की दिखाई देने लगती हैं. यदि खेत में इस प्रकार का खरपतवार दिखाई दे तो किसान को तुरंत नियंत्रण की योजना बनानी चाहिए, क्योंकि यह बहुत तेजी से फैलने की क्षमता रखता है.
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निराई और खरपतवारनाशी दवाओं से करें प्रभावी नियंत्रण
मोथा खरपतवार से बचाव के लिए समय-समय पर निराई-गुड़ाई करना सबसे प्रभावी उपायों में से एक है. इसके अलावा आवश्यकता होने पर कृषि विशेषज्ञ की सलाह के अनुसार खरपतवारनाशी दवाओं का भी प्रयोग किया जा सकता है. मोथा के नियंत्रण के लिए पेंडीमेथलीन 30 EC, ब्यूटाक्लोर 50 फीसदी EC, प्रोपेनिल, ऑक्सीफ्लोरफेन और पाइराजोसल्फ्यूरान एथाइल WP जैसी दवाओं का उपयोग किया जाता है. हालांकि किसी भी रसायन का प्रयोग निर्धारित मात्रा और विशेषज्ञ की सलाह के अनुसार ही करना चाहिए, ताकि फसल को किसी प्रकार का नुकसान न पहुंचे.
रोपाई के बाद सही समय पर करें नियंत्रण, तभी मिलेगा बेहतर उत्पादन
कृषि विशेषज्ञ प्रमोद कुमार के अनुसार, धान की रोपाई के बाद शुरुआती दिनों में खरपतवार नियंत्रण बेहद महत्वपूर्ण होता है. रोपाई के लगभग 2 से 3 दिन बाद खेत की स्थिति का आकलन कर खरपतवार नियंत्रण की प्रक्रिया शुरू की जा सकती है. समय पर नियंत्रण करने से मोथा फैलने का मौका नहीं मिलता और धान के पौधों को पर्याप्त पोषण, पानी और धूप मिलती है. इससे पौधों की बढ़वार बेहतर होती है और उत्पादन में वृद्धि की संभावना बढ़ जाती है. इसलिए किसान नियमित रूप से खेत का निरीक्षण करें और खरपतवार दिखाई देते ही उचित उपाय अपनाएं, ताकि पूरी फसल सुरक्षित रह सके.