देश में कपास की खेती का रकबा घटने, उत्पादन में कमी आने का मूल कारण बी.टी. कपास किस्में हैं. भारतीय किसान संघ ने केंद्र सरकार को चिट्ठी भेजकर कहा है कि बीटी कपास की दोनों किस्मों को पूरी तरह से रोका जाए. इसके अलावा जीएम किस्मों पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया जाए. कहा गया है कि बीटी कपास किस्में कभी भी अधिक उपजाऊ नहीं थीं. किसान संगठन का कहना है कि सरकार इस पर विचार करे और किसान हित में उनकी मांगों को माना जाएगा. अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख राघवेन्द्र सिंह पटेल ने उम्मीद जताई है कि केंद्र सरकार बीटी कपास के साथ ही जीएम किस्मों पर रोक लगाएगी.
भारतीय किसान संघ के अखिल भारतीय महामंत्री मोहिनी मोहन मिश्र ने केंद्रीय कार्यालय नई दिल्ली में कहा कि देश में कपास उत्पादन में आ रही गिरावट का एकमात्र कारण बीटी कपास किस्में हैं. उन्होंने केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान को पत्र भेजकर स्पष्ट किया है कि कपास उत्पादन की कमी के पीछे जीएम यानी अनुवांशिक रूप से संशोधित फसलों के पक्षकारों की ओर से फैलाया जा रहा गलत नैरेटिव है.
जिस मकसद से बीटी कपास किस्म लाई गई थी उसमें ही फेल
मोहिनी मोहन मिश्र ने कहा कि बीटी कपास किस्में कभी भी अधिक उपजाऊ नहीं थीं, जिस कीड़े पिंक बॉलवार्म को नियंत्रित करने के लिए इसे विकसित किया गया था, उसे रोकने में यह पूरी तरह से असफल रही हैं. बीटी कपास के आने से देश के विभिन्न प्राकृतिक जलवायु क्षेत्रों में होने वाली कपास की पारंपरिक और देसी प्रजातियां समाप्त हो गई हैं, जिसके कारण कुल उपज में भारी कमी आई है.
देसी किस्मों को फिर से अपनाने की जरूरत
उन्होंने कहा कि इस संकट से मुक्ति पाने के लिये देश को दोबारा अपनी उच्च उपज वाली देसी किस्मों और पारंपरिक कृषि व्यवस्था को अपनाने की जरूरत है. विदेशी कंपनियों के प्रभाव व दबाब के चलते कृषि में बेतहाशा रसायनों के प्रयोग से कृषि उत्पाद जहरीले हो रहे हैं. ग्लाइफोसेट व पैराकाट डाइक्लोराइड रसायनों के बढ़ते प्रयोग से कैंसर जैसी बीमारी अब महामारी का रूप लेती जा रही है. जो कि जनसामान्य के लिये गंभीर चिंता का विषय है. इस पर रोक लगना चाहिये.

भारतीय किसान संघ ने बीटी कॉटन और जीएम किस्मों पर रोक लगाने की मांग की है.
पद्मश्री किसान देउबा लाड ने जीएम फसलों की जरूरत को नकारा
कपास का उत्पादन बढ़ाने की तकनीकी को इजाद करने पर पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित श्रीरंग देउबा लाड ने बताया कि देश के कपास उत्पादक किसानों को स्वाबलंबी व आत्मनिर्भर बनाने के लिये देसी उन्नत बीज व तकनीकी के प्रशिक्षण की जरूरत है, न कि जीएम बीज की. दादा लाड ने सरकार को प्रस्ताव देते हुये कहा कि आईसीएआर से प्रमाणित कपास का उत्पादन बढ़ाने की इस तकनीकी का देशभर में प्रशिक्षण देने के लिये वे तैयार हैं. सभी किसानों तक इस तकनीकी को पहुंचाने के लिये सरकार को इस दिशा में सहयोग करना चाहिये.
भारतीय किसान संघ की प्रमुख मांगें
- बी.टी. कपास की किस्मों (बीजी-1 और बीजी-2) को तत्काल प्रभाव से डी-नोटीफाई किया जाए.
- सभी जीएम फसलों के ऊपर देश में पूर्ण प्रतिबंध लगाया जाए.
- बीटी कपास के पक्ष में भ्रामक और गलत नैरेटिव तैयार कर देश के किसानों को गुमराह करने वालों के खिलाफ जांच कर सख्त दंडात्मक कार्रवाई की जाए.