World Lion Day 2026: भारत में बढ़ रही शेरों की दहाड़, एक दशक में 523 से 891 हुई एशियाई शेरों की संख्या

भारत के जंगलों से वन्यजीव प्रेमियों के लिए खुशखबरी सामने आई है. एशियाई शेरों की संख्या एक दशक में 523 से बढ़कर 891 हो गई. शेरों के संरक्षण का क्षेत्र भी बढ़ा है. अब सवाल है-क्या आने वाले वर्षों में जंगलों में दहाड़ और तेज होगी?

Saurabh Sharma
नोएडा | Published: 10 Aug, 2026 | 05:49 PM

World Lion Day 2026: भारत के जंगलों में एशियाई शेरों की दहाड़ अब पहले से ज्यादा बुलंद हो रही है. विश्व शेर दिवस-2026 के मौके पर केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने देश में शेरों की बढ़ती संख्या के आंकड़े साझा किए. उन्होंने बताया कि भारत में एशियाई शेरों की संख्या वर्ष 2015 में 523 थी, जो 2025 में बढ़कर 891 हो गई. यानी एक दशक में शेरों की संख्या में करीब 70 फीसदी का इजाफा हुआ है. यह उपलब्धि भारत के वन्यजीव संरक्षण प्रयासों के लिए बड़ी कामयाबी मानी जा रही है.

एक दशक में बढ़ी शेरों की संख्या, 891 तक पहुंचा आंकड़ा

भूपेंद्र यादव ने विश्व शेर दिवस के अवसर पर सोशल मीडिया मंच एक्स पर पोस्ट करते हुए बताया कि एशियाई शेरों के संरक्षण  में भारत ने उल्लेखनीय सफलता हासिल की है. वर्ष 2015 में देश में 523 एशियाई शेर दर्ज किए गए थे, जबकि 2025 में इनकी संख्या बढ़कर 891 हो गई. यह वृद्धि बताती है कि प्राकृतिक आवासों की सुरक्षा और संरक्षण की योजनाओं का शेरों की आबादी पर सकारात्मक असर पड़ा है.

संरक्षण क्षेत्र भी हुआ बड़ा, 35 हजार वर्ग किलोमीटर तक पहुंचा

शेरों की संख्या  बढ़ने के साथ उनके संरक्षण के लिए सुरक्षित क्षेत्र का दायरा भी बढ़ाया गया है. सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, वर्ष 2020 में भारत में शेरों के संरक्षण का क्षेत्र करीब 30,000 वर्ग किलोमीटर था, जो अब बढ़कर लगभग 35,000 वर्ग किलोमीटर हो गया है. पर्यावरण मंत्री ने कहा कि महत्वपूर्ण प्राकृतिक आवासों की रक्षा और संरक्षण प्रयासों को मजबूत करके विकास तथा प्रकृति संरक्षण को साथ लेकर आगे बढ़ाया जा सकता है.

2020 में शुरू हुआ था प्रोजेक्ट लायन

एशियाई शेरों के दीर्घकालिक संरक्षण के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी  ने 15 अगस्त 2020 को ‘प्रोजेक्ट लायन’ की घोषणा की थी. इस परियोजना का उद्देश्य शेरों के संरक्षण को मजबूत करना, उनके प्राकृतिक आवासों को सुरक्षित रखना और मानव-वन्यजीव संघर्ष जैसी चुनौतियों को कम करना है. गुजरात एशियाई शेरों का प्रमुख प्राकृतिक आवास है और यहां संरक्षण प्रयासों का शेरों की बढ़ती आबादी में महत्वपूर्ण योगदान माना जाता है.

शेरों के साथ बाघों की भी मजबूत मौजूदगी

भारत सिर्फ एशियाई शेरों के संरक्षण में ही नहीं, बल्कि बाघों के संरक्षण  में भी दुनिया में महत्वपूर्ण स्थान रखता है. नवीनतम आधिकारिक अखिल भारतीय बाघ अनुमान के अनुसार देश में बाघों की संख्या 3,682 दर्ज की गई है, जबकि न्यूनतम आधारभूत संख्या 3,167 बताई गई है. मध्य प्रदेश 785 बाघों के साथ पहले स्थान पर है. इसके बाद कर्नाटक में 563, उत्तराखंड में 560 और महाराष्ट्र में 444 बाघ दर्ज किए गए हैं. देश में कुल 58 टाइगर रिजर्व हैं. इस समय नई अखिल भारतीय बाघ गणना की प्रक्रिया भी जारी है.

भारत में शेर और बाघों की बढ़ती संख्या यह संकेत देती है कि वन्यजीव संरक्षण  के लिए किए जा रहे प्रयासों का असर दिखाई दे रहा है. विश्व शेर दिवस पर यही संदेश है कि जंगलों और प्राकृतिक आवासों को सुरक्षित रखा जाए, ताकि आने वाली पीढ़ियां भी एशियाई शेर की दहाड़ और जंगलों में बाघों की मौजूदगी देख सकें.H

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Published: 10 Aug, 2026 | 05:49 PM

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