राजस्थान में 12 फीसदी कम बारिश ने किसानों की मुश्किल बढ़ाई, सूखे से बचने के लिए सिंचाई खर्च बढ़ेगा

Rajasthan rain deficit : मौसम विभाग के अनुसार राजस्थान में जून से अब तक कुल 234.02 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई, जो जरूरत के हिसाब से 12.46 फीसदी कम रही है. यह स्थिति खरीफ फसलों के लिए मुसीबत बन गई है.

रिजवान नूर खान
नोएडा | Published: 10 Aug, 2026 | 06:12 PM

राजस्थान में अल नीनो के असर से 12 फीसदी कम बारिश ने अब किसानों की मुश्किल बढ़ानी शुरू कर दी है. जयपुर मौसम केंद्र के अनुसार 1 जून से 10 अगस्त तक राज्य में सामान्य से 12.46 फीसदी कम बारिश दर्ज की गई है. इससे सूखा जोखिम बढ़ गया है और बाजरा, सोयाबीन, मूंगफली, तिल, कपास और मक्का फसलों में इसका असर दिखना शुरू हो गया है. वहीं, किसानों को सिंचाई के लिए डीजल नलकूपों और बिजली नलकूपों का इस्तेमाल ज्यादा करना पड़ा है, जिससे खर्च बढ़ा है. जबकि, सितंबर तक अल नीनो के और मजबूत होने से आगे कृषि लागत और बढ़ने की आशंका ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है.

मौसम विभाग के अनुसार राजस्थान में एक जून से 10 अगस्त तक कुल 234.02 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई, जबकि इस अवधि में सामान्य औसत बारिश 267.34 मिलीमीटर है. इस तरह राज्य में बारिश 12.46 फीसदी कम रही. हालांकि, राज्य में बारिश सामान्य श्रेणी में है. सामान्य बारिश की श्रेणी औसत से 19 फीसदी कम से लेकर 19 फीसदी अधिक तक मानी जाती है. हालांकि, यह स्थिति खरीफ फसलों के लिए सूखा जोखिम पैदा कर रही है.

इन जिलों में कम बारिश का असर

जयपुर मौसम विभाग का कहना है कि बांसवाड़ा, बारां, भीलवाड़ा, बूंदी, चित्तौड़गढ़, दौसा, डूंगरपुर, जयपुर, जैसलमेर, जालोर, झालावाड़, करौली, कोटा, पाली, राजसमंद, सवाई माधोपुर, सिरोही, टोंक और उदयपुर कम बारिश वाली श्रेणी में हैं. इन जिलों में सामान्य से 20 से 59 फीसदी कम बारिश दर्ज की गई है. ऐसे में इन जिलों में फसलों के लिए सिंचाई की जरूरत बढ़ गई है.

बाजरा, मक्का और तिलहन फसलों पर बुरा असर

राजस्थान में इस मॉनसून सीजन के दौरान सामान्य से 12.46 फीसदी कम बारिश दर्ज होने से खरीफ फसलों पर दबाव बढ़ने का खतरा है. यदि वर्षा की कमी लंबे समय तक बनी रहती है तो बाजरा, मूंग, उड़द, सोयाबीन, मूंगफली, तिल, कपास और मक्का जैसी फसलों की वृद्धि प्रभावित हो सकती है. वर्तमान स्थिति से इन फसलों में सिंचाई की जरूरत बढ़ गई है, जो किसानों का खर्च बढ़ा रही है. नमी की कमी के से पैदावार में गिरावट और क्वालिटी खराब होने का खतरा भी बढ़ गया है.

कम बारिश वाले इलाकों में किसान क्या करें

कृषि एक्सपर्ट का कहना है कि फसलों को नुकसान से बचाने के लिए किसानों को जीवनरक्षक सिंचाई करनी चाहिए और खेतों में नमी बनाए रखने पर ध्यान देना चाहिए. मेड़बंदी, मल्चिंग और निराई-गुड़ाई जैसे उपाय अपनाकर मिट्टी में नमी लंबे समय तक बनाए रखी जा सकती है. खेतों में खरपतवार नियंत्रण करने से भी उपलब्ध नमी का बेहतर उपयोग फसल को मिलता है.

किसान मौसम विभाग की चेतावनियों और कृषि विभाग की सलाह पर नजर रखें तथा फसल बीमा योजना का लाभ लेने के लिए आवश्यक औपचारिकताएं समय पर पूरी करें, ताकि किसी संभावित नुकसान की स्थिति में आर्थिक सुरक्षा मिल सके.

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Published: 10 Aug, 2026 | 06:12 PM

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