Fact Of The Day: वन्यजीव संरक्षण का कमाल! एक सींग वाले गैंडे और एशियाई हाथियों की आबादी में इजाफा

India Wildlife: भारत में बाघों की संख्या में पिछले 16 सालों में बड़ी बढ़ोतरी दर्ज की गई है. साल 2006 में जहां 1,411 बाघ थे, वहीं 2022 तक यह संख्या बढ़कर 3,167 हो गई. यह वन्य जीव संरक्षण, सख्त निगरानी और बेहतर प्रबंधन का नतीजा है. भारत आज दुनिया के 70 प्रतिशत बाघों का घर बन चुका है.

Saurabh Sharma
नोएडा | Published: 3 Mar, 2026 | 01:52 PM

World Wildlife Day: भारत की धरती एक बार फिर अपनी समृद्ध वन्य धरोहर के लिए चर्चा में है. एक सींग वाले गैंडे की बढ़ती संख्या, एशियाई हाथियों के मजबूत झुंड और जंगलों में दहाड़ते बाघ इस बात का संकेत हैं कि संरक्षण की कोशिशें रंग ला रही हैं. खासकर काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान जैसे क्षेत्रों में गैंडों की मौजूदगी देश के लिए गर्व की बात है. वहीं एशियाई हाथियों की आबादी में भी सुधार देखा गया है. अब सवाल यह है कि देश में आखिर कितने बाघ हैं और उनकी संख्या क्या कहानी बयां करती है?

70 फीसदी बाघ भारत में, बड़ी उपलब्धि

भारत में दुनिया के 70 प्रतिशत जंगली बाघ  पाए जाते हैं. यह हमारे लिए गर्व की बात है. पिछले कुछ सालों में बाघों की संख्या में लगातार बढ़ोतरी हुई है. राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण के अनुसार, साल 2006 में देश में 1,411 बाघ थे. 2010 में यह संख्या बढ़कर 1,706 हो गई. 2014 में 2,226 बाघ दर्ज किए गए. 2018 में 2,967 और 2022 में यह संख्या बढ़कर 3,167 तक पहुंच गई. यानि 2006 के बाद बाघों की संख्या लगभग दोगुनी हो चुकी है. यह बढ़ोतरी प्रोजेक्ट टाइगर, सख्त निगरानी और शिकार पर रोक जैसे कदमों की वजह से संभव हो पाई है. 2018 से 2022 के बीच भी अच्छी बढ़त देखी गई, जिससे पता चलता है कि संरक्षण के प्रयास लगातार असर दिखा रहे हैं.

एशियाई शेर सिर्फ भारत में

एशियाई शेर दुनिया में केवल भारत में पाए जाते हैं. यानी 100 प्रतिशत एशियाई शेर हमारे देश में ही हैं. यह हमारी बड़ी जिम्मेदारी भी है. शेरों की संख्या भी पिछले सालों में तेजी से बढ़ी है.  साल 2005 में 359 शेर थे. 2010 में यह संख्या 411 हो गई. 2015 में 523 और 2020 में बढ़कर 674 तक पहुंच गई. 1995 में जहां केवल 284 शेर थे, वहीं अब यह संख्या दोगुने से ज्यादा हो चुकी है. शेरों की यह बढ़त सख्त सुरक्षा, शिकार पर रोक और उनके रहने के क्षेत्र को बढ़ाने की वजह से संभव हुई है. जंगलों में बेहतर देखभाल और बीमारियों से बचाव ने भी इसमें बड़ी भूमिका निभाई है.

भारत की वन्य संपदा पर जताया गर्व

वर्ल्ड वाइल्डलाइफ डे के मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक्स कर भारत की समृद्ध वन्य संपदा पर गर्व जताया. उन्होंने कहा कि भारत दुनिया के 70 प्रतिशत से अधिक बाघों का घर है. एक सींग वाले गैंडे और एशियाई हाथियों की सबसे बड़ी आबादी भी यहीं पाई जाती है. साथ ही एशियाई शेर केवल भारत में ही सुरक्षित और फल-फूल रहे हैं, जो देश की बड़ी उपलब्धि है.

एक सींग वाला गैंडा और हाथियों की बड़ी संख्या

भारत में एक सींग वाले गैंडे की सबसे बड़ी संख्या पाई जाती है. यह दुर्लभ जीव दुनिया के कुछ ही देशों में मिलता है, लेकिन भारत में इनकी मजबूत आबादी है. एशियाई हाथियों  की भी सबसे ज्यादा संख्या भारत में है. ये हाथी जंगलों के लिए बहुत जरूरी होते हैं. ये बीज फैलाने और जंगल को जीवित रखने में मदद करते हैं. हाथियों और गैंडों की सुरक्षा के लिए भी खास अभियान चलाए जा रहे हैं.

संरक्षण से मिली सफलता

वन्य जीवों की संख्या बढ़ना कोई छोटी बात नहीं है. इसके पीछे कई सालों की मेहनत है. शिकार रोकने के लिए सख्त कानून बनाए गए. जंगलों की सुरक्षा बढ़ाई गई. वन रक्षकों को आधुनिक साधन दिए गए. प्रोजेक्ट टाइगर और शेर संरक्षण कार्यक्रम जैसे अभियानों ने बड़ा असर डाला. 2006 से 2018 के बीच बाघों में तेज सुधार हुआ, और 2018 से 2022 तक भी लगातार बढ़ोतरी बनी रही. इसी तरह 2010 के बाद शेरों की संख्या में भी तेजी आई.

भविष्य के लिए जरूरी है जिम्मेदारी

वर्ल्ड वाइल्डलाइफ डे हमें यह सोचने का मौका देता है कि हम प्रकृति के लिए क्या कर सकते हैं. सिर्फ सरकार ही नहीं, आम लोगों की भी जिम्मेदारी है कि वे जंगल और जानवरों की रक्षा करें. अगर जंगल सुरक्षित रहेंगे तो जानवर भी सुरक्षित रहेंगे, और हमारा पर्यावरण भी मजबूत रहेगा. आने वाली पीढ़ियों को भी बाघ, शेर, गैंडा और हाथी देखने का मौका मिलना चाहिए. 3 मार्च का यह दिन हमें याद दिलाता है कि प्रकृति का सम्मान करना और वन्य जीवों की रक्षा  करना हम सबकी जिम्मेदारी है. अगर हम आज जागरूक रहेंगे, तो कल हमारी धरती और भी सुंदर और सुरक्षित होगी.

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