देरी से मॉनसूनी बारिश के चलते अब किसानों ने धान की रोपाई तेज कर दी है. झारखंड के साहिबगंज समेत अन्य जिलों में बीते सप्ताह से रुक-रुककर हो रही बारिश ने खेतों को पानी से लबालब कर दिया है. साहिबगंज के किसान स्वर्णा धान की बुवाई कर रहे हैं. यह धान 145 दिनों में पककर तैयार हो जाती है और उत्पादन ज्यादा रहता है. जबकि, झारखंड, छत्तीसगढ़ और बिहार समेत पश्चिम बंगाल में इसके चावल की खूब खपत होती है और बाजार में किसान को दाम भी अच्छा मिलता है.
मुफ्त बीज किट दे रही सरकार
झारखंड के साहिबगंज जिले में हाल के दिनों में हुई अच्छी बारिश से खरीफ फसलों की खेती ने रफ्तार पकड़ ली है. धान, मक्का और दलहन की बुआई तेजी से चल रही है. वहीं, प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि की समय पर मिलने वाली राशि से किसानों को बीज, खाद खरीदने और खेत को तैयार करने में संबल मिला है. वहीं, राज्य सरकार भी किसानों को मुफ्त दलहन और तिलहन के साथ ही मोटे अनाज की बीज किट उपलब्ध करा रही है.
मक्का की 26 फीसदी बुवाई पूरी हुई
मॉनसून की सक्रियता ने साहिबगंज जिले के किसानों में नई उम्मीद जगा दी है. हाल के दिनों में हुई अच्छी बारिश के बाद साहिबगंज के खेतों में भी खरीफ फसलों की बुआई और धान रोपनी तेज हो गई है. किसान पूरे उत्साह के साथ धान, मक्का और दलहन की खेती में जुटे हैं. बड़ी संख्या में महिला किसान धान रोपनी कर रही हैं. पिछले सीजन किसानों को मक्का का अच्छा भाव मिला था, जिसके चलते इस बार किसानों ने 26 फीसदी मक्का की बुवाई पूरी कर ली है.
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किसानों को भा गई 145 दिन में पकने वाली स्वर्णा धान
साहिबगंज में अधिकांश किसान स्वर्णा धान की खेती करते हैं. स्वर्णा (MTU 7029/स्वर्णा मंसूरी) भारत के छत्तीसगढ़, बिहार, और ओडिशा में भी खूब उगाई जाती है. यह धान की एक अत्यधिक लोकप्रिय और उच्च उपज देने वाली मध्यम अवधि यानी 145 से 150 दिन में तैयार हो जाती है. इसके मध्यम-मोटे, वजनदार दाने और 25-35 क्विंटल प्रति एकड़ पैदावार के चलते किसान इसे बहुत पसंद करते हैं.
27 फीसदी धान की बुवाई कर चुके किसान
साहिबगंज जिले के कृषि पदाधिकारी प्रमोद एक्का ने मीडिया को बताया कि अब तक लगभग 27 फीसदी धान, 26 फीसदी मक्का और 1.5 फीसदी दलहन की बुआई पूरी हो चुकी है. जुलाई महीने में अब तक 169 मिलीमीटर वर्षा दर्ज की गई है, जिससे खरीफ फसलों के लिए अनुकूल परिस्थितियां बनी हैं. उन्होंने कहा कि किसानों को उम्मीद है कि यदि मौसम इसी तरह साथ देता रहा, तो इस वर्ष फसल का उत्पादन बेहतर होगा और उनकी आमदनी में भी बढ़ोतरी होगी.