Dairy Cooperatives: गांवों में सुबह-सुबह जब महिलाएं दूध लेकर डेयरी कलेक्शन सेंटर की ओर जाती हैं, तो यह सिर्फ रोज का काम नहीं बल्कि बदलती ग्रामीण अर्थव्यवस्था की तस्वीर भी है. आज डेयरी सहकारी समितियों में महिलाओं की भागीदारी तेजी से बढ़ रही है. पशुपालन और डेयरी विभाग के अनुसार, महिलाएं अब केवल पशुओं की देखभाल ही नहीं कर रहीं, बल्कि डेयरी समितियों में सदस्य, कार्यकर्ता और प्रबंधन की भूमिका भी निभा रही हैं. दूध से होने वाली आय से उनके परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत हो रही है और बच्चों की पढ़ाई तथा पोषण में भी मदद मिल रही है.
डेयरी सहकारी समितियों में बढ़ रही महिलाओं की भागीदारी
पशुपालन और डेयरी विभाग के अनुसार देशभर में डेयरी सहकारी समितियों में महिलाओं की भागीदारी लगातार बढ़ रही है. पहले जहां महिलाएं सिर्फ घर और पशुओं की देखभाल तक सीमित रहती थीं, वहीं अब वे डेयरी समितियों में सक्रिय भूमिका निभा रही हैं. कई गांवों में महिलाएं दूध संग्रह, रिकॉर्ड रखने और समिति के प्रबंधन से जुड़े काम भी संभाल रही हैं. इससे महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत होने का मौका मिल रहा है और समाज में उनकी भूमिका भी पहले से ज्यादा महत्वपूर्ण हो गई है.
दूध से मिल रही नियमित आय
डेयरी सहकारी समितियों से जुड़ने का सबसे बड़ा फायदा यह है कि महिलाओं को नियमित आय का जरिया मिल जाता है. घर में पाले गए गाय या भैंस का दूध सीधे डेयरी केंद्र पर बेचा जाता है और उसके बदले में तय कीमत मिलती है. यह आय भले ही रोज थोड़ी-थोड़ी मिले, लेकिन महीने के अंत में यह परिवार के लिए एक बड़ी मदद बन जाती है. इससे घर के खर्च चलाने में आसानी होती है और परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत होती है.

दूध की कमाई से मजबूत हो रहा महिलाओं का आत्मविश्वास.
बच्चों की पढ़ाई और पोषण में मिल रही मदद
पशुपालन और डेयरी विभाग के अनुसार दूध से होने वाली कमाई का बड़ा फायदा बच्चों की पढ़ाई और पोषण में देखने को मिल रहा है. कई ग्रामीण परिवारों में महिलाएं डेयरी से मिलने वाली आय को बच्चों की शिक्षा पर खर्च करती हैं. इसके साथ ही घर में दूध और दुग्ध उत्पाद होने से बच्चों को अच्छा पोषण भी मिलता है. इससे बच्चों का स्वास्थ्य बेहतर रहता है और परिवार का जीवन स्तर भी धीरे-धीरे सुधरता है.
महिलाओं का बढ़ रहा आत्मविश्वास
डेयरी सहकारी समितियों से जुड़ने के बाद महिलाओं में आत्मविश्वास भी काफी बढ़ा है. जब महिलाएं खुद कमाई करने लगती हैं तो उन्हें अपने फैसले लेने का भी मौका मिलता है. गांवों में अब कई महिलाएं डेयरी समितियों की बैठकों में हिस्सा लेती हैं, सुझाव देती हैं और कई जगहों पर नेतृत्व की भूमिका भी निभा रही हैं. इससे ग्रामीण समाज में महिलाओं की पहचान और सम्मान दोनों बढ़ रहे हैं.
ग्रामीण विकास में बन रहीं मजबूत साझेदार
पशुपालन और डेयरी विभाग का मानना है कि डेयरी सहकारी समितियां ग्रामीण विकास का एक मजबूत माध्यम बन रही हैं. जब महिलाएं इन समितियों से जुड़ती हैं तो इसका असर सिर्फ उनके परिवार पर ही नहीं बल्कि पूरे गांव की अर्थव्यवस्था पर पड़ता है. दूध उत्पादन बढ़ने से गांवों में रोजगार के नए अवसर भी पैदा होते हैं और स्थानीय बाजार भी मजबूत होते हैं. इस तरह डेयरी सहकारिता महिलाओं को सशक्त बनाकर ग्रामीण विकास की नई कहानी लिख रही है.