महुआ के लड्डू और कुकीज बना रहीं आदिवासी महिलाएं, वन धन विकास योजना से मिली नई पहचान

Chhattisgarh Herbals Mahua laddus: राजनांदगांव जिले के कोरिनभाठा की महिलाओं ने वन धन विकास योजना का लाभ लेकर महुआ बीनने की बजाय उसके लड्डू, कुकीज, एनर्जी बार, जैम और बिस्किट जैसे उत्पाद बना रही हैं.

Kisan India
नोएडा | Updated On: 7 Aug, 2026 | 03:59 PM

छत्तीसगढ़ की आदिवासी महिलाएं महुआ के उत्पाद बनाकर छत्तीसगढ़ हर्बल्स के नाम से बेच रही हैं. पहले यह महिलाएं महुआ बीनकर बेचती थीं, लेकिन अब वह उनके उत्पाद लड्डू, बिस्किट आदि बनाकर बेच रही हैं और अच्छी आमदनी हासिल करने में कामयाबी हासिल की है. महिलाओं को जनजातीय कार्य मंत्रालय और ट्राइफेड की ओर से वन धन योजना चलाई जा रही है, जिसके जरिए आदिवासी, ग्रामीण महिलाओं को महुआ उत्पाद बनाने की ट्रेनिंग दी जाती है, जिसमें वह पैकेजिंग और मार्केटिंग भी सीखती हैं.

जनजातीय कार्य मंत्रालय और ट्राइफेड की एक पहल वन धन योजना को 2018 में शुरू किया गया था. इसका मुख्य उद्देश्य वनों से लघु वनोपज एकत्र करने वाले आदिवासी समुदायों को प्रशिक्षित करना, उनके उत्पादों का मूल्यवर्धन करना और उन्हें उद्यमी बनाकर स्थायी आजीविका प्रदान करना है. छत्तीसगढ़ के जंगलों में मिलने वाला महुआ अब ग्रामीण और आदिवासी महिलाओं के लिए आय और आत्मनिर्भरता का मजबूत साधन बन गया है. राज्य शासन की वन धन विकास केंद्र योजना के माध्यम से महिलाओं को महुआ से मूल्यवर्धित उत्पाद बनाने का प्रशिक्षण दिया जा रहा है. इससे उनकी आमदनी बढ़ रही है और वे सफल उद्यमी बनने की दिशा में आगे बढ़ रही हैं.

कोरिनभाठा की महिलाएं बना रहीं लड्डू, कुकीज और जैम

राजनांदगांव जिले के कोरिनभाठा वन धन विकास केंद्र की महिलाओं ने इस योजना का पूरा लाभ उठाया है. पहले वे महुआ केवल संग्रह करती थीं, लेकिन अब प्रशिक्षण के बाद महुआ से लड्डू, कुकीज़, एनर्जी बार, स्क्वैश और अन्य उपयोगी उत्पाद तैयार कर रही हैं. अब केवल कच्चे महुआ को बेचने के बजाय उससे लड्डू, कुकीज, जैम, और एनर्जी बार जैसे उत्पाद बनाए जा रहे हैं, जिससे स्थानीय स्तर पर नए रोजगार और स्थायी आजीविका के साधन विकसित हुए हैं.

उत्पादन बनाने, पैकेजिंग और मार्केटिंग की ट्रेनिंग

राजनांदगांव जिले के कोरिनभाठा वन धन विकास केंद्र आदिवासी और ग्रामीण महिलाओं को केवल उत्पाद बनाना ही नहीं सिखाया जाता, बल्कि गुणवत्ता, स्वच्छ उत्पादन, पैकेजिंग, लेबलिंग, भंडारण और विपणन की भी जानकारी दी जाती है. इससे वे बाजार की जरूरत के अनुसार बेहतर उत्पाद तैयार कर पा रही हैं और उन्हें उचित मूल्य भी मिल रहा है. आधुनिक प्रसंस्करण और आकर्षक पैकेजिंग के कारण इन उत्पादों की बाजार में अच्छी मांग बन रही है.

Chhattisgarh Herbals Mahua laddus

मशीन की मदद से महुआ उत्पाद बनाती महिलाएं.

छत्तीसगढ़ हर्बल्स के नाम से बाजार में बिक रहे उत्पाद

इन उत्पादों को ‘छत्तीसगढ़ हर्बल्स’ के माध्यम से व्यापक बाजार उपलब्ध कराया जा रहा है. इससे वन आधारित उत्पादों को नई पहचान मिल रही है और ग्रामीण महिलाओं को अपने उत्पाद बेचने के बेहतर अवसर प्राप्त हो रहे हैं. छत्तीसगढ़ राज्य लघु वन उत्पाद संघ की एक अनूठी पहल है. इसके तहत वनों से मिलने वाले प्राकृतिक और शुद्ध उत्पादों जैसे वन शहद, एलोवेरा जेल, हर्बल जूस, महुआ उत्पाद, आयुर्वेदिक चूर्ण और तेलों को महिला स्व-सहायता समूहों द्वारा तैयार कर बेचा जाता है. इसका मुख्य उद्देश्य आदिवासियों और स्थानीय लोगों को आजीविका देना है.

Mahua laddus

महुआ उत्पाद बनाने की प्रक्रिया.

महुआ उत्पाद से महिलाओं की कमाई बढ़ी

महुआ के मूल्यवर्धन से उसकी उपयोगिता और बाजार मूल्य दोनों बढ़े हैं. इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर पैदा हुए हैं. महिलाओं की आय में वृद्धि हुई है और उनके परिवार की आर्थिक स्थिति भी मजबूत हुई है. महुआ के फूलों और बीजों के मूल्यवर्धन से ग्रामीण व आदिवासी क्षेत्रों में महिलाओं की आय कई गुना बढ़ गई है.  कोरिनभाठा की महिलाओं की यह सफलता दिखाती है कि सही प्रशिक्षण, आधुनिक तकनीक और विपणन सहयोग मिलने पर वन संपदा को रोजगार और समृद्धि का मजबूत आधार बनाया जा सकता है. वन धन विकास केंद्र योजना आज महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाकर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई दिशा दे रही है.

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Published: 7 Aug, 2026 | 03:57 PM

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