5,638 करोड़ की मदद से बदली तस्वीर, जम्मू-कश्मीर बना ट्राउट उत्पादन में देश का नंबर-1 राज्य

भारत में शीतजल मत्स्य पालन तेजी से ब्लू इकोनॉमी का मजबूत हिस्सा बन रहा है. केंद्र सरकार की मदद और आधुनिक तकनीकों के कारण ट्राउट उत्पादन बढ़ा है. जम्मू-कश्मीर इस क्षेत्र में देश का सबसे बड़ा उत्पादक बनकर उभरा है. इससे पहाड़ी राज्यों में रोजगार, आय और इको-टूरिज्म को भी बड़ा फायदा मिल रहा है.

Saurabh Sharma
नोएडा | Published: 27 May, 2026 | 07:45 AM

Trout Farming: भारत का शीतजल मत्स्य पालन क्षेत्र अब ब्लू इकोनॉमी का मजबूत हिस्सा बनता जा रहा है. पहाड़ी और ठंडे इलाकों में होने वाला यह मत्स्य पालन लाखों लोगों को रोजगार और आय दे रहा है. केंद्र सरकार ने प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (PMMSY) के तहत इस क्षेत्र के विकास के लिए 5,638.76 करोड़ रुपये से ज्यादा की राशि आवंटित की है. ट्राउट उत्पादन में जम्मू-कश्मीर देश में सबसे आगे है.

ठंडे पानी में तेजी से बढ़ रहा मछली उत्पादन

भारत में ठंडे पानी की मछली पालन  गतिविधियां ऊंचाई वाले बर्फ से पोषित नदी, झील और जलाशयों में की जाती हैं. यहां पानी का तापमान 5 डिग्री सेल्सियस से 25 डिग्री सेल्सियस तक रहता है और ऑक्सीजन का स्तर बेहतर होता है. देश में ठंडे पानी की मछलियों का उत्पादन लगभग 7,000 मीट्रिक टन तक पहुंच चुका है. इसमें ट्राउट मछली का उत्पादन सबसे ज्यादा है, जो 2024-25 में लगभग 6,000 मीट्रिक टन तक पहुंच गया है.

ट्राउट उत्पादन में जम्मू-कश्मीर सबसे आगे

देश में ट्राउट उत्पादन  के मामले में जम्मू-कश्मीर (Jammu and Kashmir) पहले स्थान पर है. यहां करीब 3,010 मीट्रिक टन ट्राउट का उत्पादन हो रहा है. हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड दूसरे और तीसरे स्थान पर हैं. विशेषज्ञों के अनुसार ट्राउट पालन 1,500 मीटर से अधिक ऊंचाई वाले क्षेत्रों में ज्यादा सफल माना जाता है. वहीं गोल्डन महसीर और स्नो ट्राउट जैसी प्रजातियां भी किसानों की कमाई बढ़ा रही हैं.

आधुनिक तकनीक से बदल रही तस्वीर

शीतजल मत्स्य पालन क्षेत्र में अब आधुनिक तकनीकों  का तेजी से उपयोग किया जा रहा है, जिससे मछली उत्पादन में लगातार सुधार देखने को मिल रहा है. हैचरी, रीसर्कुलेटिंग एक्वाकल्चर सिस्टम (RAS), बायोफ्लॉक तकनीक और कोल्ड चेन सुविधाओं की मदद से मछलियों की गुणवत्ता बेहतर हो रही है और उत्पादन लागत भी कम हो रही है. सरकार का मानना है कि इन तकनीकों के इस्तेमाल से पहाड़ी और दूरदराज के इलाकों में रोजगार के नए अवसर पैदा हो रहे हैं. इसके साथ ही इको-टूरिज्म को बढ़ावा मिल रहा है और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण में भी मदद मिल रही है, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था मजबूत हो रही है.

लाखों परिवारों को मिल रहा लाभ

प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना  (PMMSY) के तहत देशभर में शीतजल मत्स्य पालन को तेजी से बढ़ावा दिया जा रहा है. इस योजना से अब तक 23.51 लाख परिवारों को आजीविका सहायता मिल चुकी है, जिससे पहाड़ी और दूरदराज के क्षेत्रों में रहने वाले लोगों की आय बढ़ी है. वहीं 33.78 लाख मछुआरों को बीमा सुरक्षा से जोड़कर उन्हें आर्थिक सुरक्षा भी दी गई है. सरकार आधुनिक तकनीकों और बेहतर सुविधाओं के जरिए इस क्षेत्र को मजबूत बना रही है. विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में शीतजल मत्स्य पालन भारत की ब्लू इकोनॉमी, रोजगार और ग्रामीण विकास को नई मजबूती देगा.

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Published: 27 May, 2026 | 07:45 AM

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