Rabi Crops Prices: रबी सीजन की फसलों की बिक्री इस बार किसानों के लिए मिली-जुली रही. गेहूं, चना और जौ जैसी प्रमुख फसलें अप्रैल से जून के दौरान अधिकतर मंडियों में न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) से कम दाम पर बिकीं. वहीं, मक्का किसानों को सबसे ज्यादा नुकसान झेलना पड़ा, क्योंकि इसकी कीमत MSP से काफी नीचे रही. दूसरी ओर सरसों की खेती करने वाले किसानों के लिए अच्छी खबर रही. सरसों न केवल MSP से ऊपर बिकी, बल्कि अब इसके भाव और भी मजबूत हो गए हैं.
गेहूं, चना और जौ MSP से नीचे बिके
मंडी के आंकड़ों के अनुसार, अप्रैल-जून के दौरान गेहूं का औसत भाव 2,506 रुपये प्रति क्विंटल रहा, जबकि इसका MSP 2,585 रुपये प्रति क्विंटल तय किया गया था. यानी किसानों को करीब 3 प्रतिशत कम कीमत मिली. इतना ही नहीं, 8 जुलाई तक गेहूं का औसत भाव और घटकर 2,485 रुपये प्रति क्विंटल रह गया.
चना उत्पादकों की स्थिति भी खास अच्छी नहीं रही. बिजनेस लाइन की रिपोर्ट के अनुसार, चना का औसत मंडी भाव 5,406 रुपये प्रति क्विंटल रहा, जबकि इसका MSP 5,875 रुपये था. यानी किसानों को लगभग 8 प्रतिशत कम दाम मिले. हालांकि जुलाई में इसकी कीमत बढ़कर 5,649 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंच गई है, जिससे किसानों को कुछ राहत मिलने की उम्मीद है. जौ की बात करें तो इसकी औसत कीमत 2,072 रुपये प्रति क्विंटल रही, जबकि MSP 2,150 रुपये था. हालांकि अब जौ का भाव बढ़कर 2,234 रुपये प्रति क्विंटल पहुंच चुका है.
मक्का के किसानों को सबसे बड़ा झटका
रबी और जायद दोनों मौसम में उगाई जाने वाली मक्का इस बार सबसे कमजोर फसल साबित हुई. अप्रैल-जून के दौरान इसका औसत भाव 1,830 रुपये प्रति क्विंटल रहा, जबकि MSP 2,400 रुपये प्रति क्विंटल था. यानी किसानों को करीब 24 प्रतिशत कम कीमत मिली. हालांकि जुलाई में मक्का का भाव बढ़कर 1,959 रुपये प्रति क्विंटल हो गया है, लेकिन यह अभी भी MSP से काफी नीचे है. इससे मक्का उत्पादक किसानों की चिंता बनी हुई है.
सरसों ने किसानों को दिया सबसे ज्यादा फायदा
इस बार सरसों की फसल किसानों के लिए सबसे अधिक लाभदायक रही. अप्रैल से जून के दौरान सरसों का औसत भाव 6,674 रुपये प्रति क्विंटल दर्ज किया गया, जबकि इसका MSP 6,200 रुपये था. यानी किसानों को लगभग 8 प्रतिशत अधिक कीमत मिली. अब 8 जुलाई तक सरसों का भाव बढ़कर 7,227 रुपये प्रति क्विंटल पहुंच गया है, जो MSP से करीब 17 प्रतिशत ज्यादा है. मजबूत मांग और बाजार में बेहतर कीमतों के कारण सरसों किसानों के लिए सबसे फायदेमंद फसल बनकर उभरी है.
अप्रैल-जून 2026: प्रमुख रबी फसलों के MSP और मंडी भाव की तुलना
| फसल | MSP (₹/क्विंटल) | अप्रैल-जून औसत मंडी भाव (₹/क्विंटल) | MSP से अंतर | 8 जुलाई तक औसत भाव (₹/क्विंटल) | वर्तमान स्थिति |
|---|---|---|---|---|---|
| गेहूं | 2,585 | 6,200 | -3 फीसदी | 2,485 | MSP से नीचे |
| चना | 5,875 | 5,406 | -8 फीसदी | 5,649 | MSP से नीचे, कुछ सुधार |
| जौ | 2,150 | 2,072 | -4 फीसदी | 2,234 | MSP से ऊपर |
| मक्का | 2,400 | 1,830 | -24 फीसदी | 1,959 | MSP से काफी नीचे |
| सरसों | 6,200 | 6,674 | +8 फीसदी | 7,227 | MSP से करीब ऊपर |
दालों में मसूर ने दिखाई मजबूती
रबी सीजन की दालों में मसूर की कीमतें लगभग MSP के बराबर बनी रहीं. इससे मसूर उत्पादकों को नुकसान नहीं उठाना पड़ा. हालांकि अन्य दलहनी फसलों में चना अभी भी MSP से नीचे कारोबार कर रहा है.
किसानों और बाजार पर क्या होगा असर?
फसलों के बेहतर दाम किसानों की आमदनी बढ़ाने में मदद करते हैं, लेकिन अगर कीमतें बहुत ज्यादा बढ़ती हैं तो खाद्य महंगाई भी बढ़ सकती है. फिलहाल सरसों, जौ, चना और मक्का के भाव में कुछ सुधार देखने को मिला है, जबकि गेहूं की कीमत अभी भी दबाव में है. आने वाले दिनों में बाजार की मांग, सरकारी खरीद और मौसम की स्थिति तय करेगी कि किसानों को उनकी फसल का कितना बेहतर दाम मिल पाता है.