El Nino Alert: देश में इस साल अल नीनो (El Nino) की आशंका के बीच केंद्र सरकार लगातार खेती और किसानों की स्थिति पर नजर बनाए हुए है. केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान के अनुसार बारिश की कमी का असर खरीफ फसलों की बुवाई पर जरूर पड़ा है, लेकिन जुलाई में हुई अच्छी बारिश से हालात में कुछ सुधार देखने को मिला है. सरकार का कहना है कि, जिन इलाकों में अब भी बारिश कम हुई है, वहां किसानों को कम समय और कम पानी में तैयार होने वाली फसलों की खेती करने की सलाह दी जा रही है.
सरकार का दावा है कि, अप्रैल से ही संभावित चुनौती को देखते हुए तैयारी शुरू कर दी गई थी. किसानों को समय पर सलाह देने, बीज उपलब्ध कराने, किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) और फसल बीमा जैसी योजनाओं के जरिए हर संभव मदद पहुंचाने की कोशिश की जा रही है.
जून में कम हुई बारिश, लेकिन जुलाई से सुधरे हालात
सरकार के मुताबिक जून महीने में देश में सामान्य से करीब 33 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई थी. हालांकि जुलाई में बारिश की रफ्तार बढ़ने से स्थिति में सुधार आया है और अब बारिश की कमी घटकर करीब 24 प्रतिशत रह गई है. अच्छी बारिश के चलते पहले जहां 262 जिले कम बारिश वाले थे, अब उनकी संख्या घटकर 178 रह गई है. ये जिले मुख्य रूप से महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, गुजरात, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, कर्नाटक, बिहार, झारखंड, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, पंजाब, पश्चिम बंगाल और ओडिशा में हैं. सरकार इन सभी जिलों की स्थिति पर लगातार नजर रख रही है.
अल नीनो के कारण कृषि की जो परिस्थितियां बन रही हैं, उस पर हमारी लगातार नजर है और मैं स्वयं भी हर मंगलवार को समीक्षा कर रहा हूँ।
– माननीय केंद्रीय मंत्री श्री @ChouhanShivraj जी pic.twitter.com/8rAVrpoFht
— Office of Shivraj (@OfficeofSSC) July 8, 2026
बुवाई में अब भी पिछड़ रहे हैं किसान
बारिश में देरी का असर खरीफ सीजन की बुवाई पर साफ दिखाई दिया है. पिछले साल इसी समय तक करीब 4.42 करोड़ हेक्टेयर क्षेत्र में बुवाई हो चुकी थी, जबकि इस बार अब तक लगभग 3.50 करोड़ हेक्टेयर में ही बुवाई हुई है. यानी पिछले साल की तुलना में करीब 91.95 लाख हेक्टेयर कम क्षेत्र में बुवाई हुई है. हालांकि सरकार को उम्मीद है कि जुलाई की अच्छी बारिश के बाद आने वाले दिनों में बुवाई का रकबा तेजी से बढ़ेगा.
मक्का, बाजरा और मूंग बोने की सलाह
मॉनसून में देरी का सबसे ज्यादा असर तुअर, सोयाबीन और कपास जैसी खरीफ फसलों पर पड़ा है. कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि अब इन फसलों की बुवाई में देरी होने पर उत्पादन प्रभावित हो सकता है. ऐसे में किसानों को सलाह दी गई है कि वे मक्का, बाजरा और मूंग जैसी कम अवधि में तैयार होने वाली और कम पानी में अच्छी पैदावार देने वाली फसलों को प्राथमिकता दें. इससे किसानों का जोखिम कम होगा और मौसम की अनिश्चितता के बावजूद बेहतर उत्पादन मिलने की संभावना बनी रहेगी.
सरकार ने पहले से कर ली है तैयारी
केंद्र सरकार का कहना है कि संभावित सूखे जैसी स्थिति से निपटने के लिए अप्रैल से ही तैयारी शुरू कर दी गई थी. भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) की मदद से प्रभावित जिलों के लिए कंटीजेंसी प्लान तैयार किए गए हैं. इनमें यह बताया गया है कि बारिश कम होने की स्थिति में किसान कौन-सी फसलें बोएं और खेती कैसे करें. इन योजनाओं को राज्यों और जिलों तक पहले ही भेज दिया गया है.
केंद्र सरकार ने अप्रैल से ही अल नीनो की चुनौती से निपटने की तैयारी शुरू कर दी थी। अल नीनो मॉनिटरिंग सेल, क्रॉप वेदर वॉच ग्रुप, राज्यों के कंट्रोल रूम और नोडल अधिकारियों के माध्यम से मानसून, बुआई, फसल और बाजार की स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है।
– माननीय केंद्रीय मंत्री श्री… pic.twitter.com/5J9nNJT4j9
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80 लाख किसानों तक पहुंची खेती बचाने की सलाह
सरकार ने 1 जून से 30 जून तक पूरे देश में ‘खेत बचाओ अभियान’ चलाया. इस अभियान के तहत 1.14 लाख से अधिक कार्यक्रम आयोजित किए गए और करीब 80.67 लाख किसानों तक सीधे पहुंचकर खेती से जुड़ी सलाह दी गई. किसानों को अल नीनो के असर, कम पानी वाली फसलों, बेहतर खेती के तरीकों और जोखिम कम करने के उपायों की जानकारी दी गई.
बीज, किसान क्रेडिट कार्ड और फसल बीमा पर भी फोकस
सरकार ने यह भी सुनिश्चित किया है कि जरूरत पड़ने पर किसानों को बीज की कमी का सामना न करना पड़े. इसके लिए करीब 1.75 लाख क्विंटल राष्ट्रीय बीज भंडार सुरक्षित रखा गया है. साथ ही किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) बनाने का अभियान भी चलाया गया. 30 जून तक मिले 1.14 लाख से अधिक आवेदनों में से 94 हजार से ज्यादा किसानों के KCC स्वीकृत किए जा चुके हैं. इसके अलावा किसानों को प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना से जोड़ने पर भी जोर दिया जा रहा है.