Lightning Alert India: मॉनसून का मौसम किसानों के लिए राहत लेकर आता है, लेकिन इसके साथ कई खतरे भी बढ़ जाते हैं. खेतों में बुवाई, रोपाई और दूसरी खेती के काम इसी समय सबसे ज्यादा होते हैं. ऐसे में किसान लंबे समय तक खुले खेतों में रहते हैं, जिससे बिजली गिरने (वज्रपात) का खतरा भी बढ़ जाता है. वेदर एक्सपर्ट संजय श्रीवास्तव का कहना है कि, थोड़ी-सी सावधानी किसानों की जान बचा सकती है. अगर मौसम के संकेतों को समय रहते समझ लिया जाए और सही कदम उठाए जाएं, तो बड़े हादसों से बचा जा सकता है.
क्यों बढ़ता है बिजली गिरने का खतरा?
CROPC के संस्थापक और चेयरमैन कर्नल संजय श्रीवास्तव के अनुसार, वज्रपात बनने के लिए दो चीजें सबसे जरूरी होती हैं, ‘गर्मी और नमी’. गर्मियों के बाद जब मॉनसून आता है और वातावरण में नमी बढ़ती है, तो बादलों में बिजली बनने की संभावना भी बढ़ जाती है. यही वजह है कि बरसात के मौसम में वज्रपात की घटनाएं ज्यादा देखने को मिलती हैं.
इन संकेतों को बिल्कुल नजरअंदाज न करें
अगर खेत में काम करते समय आपको ये संकेत दिखाई दें, तो तुरंत सुरक्षित जगह पर चले जाएं.
- आसमान में काले और घने बादल छा जाएं.
- तेज हवा चलने लगे.
- हल्की बारिश शुरू हो जाए.
- बादलों की तेज गर्जना सुनाई दे.
कर्नल संजय श्रीवास्तव बताते हैं कि, बादलों की गरज सुनाई देने का मतलब है कि अगले 20 से 30 मिनट के भीतर आसपास बिजली गिर सकती है.
बिजली गिरने के दौरान क्या करें?
अगर मौसम अचानक खराब हो जाए, तो सबसे पहले अपनी सुरक्षा पर ध्यान दें.
- तुरंत किसी पक्के मकान या सुरक्षित इमारत में चले जाएं.
- खुले खेत, तालाब, नदी या पानी भरी जगह से दूर रहें.
- किसी भी हालत में पेड़ के नीचे खड़े न हों.
- धातु के औजार, ट्रैक्टर या बिजली के खंभों से दूरी बनाए रखें.
अगर आसपास कोई सुरक्षित जगह नहीं है, तो जमीन पर सीधे बैठने के बजाय सूखे पत्ते, बोरी या सूखे कपड़े बिछाकर उसके ऊपर घुटनों को मोड़कर नीचे झुककर बैठ जाएं. इससे बिजली का असर कुछ हद तक कम हो सकता है.
मोबाइल ऐप से पहले ही मिल सकती है चेतावनी
आज तकनीक की मदद से भी वज्रपात से बचाव आसान हो गया है. विशेषज्ञ किसानों को सलाह देते हैं कि वे अपने मोबाइल में ‘सचेत’ और ‘दामिनी (Damini)’ जैसे ऐप डाउनलोड करें. ये ऐप मौसम की जानकारी और बिजली गिरने की संभावित चेतावनी पहले ही दे देते हैं. समय रहते अलर्ट मिलने पर किसान सुरक्षित स्थान पर पहुंच सकते हैं और हादसे से बच सकते हैं. ऐसे में जब भी आपको इसका पता चले तो आप अपनी जान की सुरक्षा के लिए पक्के मकान में चले जाएं, ये सबसे सुरक्षित स्थान होते हैं.
सरकार देती है मुआवजा भी
अगर किसी व्यक्ति की वज्रपात से मौत हो जाती है, तो सरकार की ओर से 4 लाख रुपये तक की आर्थिक सहायता देने का प्रावधान है. इसके अलावा घायल व्यक्ति को भी उसकी स्थिति के अनुसार सहायता दी जाती है.
पशुओं के नुकसान पर भी मुआवजा मिलता है. सामान्य तौर पर:
- गाय या भैंस की मौत पर 30,000 रुपये तक.
- बकरी की मौत पर 3,000 रुपये तक.
- मुर्गी की मौत पर 100 रुपये प्रति पक्षी तक सहायता का प्रावधान है.
इसके लिए संबंधित प्रशासन या राजस्व विभाग के माध्यम से निर्धारित प्रक्रिया पूरी करनी होती है.
सावधानी ही सबसे बड़ा बचाव
विशेषज्ञ का कहना है कि वज्रपात से बचने का सबसे अच्छा तरीका है मौसम के संकेतों पर नजर रखना और समय रहते सुरक्षित जगह पर पहुंच जाना. खेत का काम बाद में भी हो सकता है, लेकिन जान सबसे कीमती है. अगर किसान मौसम विभाग की चेतावनियों का पालन करें, मोबाइल अलर्ट का उपयोग करें और खराब मौसम के दौरान खुले स्थानों से बचें, तो वज्रपात जैसी घटनाओं से होने वाले नुकसान को काफी हद तक रोका जा सकता है.