PAU ने धान की किस्म PR-131 और PR-132 की बिक्री पर लगाई रोक, अब किसान करेंगे PR-133 की खेती

केवल पटियाला जिले में ही 8,000 एकड़ से अधिक धान की फसल प्रभावित हुई थी. सर्वेक्षण में यह भी पता चला कि जून 25 से पहले बोई गई PR-131, PR-132 और PR-114 किस्में सबसे ज्यादा प्रभावित हुईं, जिनकी वृद्धि रुक गई और दाने कम हुए. यही वजह है कि PR-131 और PR-132 की बिक्री पर रोक लगाई गई.

Kisan India
नोएडा | Updated On: 18 Mar, 2026 | 05:29 PM

Punjab Paddy Farming: पंजाब के धान किसानों के लिए राहत की खबर है. पंजाब कृषि विश्वविद्यालय (PAU) ने विवादित धान की किस्में PR-131 और PR-132 की बिक्री पर रोक लगा दी है. यानी इस खरीफ सीजन से किसान PR-131 और PR-132 की खेती नहीं कर पाएंगे. कहा जा रहा है कि इन दोनों किस्मों में बीमारी बहुत लगती थी. ऐसे में पैदावार में गिरावट आने के चलते किसानों को नुकसान उठाना पड़ता था. खास बात यह है कि PAU ने आने वाले सीजन के लिए PR-131 और PR-132 की जगह पर नई किस्म PR-133 पेश की है. इस किस्म में रोगों से लड़ने की क्षमता अधिक है. ऐसे में किसानों को उम्मीद है कि PR-133 किस्म की बुवाई करने पर ज्यादा पैदावार होगी, जिससे ज्यादा मुनाफा होगा.

कहा जा रहा है कि PR-131 और PR-132  से किसानों को नुकसान हो रहा था. ऐसे में वे लगातार विरोध कर रहे थे. यही वजह है कि पंजाब कृषि विश्वविद्यालय ने इन दोनों किस्मों पर रोक लगाने का फैसला किया. साथ ही खबर ये भी है कि इन दोनों किस्मों को लेकर किसान लगातार शिकायत भी कर रहे थे. किसानों का कहना था कि PR-131 और PR-132 किस्में बौने रोग (Dwarf Disease) के प्रति संवेदनशील हैं, जिससे पिछले साल उन्हें काफी नुकसान हुआ.

सबसे अधिक PR-131 और PR-132 किस्म की बुवाई की थी

द ट्रिब्यून की रिपोर्ट के मुताबिक, पटियाला और आसपास के इलाके के किसानों ने सबसे अधिक PR-131 और PR-132 किस्म की बुवाई की थी. ऐसे में ये इलाके सबसे ज्यादा प्रभावित हुए. इचेवाल, रोहटी बस्ता, रोहटी मोहड़ा, रोहटा, लुबाना कर्मू, कैदुपुर और ढांगरहा गांवों का दौरा करने के बाद स्वास्थ्य मंत्री डॉ. बलबीर सिंह ने विशेष गिर्दावरी का आदेश दिया है.

8,000 एकड़ से अधिक धान की फसल प्रभावित

जांच में पता चला कि केवल पटियाला जिले में ही 8,000 एकड़ से अधिक धान की फसल प्रभावित  हुई थी. सर्वेक्षण में यह भी पता चला कि जून 25 से पहले बोई गई PR-131, PR-132 और PR-114 किस्में सबसे ज्यादा प्रभावित हुईं, जिनकी वृद्धि रुक गई और दाने कम हुए. पटियाला के रौनी में किसान मेले के बाद बीजों को हाल ही में बीएस नगर के बल्लोवाल सांखड़ी किसान मेले में नहीं बेचा गया, ताकि संभावित विरोध से बचा जा सके.

किसानों ने पहले ही PR-131 और PR-132 के खिलाफ आपत्ति जताई थी

हालांकि, जानकारों का ये भी कहना है कि पंजाब कृषि विश्वविद्यालय ने यह फैसला मेले में विरोध रोकने के लिए लिया है. मेले में किसानों ने PR-126 को ज्यादा पसंद किया, जो PAU की विश्वसनीय किस्म है, जबकि नई PR-133 पर बिक्री काउंटर पर कम ध्यान गया. किसानों ने पहले ही PR-131 और PR-132 के खिलाफ आपत्ति जताई थी, क्योंकि 2025 के सीजन में ये किस्में दक्षिणी चावल काली-धारीदार बौना वायरस (SRBSDV) से प्रभावित हुई थीं. भारी मॉनसून की बारिश और पानी जमने की समस्या ने वायरस के फैलाव को और बढ़ा दिया.

किसानों को जल्दी बुवाई न करने की सलाह

राज्य कृषि विभाग, कृषि विश्वविद्यालयों और केंद्रीय एजेंसियों द्वारा किए गए फील्ड अध्ययन  ने यह पुष्टि की कि यह रोग बड़े पैमाने पर फैला हुआ था. इस बीच, PAU के कुलपति सतबीर सिंह गोसल ने इन किस्मों का बचाव करते हुए कहा कि पिछले साल का नुकसान खराब मौसम की वजह से हुआ, जो 2022 जैसी परिस्थितियों के समान था. उन्होंने किसानों को सलाह दी कि वे जल्दी बुआई न करें और बेहतर परिणाम के लिए केवल 20 जून के बाद पौधरोपण करें.

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Published: 18 Mar, 2026 | 04:52 PM
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