बीते कुछ समय में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से लेकर केंद्रीय कृषि मंत्री और अधिकारियों ने खेत की मिट्टी खराब होने की बात कही. इसके लिए केमिकल फर्टिलाइजर्स और कीटनाशकों के अत्यधिक इस्तेमाल को दोषी ठहराया गया है. मिट्टी को सुधारने के लिए खेत बचाओ अभियान भी केंद्रीय कृषि मंत्रालय ने चलाया है. लेकिन, आप जानना चाहते हैं कि केमिकल फर्टिलाइजर या कीटनाशकों की वजह से देश की कितनी कृषि भूमि खराब हुई है तो सरकार का जवाब आपको चौंका देगा. कृषि मंत्रालय ने लिखित जवाब में कहा है कि देश की कितनी कृषि भूमि खराब हुई है इसको लेकर उन्होंने कोई अध्ययन, स्टडी नहीं कराई है.
संसद में कृषि भूमि खराब होने के आंकड़े पेश नहीं कर पाई सरकार
बीते कुछ माह से देश में केमिकल फर्टिलाइजर और कीटनाशकों से खेत की मिट्टी खराब होने का हल्ला मचा हुआ है. मिट्टी के स्वास्थ्य को बचाने और मजबूत करने के लिए प्राकृतिक खेती और जैविक खेती की ओर शिफ्ट होने की सलाह किसानों को दी गई है. लेकिन, जब सरकार से संसद में सवाल पूछा गया कि रासायनिक खाद या कीटनाशकों की वजह से देश की कितनी कृषि भूमि खराब हुई है तो सरकार आंकड़े पेश नहीं कर पाई है.
कितनी मिट्टी खराब हुई इसका अध्ययन नहीं कराया- रामनाथ ठाकुर
सरकार ने शुक्रवार को कहा कि उसने ऐसा कोई अध्ययन नहीं कराया है जिससे पता चल सके कि देश में रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों के उपयोग के कारण प्रभावित कृषि भूमि का क्षेत्रफल कितना है. कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री रामनाथ ठाकुर ने शुक्रवार को राज्यसभा को एक प्रश्न के लिखित उत्तर में यह जानकारी दी. उत्तर में कहा गया कि देश में रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों के उपयोग से प्रभावित कृषि भूमि के क्षेत्रफल का पता लगाने के लिए कोई अध्ययन नहीं कराया गया है.
रासायनिक खेती की बजाय प्राकृतिक और जैविक खेती पर जोर – कृषि मंत्री
केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री रामनाथ ठाकुर ने राज्यसभा में कहा कि सरकार टिकाऊ कृषि और मानव कल्याण को ध्यान में रखते हुए रासायनिक खेती के विकल्प के रूप में प्राकृतिक खेती और जैविक खेती को बढ़ावा दे रही है. भाजपा सांसद रजनीश कुमार अग्रवाल के प्रश्न के जवाब में ठाकुर ने बताया कि अब तक देश में 18.93 लाख हेक्टेयर भूमि को जैविक खेती के दायरे में लाया जा चुका है. इससे 33.63 लाख किसानों को लाभ मिला है.
पूर्वोत्तर में बढ़ा जैविक खेती का दायरा
केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री रामनाथ ठाकुर ने बताया कि पूर्वोत्तर क्षेत्र जैविक मूल्य श्रृंखला विकास मिशन (MOVCDNER) के तहत 2.36 लाख हेक्टेयर क्षेत्र को जैविक खेती के अंतर्गत लाया गया है. इस योजना से 2.74 लाख किसान लाभान्वित हुए हैं.
23.13 लाख किसान प्राकृतिक कृषि मिशन से जुड़े
कृषि राज्य मंत्री ने बताया कि राष्ट्रीय प्राकृतिक कृषि मिशन (NMNF) के तहत अब तक 23.13 लाख किसानों का पंजीकरण किया जा चुका है. वहीं, 11.44 लाख हेक्टेयर क्षेत्र को प्राकृतिक खेती के तहत कवर किया गया है. उन्होंने दोहराया कि सरकार पर्यावरण संरक्षण, मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने और टिकाऊ कृषि को बढ़ावा देने के लिए प्राकृतिक और जैविक खेती को प्रोत्साहित कर रही है.