Seafood Export: सीफूड एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (SEAI) ने केंद्र सरकार से मांग की है कि भारत से यूरोपीय संघ (EU) को होने वाले समुद्री खाद्य निर्यात पर शून्य शुल्क (निल ड्यूटी) की व्यवस्था की जाए. साथ ही सभी गैर-व्यापारिक बाधाओं को हटाया जाए, ताकि आने वाले वर्षों में इस क्षेत्र में निर्यात तेजी से बढ़ सके. SEAI के अध्यक्ष जी. पवन कुमार ने कहा कि इससे उद्योग के बाजार विविधीकरण के लक्ष्य को मजबूती मिलेगी और भारतीय सीफूड को EU बाजार में अग्रणी स्थान हासिल करने में मदद मिलेगी. उन्होंने इस दिशा में केंद्र सरकार के सक्रिय सहयोग की भी अपील की.
बिजनेसलाइन की रिपोर्ट के मुताबिक, एसोसिएशन ने अमेरिका द्वारा ऊंचे टैरिफ लगाए जाने के बाद समुद्री खाद्य निर्यातकों को वाणिज्य मंत्रालय की ओर से मिले समर्थन की सराहना की है. साथ ही, यूरोपीय संघ द्वारा 102 नई मत्स्य इकाइयों को सूचीबद्ध किए जाने से इस अहम बाजार में भारतीय सीफूड निर्यात को बड़ा बढ़ावा मिला है.
अप्रैल- नवंबर 2025 में यह बढ़कर 988.22 मिलियन डॉलर पहुंच गया
यूरोपीय संघ (EU) को भारत का सीफूड निर्यात चालू वित्त वर्ष में तेजी से बढ़ा है. अप्रैल से नवंबर 2024 के दौरान जहां निर्यात 1,37,139 टन रहा था, वहीं इसी अवधि में चालू वर्ष में यह बढ़कर 1,76,367 टन हो गया, यानी मात्रा के लिहाज से करीब 28 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई. मूल्य के आधार पर भी निर्यात में मजबूत उछाल देखने को मिला है. अप्रैल–नवंबर 2024 में जहां सीफूड निर्यात का मूल्य 716.95 मिलियन डॉलर था, वहीं अप्रैल- नवंबर 2025 में यह बढ़कर 988.22 मिलियन डॉलर पहुंच गया, जो करीब 37.8 प्रतिशत की बढ़ोतरी को दर्शाता है.
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1.3 अरब डॉलर से ज्यादा के कपास वस्त्र निर्यात करता है
वहीं, इससे पहले कपास उत्पाद के निर्यात पर शून्य-शुल्क व्यवस्था लागू करने की मांग की गई थी. कॉटन टेक्सटाइल्स एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल ने यूरोपीय संघ (EU) के बाजार में भारतीय कपास वस्त्रों के लिए बेहतर व्यापार समझौते की जरूरत बताई थी. काउंसिल के अध्यक्ष विजय अग्रवाल के मुताबिक, ऊंचे टैरिफ के कारण भारतीय निर्यातक उन देशों से पिछड़ रहे हैं, जिन्हें विशेष शुल्क लाभ मिल रहा है. फिलहाल भारत हर साल EU को 1.3 अरब डॉलर से ज्यादा के कपास वस्त्र निर्यात करता है. अगर शून्य-शुल्क व्यवस्था लागू होती है, तो इससे भारत की प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी, MSME निर्यातकों को मजबूती मिलेगी और मूल्य-वर्धित व सतत निर्यात को बढ़ावा मिलेगा.
भारत- EU व्यापार वार्ताएं अंतिम चरण में हैं
यह मांग ऐसे समय में आई है जब भारत- EU व्यापार वार्ताएं अंतिम चरण में हैं. टेक्सटाइल उद्योग और ट्रेड सेक्टर मिलकर यूरोपीय बाजार में भारतीय कपास वस्त्रों के लिए बराबरी का अवसर सुनिश्चित करने की कोशिश कर रहे हैं. हाल ही में जर्मनी के फ्रैंकफर्ट में हुए हीमटेक्सटाइल शो में भारतीय निर्यातकों ने भारत- EU समझौते को लेकर खासा उत्साह दिखाया. विजय अग्रवाल का कहना है कि यह समझौता भारतीय कपास वस्त्र उद्योग के लिए नए विकास के रास्ते खोल सकता है.