बकरी पालन से करना चाहते हैं मोटी कमाई? एक्सपर्ट ने बताई सबसे फायदेमंद नस्लें, दूध और मांस दोनों से होगा मुनाफा

Bakri Palan: ग्रामीण इलाकों में बकरी पालन किसानों के लिए कम लागत में अच्छी कमाई का जरिया बन रहा है. विशेषज्ञों के अनुसार अगर किसान सही नस्ल का चयन करें और समय पर टीकाकरण व देखभाल करें, तो दूध और मांस दोनों से अच्छा मुनाफा कमा सकते हैं. बरबरी और ब्लैक बंगाल नस्ल की बकरियां मांस उत्पादन के लिए काफी लोकप्रिय मानी जाती हैं.

Isha Gupta
नोएडा | Published: 11 Mar, 2026 | 04:10 PM

Goat Farming Tips: ग्रामीण इलाकों में बकरी पालन किसानों और पशुपालकों के लिए आज भी कम लागत में अच्छी कमाई का भरोसेमंद जरिया माना जाता है. खास बात यह है कि बकरियों को पालने के लिए ज्यादा जमीन या बड़े निवेश की जरूरत नहीं होती. अगर किसान सही नस्ल का चयन करें और पशुओं की समय पर देखभाल करें, तो इससे दूध और मांस दोनों से अच्छी आय प्राप्त की जा सकती है.

केंद्रीय बकरी अनुसंधान संस्थान के वैज्ञानिक डॉ. वाई के सोनी ने किसान इंडिया से बातचीत में कहा कि, बकरी पालन को सफल बनाने के लिए नस्ल का चुनाव, संतुलित आहार और समय-समय पर टीकाकरण बहुत जरूरी होता है.

बकरियों में होने वाली खतरनाक बीमारियों से रहें सतर्क

पशु विशेषज्ञ के अनुसार बकरियों में कई ऐसी बीमारियां भी होती हैं जो बेहद खतरनाक साबित हो सकती हैं. कुछ मामलों में बीमारी का असर इतना तेज होता है कि 4 से 24 घंटे के भीतर ही बकरी की मौत तक हो सकती है. इसलिए पशुपालकों को चाहिए कि वे समय पर टीकाकरण कराएं और बकरियों की नियमित जांच करवाते रहें. साफ-सफाई और संतुलित आहार का भी खास ध्यान रखना जरूरी है.

मांस उत्पादन के लिए बरबरी नस्ल है बेहतर

मांस उत्पादन के लिए बरबरी नस्ल की बकरी को काफी लोकप्रिय माना जाता है. यह नस्ल उत्तर प्रदेश के कई जिलों जैसे एटा, अलीगढ़, हाथरस और मथुरा में ज्यादा पाई जाती है. डॉ. वाई के सोनी के अनुसार, बरबरी बकरी का आकार छोटा होता है, लेकिन इसकी बढ़ने की गति तेज होती है. बरबरी बकरी की पहली बार बच्चे देने की उम्र लगभग 13 से 16 महीने होती है. एक साल की उम्र में नर बकरी का वजन करीब 20 से 30 किलोग्राम तक और मादा का वजन 18 से 25 किलोग्राम तक हो सकता है. यही कारण है कि मांस उत्पादन के लिए किसान इस नस्ल को ज्यादा पसंद करते हैं.

बरबरी बकरी की खास विशेषताएं

बरबरी नस्ल की बकरी की सबसे बड़ी खासियत इसकी बहु-प्रसव क्षमता है. यह नस्ल कई बार एक बार में दो से तीन बच्चों को जन्म देती है, जिससे पशुपालकों को जल्दी संख्या बढ़ाने का मौका मिलता है.

इसके अलावा यह बकरी सीमित संसाधनों में भी आसानी से पाली जा सकती है. छोटे और मध्यम किसान इसे कम लागत में पालकर अच्छा मुनाफा कमा सकते हैं. दूध उत्पादन की बात करें तो बरबरी बकरी लगभग 90 दिनों में 70 से 100 लीटर तक दूध दे सकती है. इस वजह से इसे दोहरे फायदे वाली नस्ल भी कहा जाता है.

ब्लैक बंगाल बकरी भी है मुनाफे वाली नस्ल

मांस उत्पादन के लिए ब्लैक बंगाल नस्ल की बकरी भी काफी प्रसिद्ध है. यह नस्ल मुख्य रूप से पश्चिम बंगाल के दक्षिणी क्षेत्रों में पाई जाती है. ब्लैक बंगाल बकरी का आकार छोटा होता है, लेकिन इसके मांस की गुणवत्ता बहुत अच्छी मानी जाती है. बाजार में इस नस्ल के मांस की मांग अधिक रहती है, इसलिए कई किसान इसका पालन करना पसंद करते हैं. विशेषज्ञों का कहना है कि किसान अगर अपने क्षेत्र की जलवायु और उपलब्ध चारे के अनुसार नस्ल का चयन करें, तो बकरी पालन से ज्यादा फायदा उठाया जा सकता है.

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